बढ़ते तापमान से बदहाल धरती

तेजी से बदल रहा है पृथ्वी का तापमान, जहां जुलाई को रिकॉर्ड किया गया मानव इतिहास का अब तक का सबसे गर्म महीना, वहीं पिछले 140 सालों में कभी भी इतना गर्म नहीं रहा जून

जुलाई 2019 को मानव इतिहास के अब तक के सबसे गर्म महीने के रूप में दर्ज किया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है । गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2016, अब तक के सबसे गर्म महीने के रूप में अंकित था । हालांकि जुलाई का डेटा अभी भी एकत्र किया जा रहा है, लेकिन महीने के पहले 29 दिनों के औसत के आधार पर यह माना जा रहा है कि इसके तापमान के जुलाई 2016 से कुछ अधिक रहने की सम्भावना है । वहीं विश्व मौसम संगठन के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2019 का औसत वैश्विक तापमान, पूर्व औद्योगिक काल के औसतवैश्विक तापमान से कम से कम 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की सम्भावना है।





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स्रोत: यू.एस. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) और नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा)


यू एस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार गत जून माह का तापमान 15.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो की 20 वीं सदी के औसत तापमान की तुलना में 0.9 सेल्सियस अधिक था। यह जून के पिछले 140 सालों में सबसे अधिक गर्म होने को दर्शाता है। इससे पहले जून का सर्वाधिक तापमान 2016 में रिकॉर्ड किया गया था । सारी दुनिया में कोई भी महाद्वीप तापमान और जलवायु में हो रहे इन परिवर्तनों से अछूता नहीं है, जहां वर्ष 2019 में यूरोप ने अब तक जून के तापमान के सारे पुराने रिकॉर्डों को तोड़ दिया है, जबकि रूस, अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमेरिका में भी तापमान के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं । वहीं फ्रांस में गत जून अब तक का सबसे गर्म महीना रिकॉर्ड किया गया, जो की एक असामान्य घटना है क्योंकि सामान्यतः जुलाई, जून की तुलना में अधिक गर्म रहता है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प चाहे जितना जलवायु परिवर्तन के सच को झुठलाते रहें, लेकिन अमेरिका भी जलवायु में हो रहे परिवर्तनों के जद से बाहर नहीं हैं । इस वर्ष में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी सबसे अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बनाया है । वहां जुलाई 2018 से जून 2019 तक 12 महीनों की अवधि में अमेरिकी इतिहास में अब तक की सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गयी है ।




साल दर साल तेजी से बढ़ रहा है वैश्विक तापमान
2001 के बाद रिकॉर्ड किये गए 20 में से 18 सबसे गर्म वर्ष

वैश्विक स्तर पर जिस तेजी से गर्मी बढ़ती जा रही है, वो निश्चित ही सबके लिए खतरे की घंटी है । गौरतलब है की 1998 को छोड़कर, दुनिया भर के 19 सबसे गर्म वर्षों में से अठारह 2001 के बाद ही रिकॉर्ड किये गए हैं। वहीं 2016 इतिहास में अब तक का सबसे गर्म वर्ष था, जब वार्षिक औसत तापमान सामान्य से 1.02 डिग्री सेल्सियस अधिक अंकित किया गया था । जबकि अन्य पांच सर्वाधिक गर्म वर्ष 2017 (0.92), 2015 (0.9), 2018 (0.85) और 2014 (0.75) थे । वास्तविकता में, वैश्विक रूप से पृथ्वी की सतह का तापमान सामान्य से लगभग 20 गुना अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जो सच में सभी के लिए चिंता का विषय है । यदि ऐसे ही तापमान में बढ़ोतरी होती रही तो जल्द ही इसके परिणामस्वरूप हमें भविष्य में और विनाशकारी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।

क्या आप जानते हैं? 1998 को छोड़कर, दुनिया भर के 19 सबसे गर्म वर्षों में से अठारह 2001 के बाद ही रिकॉर्ड किये गए हैं। वहीं 2016 इतिहास में अब तक का सबसे गर्म वर्ष था |

तेज़ी से बढ़ रहे प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के चलते भारत में भी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है । सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अध्ययन से पता चला है कि पिछले 20 वर्षों में तापमान जिस तेज़ी से बढ़ा है उतना पिछले 118 वर्षों (1901-2018) में कभी नहीं देखा गया।1995 से भारत का वार्षिक औसत तापमान तेजी से बढ़ा रहा है। यदि तापमान में हो रही वृद्धि के यह दर जारी रहती है, तो भारत में अगले दो दशकों के भीतर पारा 1.5 डिग्री सेल्सियस के खतरे के निशान से जल्द ही ऊपर निकल जायेगा । बढ़ते तापमान के चलते बाढ़, सूखा, तूफान जैसी चरम घटनाओं का होना आम होता जा रहा है, साथ ही इनकी तीव्रता में भी वृद्धि हो रही है। उदाहरण के लिए, भारत में वर्ष 2017 की सर्दियों में जब औसत तापमान 1901-1930 बेसलाइन से 2.95 डिग्री सेल्सियस अधिक था, उसी समय (2016-17) दक्षिणी भारत में सदी का सबसे भयंकर सूखा पड़ा था, जिसने 33 करोड़ से भी अधिक लोगों को प्रभावित किया था । अभी भी वक्त है यदि हम नहीं चेते और हमने इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये तो भविष्य में हमें इसके गंभीर परिणाम झेलने होंगे ।


 

 
2016 रहा अब तक का सबसे गर्म वर्ष
अधिक जानकारी के लिए ग्राफ पर अंकित लाइन पर जाएं स्रोत: यू.एस. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) और नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा)


आंकड़ों का स्रोत:

✸   यू.एस. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए)
✸   नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा)
✸   सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट
✸   काउंटिंग दा कॉस्ट ऑफ कटस्ट्रोफे, डाउन टू अर्थ