फंगल इन्फेक्शन से लड़ने के लिए मिला नया हथियार

भारतीय शोधकर्ताओं ने धान के पौधे से एक बैक्टीरिया खोजा है, जो रोगजनक फंगस को खाता है। बैक्टीरिया में एक फंगल-रोधी प्रोटीन की भी पहचान की है। 

 
By Umashankar Mishra
Last Updated: Friday 08 September 2017
डॉ गोपालजी झा (अगली पंक्ति में दाएं से तीसरे स्थान पर) शोधकर्ताओं की टीम के साथ
डॉ गोपालजी झा (अगली पंक्ति में दाएं से तीसरे स्थान पर) शोधकर्ताओं की टीम के साथ डॉ गोपालजी झा (अगली पंक्ति में दाएं से तीसरे स्थान पर) शोधकर्ताओं की टीम के साथ

भारतीय शोधकर्ताओं ने धान के पौधे से एक बैक्टीरिया खोजा है, जो रोगजनक फंगस (फफूंद) को खाता है, साथ ही शोधकर्ताओं ने उस बैक्टीरिया में एक फंगल-रोधी प्रोटीन की भी पहचान की है, जो कई तरह के फंगल इन्फेक्शन से लड़ने में मददगार हो सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार बीजी-9562 नामक यह नया प्रोटीन पौधों के साथ-साथ मनुष्य और अन्य जीव-जंतुओं में होने वाले फंगल इन्फेक्शन को रोकने में कारगर साबित हो सकता है। यह शोध नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च (एनआईपीजीआर) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है।

अध्ययनकर्ताओं की टीम में शामिल प्रमुख शोधकर्ता डॉ. गोपालजी झा ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “बीजी-9562 एक फंगल-रोधी प्रोटीन है, जो फंगल-भोजी बैक्टीरिया बर्खोल्डेरिआ ग्लैडिओली के एक रूप एनजीजे1 में पाया जाता है। एनजीजे1 फंगस पर आश्रित रहता है और उसकी कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है।”

धान की शीथ ब्लाइट नामक बीमारी के लिए जिम्मेदार फफूंद राइजोक्टोनिया सोलानी के नियंत्रण में एनजीजे1 को प्रभावी पाया गया है। लेकिन पहले वैज्ञानिकों को यह मालूम नहीं था एनजीजे1 में पाए जाने वाले इस गुण के लिए कौन-सा तत्व जिम्मेदार है। हालांकि अव वैज्ञानिकों का मानना है कि फफूंद को अपना भोजन बनाने के गुण के कारण किसी अन्य फंगल-रोधी बैक्टीरिया की अपेक्षा एनजीजे1 ज्यादा प्रभावी जैव नियंत्रक साबित हो सकता है। यह अध्ययन हाल में शोध पत्रिका नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित किया गया है।

डॉ. झा के अनुसार “बीजी-9562 प्रोटीन फंगल-रोधी उपचार में कई तरीकों से उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए इस प्रोटीन के उपयोग से तैयार मिश्रण खेतों में छिड़ककर फसल को रोगों से बचा सकते हैं। फंगल संक्रमण के उपचार के लिए दवा बनाने में भी यह कारगर हो सकता है। इसके अलावा फंगल-रोधी पौधे विकसित करने में भी ट्रांसजीन के रूप में बीजी-9562 जीन का उपयोग हो सकता है।”

दुनिया भर में रोगजनक फफूंद कई रूपों में खतरा बने हुए हैं। राइजोक्टोनिया सोलानी, मैग्नापोर्थ ओराइजे, फ्यूसिरियम ऑक्सिसपोरम, एस्कोकाईटा रैबेई और वेंचुरिया इनैक्वालिस नामक फंगस पौधों के कुछ प्रमुख रोगजनक माने जाते हैं। कुछ फफूंद जैसे कि कैंडिडा एल्बिकैन्स मनुष्य और जानवरो में भी फंगल संक्रमण का कारण होते हैं। इनके नियंत्रण के प्रभावी उपाय खोजे जा रहे हैं। इस लिहाज से यह खोज काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अध्ययनकर्ताओं की टीम में डॉ. गोपालजी झा के अलावा दुर्गा माधव स्वैन, सुनील कुमार यादव, ईशा त्यागी, राहुल कुमार, राजीव कुमार, श्रेयान घोष और जयती दास शामिल थे।

(इंडिया साइंस वायर)

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