Governance

अकबर के मच्छर

अकबर ने कहा, इतना बड़ा एम्पायर चलाना, लगातार चुनाव जीतना मजाक की बात नहीं है

 
By Sorit Gupto
Last Updated: Wednesday 28 November 2018
अकबर के मच्छर
सोरित/सीएसई सोरित/सीएसई

अबुल फतह मुहम्मद जलालुद्दीन अकबर भारत के महान सम्राट थे। अकबर की दयालुता के किस्से उन दिनों अखबारों में बड़े मशहूर थे। इन किस्सों को न छापने पर मीडिया हाउस में इनकम टैक्स के छापे पड़ जाते या संपादकों को मालिकान प्रेमपूर्वक नौकरी से निकाल देते थे।

सम्राट अकबर ने बीरबल को चुटकुला मंत्री के रूप में नियुक्त किया था जो हर दिन कोई नया चुटकुला सुनाते। इन्ही चुटकुलों को दरबारीगण रोज सुबह एक-दूसरे को वाट्सऐप करते। उन दिनों हर साल त्योहारों के ठीक पहले राज्य में डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया जम कर फैलता था। वजह थे मच्छर। बादशाह अकबर दयालु ही नहीं बल्कि “इकोनोमिक-इनसाइट” सम्पन्न सम्राट थे। मच्छर-उन्मूलन के लिए बेशक उन्होंने एक पूरा विभाग बनाया था पर मच्छरों को मारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते थे। क्योंकि ऐसा करने से न केवल मच्छर मारने वाली टिकिया-क्रीम-अगरबत्ती और मास्कीटो-रिपेलेंट के बाजार पर बुरा असर पड़ता बल्कि इससे प्राइवेट अस्पतालों के व्यवसाय के मंदा होने का खतरा था और आखिरकार इससे देश की जीडीपी के गिरने का खतरा था।

बादशाह हर साल “बिगबॉस” का आयोजन करते थे जिसमें बड़े अजीबोगरीब नियमों के खेल खेले जाते थे। जैसे एक बार अकबर बादशाह ने बिगबॉस की मुनादी की कि जो कोई इंसान पूरे सीजन में इस डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया से बचकर दिखाएगा उसे बहुत बड़ा इनाम दिया जाएगा।

खबर न्यूज चैनलों के मार्फत गांव-देहातों तक पहुंची। कर्ज के बोझ से दबे एक किसान की बीवी ने उससे कहा, “ऐजी, सुनते हो क्या फर्क पड़ता है कि हम डेंगू-चिकनगुनिया-मलेरिया-मस्तिष्क ज्वर से मरें या कर्जदार की धमकियों से बचने के लिए आत्महत्या कर लें। तुम इस बार बिगबॉस में पार्टिसिपेट क्यों नहीं करते?”

किसान को आइडिया पसंद आया। उसने बिगबॉस में अर्जी दे दी और अपना बोरिया बिस्तर लेकर राजमहल के बाहर बहते गंदे नाले के किनारे झुग्गी डाल दी। हफ्ते गुजर गए पर वह डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया से बचा रहा।

अब अकबर के लिए मुसीबत यह थी कि कैसे इनाम से मुकरा जाए। इस अभूतपूर्व संकट से अकबर को बचाने के लिए राजा टोडरमल सामने आए। उन्होंने अकबर के कानों में कुछ कहा। अकबर खुश हो गए।

अकबर ने किसान को कहा, “ ऐ कर्जी किसान, हाल ही में हमने रूस के साथ हजारों करोड़ों रुपए की एयर डिफेन्स डील की है। साथ ही फ्रांस से राफेल विमानों को खरीदा है। तुम अगर आज भी डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया से बचे हो तो इसके लिए हमारी एयर डिफेन्स डील और राफेल विमान जिम्मेदार है। ऐसे में भला तुम कैसे किसी इनाम के हकदार हुए?”

बेचारा किसान गश खाकर वहीं गिर गया। पूरा दरबार अकबर जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। उधर टोडरमल खुश थे कि इस बार तीस फीसदी इन्क्रीमेंट तो पक्का है। क्या पता प्रमोशन भी मिल जाए।

बात बीरबल तक पहुंची। दूसरे दिन अकबर ने देखा कि बीरबल एक हांडी में खिचड़ी पका रहे हैं जो आग से काफी ऊपर है। अकबर के पूछने पर बीरबल ने कहा, “ओ महान अकबर, अगर कोई किसान आसमान में उड़ते राफेल और एयर डिफेन्स सिस्टम से मलेरिया और डेंगू से बच सकता है तो आग से दूर रहकर भला मेरी खिचड़ी क्यों नहीं पक सकती।”

अकबर ने अपनी नुकीली मूंछों पर ताव देते हुए कहा, “बीरबल, मैं अनपढ़ हूं तो इसका मतलब यह नहीं की एकदम ठूंठ हूं। इतना बड़ा एम्पायर चलाना, एक के बाद एक चुनावों को जीतना मजाक की बात नहीं है। रही बात खिचड़ी की तो वह आग के बगैर भी पक जाएगी। तुमने सोलर कुकर के बारे में नहीं सुना है क्या? और इस तरह पब्लिक में लकड़ी के चूल्हे में खाना पकाकर तुम हमारी उज्ज्वला योजना की भी मिट्टी पलीद कर रहे हो!”

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