विश्व महासागर दिवस : सागर के सहारे भविष्य

अपने आरंभिक काल से आज तक महासागर जीवन के विविध रूपों को संजोए हुए हैं

 
By Navneet Kumar Gupta
Last Updated: Friday 09 June 2017 | 10:06:07 AM
आज जब विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों में निवास करता है तो ऐसी स्थिति में महासागर उनके लिए खाद्य पदार्थों का प्रमुख स्रोत साबित हो सकते हैं। Credit : Chinky Shukla
आज जब विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों में निवास करता है तो ऐसी स्थिति में महासागर उनके लिए खाद्य पदार्थों का प्रमुख स्रोत साबित हो सकते हैं। Credit : Chinky Shukla आज जब विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों में निवास करता है तो ऐसी स्थिति में महासागर उनके लिए खाद्य पदार्थों का प्रमुख स्रोत साबित हो सकते हैं। Credit : Chinky Shukla

सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण महासागर अत्यंत उपयोगी हैं। महासागरों के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 8 जून को विश्व महासागर दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष एक थीम विशेष पर पूरे विश्व में महासागर दिवस से संबंधित आयोजन किए जाते हैं। इस वर्ष की थीम ''हमारे महासागर-हमारा भविष्य'' है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र के तत्‍वाधान में निश्चित किए गए टिकाऊ विकास के लक्ष्यों में महासागरों के संरक्षण एवं उनके टिकाऊ उपयोग को भी शामिल किया गया है। इससे संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए इस सप्‍ताह संयुक्‍त राष्‍ट्र महासागर सम्‍मेलन चल रहा है।

जीवन के विविध रूप

पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व यहां उपस्थित वायुमंडल और महासागरों जैसे कुछ विशेष कारकों के कारण ही संभव हो पाया है। अपने आरंभिक काल से आज तक महासागर जीवन के विविध रूपों को संजोए हुए हैं। पृथ्वी के विशाल क्षेत्र में फैले अथाह जल का भंडार होने के साथ ही महासागर अपने अंदर व आसपास अनेक छोटे-छोटे नाजुक पारितंत्रों को पनाह देते हैं जिससे उन स्थानों पर विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु व वनस्पतियां पनपती हैं। महासागरों में प्रवाल भित्ति क्षेत्र ऐसे ही एक पारितंत्र का उदाहरण है, जो असीम जैवविविधता का प्रतीक है।

10 लाख प्रजातियों को शरण

तटीय क्षेत्रों में स्थित मैन्ग्रोव जैसी वनस्पतियों से संपन्न वन, समुद्र के अनेक जीवों के लिए नर्सरी बनकर विभिन्न जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं। अपने आरंभिक काल से आज तक महासागर जीवन के विविध रूपों को संजोए हुए हैं। महासागरों पृथ्वी के सबसे विशालकाय जीव व्हेल से लेकर सूक्ष्म जीव को रहने के लिए ठिकाना मुहैया कराते हैं। एक अनुमान के अनुसार समुद्रों में जीवों की करीबन दस लाख प्रजातियां मौजूद हैं।

मौसम के निर्धारण में भूमिका

महासागर धरती के मौसम को निर्धारित करने वाले प्रमुख कारक हैं। महासागरीय जल की लवणता और विशिष्ट ऊष्माधारिता का गुण पृथ्वी के मौसम को प्रभावित करता है। यह तो हम जानते ही हैं कि पृथ्वी की समस्त ऊष्मा में जल की ऊष्मा का विशेष महत्व है। अधिक विशिष्ट ऊष्मा के कारण दिन में सूर्य की ऊर्जा का बहुत बड़ा भाग समुद्री जल में समाहित हो जाता है। इस प्रकार अधिक विशिष्ट ऊष्माधारिता से महासागर ऊष्मा का भण्डारक बन जाते हैं जिसके विश्व भर में मौसम संतुलित बना रहता है या कहें कि पृथ्वी पर जीवन के लिए औसत तापमान बना रहता है।

समुद्री धाराओं का महत्व

मौसम के संतुलन में समुद्री जल की लवणता का भी विशेष महत्व है। समुद्री जल के खारेपन और पृथ्वी की जलवायु में बदलाव की घटना आपस में अन्तःसंबंधित होती है। हम जानते ही हैं कि ठंडा जल, गर्म जल की तुलना में अधिक घनत्व वाला होता है। इसके अलावा महासागर में किसी स्थान पर सूर्य के ताप के कारण जल के वाष्पित होने से उस क्षेत्र के जल के तापमान में परिवर्तन होने के साथ वहां के समुद्री जल की लवणता और आसपास के क्षेत्र की लवणता में अंतर उत्पन्न हो जाता है जिसके कारण गर्म जल की धाराएं ठंडे क्षेत्रों की ओर बहती है और ठंडा जल उष्ण और कम उष्ण प्रदेशों में बहता है। अत: महासागर के जल का खारा होना समुद्री धाराओं के बहाव की घटना का एक मुख्य कारण है। यदि सारे समुद्रों का जल मीठा होता तो लवणता का क्रम कभी न बनता और जल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाली धाराएं सक्रिय न होतीं। परिणामस्वरूप ठंडे प्रदेश बहुत ठंडे रहते और गर्म प्रदेश बहुत गर्म। तब पृथ्वी पर जीवन के इतने रंग न बिखरे होते क्योंकि पृथ्वी की असीम जैव विविधता का एक प्रमुख कारण यह है कि यहां अनेक प्रकार की जलवायु मौजूद है और जलवायु के निर्धारण में महासागरों का महत्वपूर्ण योगदान नकारा नहीं जा सकता है।

30 प्रतिशत आबादी का सहारा

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति महासागरों में ही हुई और आज भी महासागर जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियों को बनाए रखने में सहायक हैं। क्योंकि महासागर पृथ्वी के एक तिहाई से अधिक क्षेत्र में फैले हैं इसलिए महासागरीय पारितंत्र में थोड़ा सा परिवर्तन पृथ्वी के समूचे तंत्र को अव्यवस्थित करने की सामर्थ्य रखता है।

आज जब विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों में निवास करता है तो ऐसी स्थिति में महासागर उनके लिए खाद्य पदार्थों का प्रमुख स्रोत साबित हो सकते हैं। महासागर खाद्य पदार्थों का एक प्रमुख स्रोत होने के कारण हमारी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की मदद से महासागरों से पेट्रोलियम सहित अनेक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को निकाला जा रहा है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन सहित अनेक मौसमी परिघटनाओं को समझने के लिए समुद्रों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत गोवा में कार्यरत राष्ट्रीय समुद्रविज्ञान संस्थान में ऐसे अनेक अध्ययन किए जा रहे हैं।

प्रदूषण चिंता का विषय

महासागरों में बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय बनता जा रहा है। अरबों टन प्लास्टिक का कचरा हर साल महासागर में समा जाता है। आसानी से विघटित नहीं होने के कारण यह कचरा महासागर में जस का तस पड़ा रहता है। अकेले हिंद महासागर में भारतीय उपमहाद्वीप से पहुंचने वाली भारी धातुओं और लवणीय प्रदूषण की मात्रा प्रतिवर्ष करोड़ों टन है। विषैले रसायनों के रोजाना मिलने से समद्री जैव विविधता भी प्रभावित होती है।इन विषैले रसायनों के कारण समुद्री वनस्पति की वृद्धि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने वाले परितंत्रों में महासागर की उपयोगिता को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम महासागरीय पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखें, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। (इंडिया साइंस वायर) 

Subscribe to Weekly Newsletter :

Related Story:

वैज्ञानिक करेंगे सागर मंथन

IEP Resources:

How does the SST variability over the western North Atlantic Ocean control Arctic warming over the Barents–Kara Seas?

Bioaccumulation of persistent organic pollutants in the deepest ocean fauna

Rapid emergence of climate change in environmental drivers of marine ecosystems

Global warming-induced upper-ocean freshening and the intensification of super typhoons

We are a voice to you; you have been a support to us. Together we build journalism that is independent, credible and fearless. You can further help us by making a donation. This will mean a lot for our ability to bring you news, perspectives and analysis from the ground so that we can make change together.

Comments are moderated and will be published only after the site moderator’s approval. Please use a genuine email ID and provide your name. Selected comments may also be used in the ‘Letters’ section of the Down To Earth print edition.