Forests

वनाधिकार के लिए 32 गांव के लोग भूख हड़ताल पर

ग्रामीण वन प्रबंधन के अधिकार की मांग कर रहे हैं क्योंकि इसके बिना जंगलों पर वन विभाग का अधिकार बना रहेगा 

 
By Ishan Kukreti
Last Updated: Friday 31 August 2018
23 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीणों की मांग है कि वनाधिकार कानून लागू किया जाए
23 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीणों की मांग है कि वनाधिकार कानून लागू किया जाए 23 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीणों की मांग है कि वनाधिकार कानून लागू किया जाए

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में 32 गांवों के लोग पिछले 9 दिन से अनिश्चिकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रशासन ने उनकी मांगों की तरफ अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है।

23 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीणों की मांग है कि अनुसूचित जनजाति एवं पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून 2006 (एफआरए) को लागू किया जाए।  

भूख हड़ताल की शुरुआत करने वाले संगठन छत्तीसगढ़ वन अधिकार मंच से जुड़े गंगाराम पेकरा का कहना है कि जिले में वन प्रबंधन के अधिकार दिए बिना सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) दे दिए गए हैं। हम प्रबंधन के अधिकार की मांग कर रहे हैं क्योंकि इसके बिना वन विभाग का वनों पर अधिकार बना रहेगा।

एफआरए के तहत दो तरह की भूमि का स्वामित्व दिया जाता है- व्यक्तिगत और सामुदायिक। व्यक्तिगत वनाधिकार किसी व्यक्ति से संबंधित है जबकि सीएफआर पूरे समुदाय से संबंधित होता है और यह गांव की सीमा के आधार पर प्रदान किया जाता है।

सरगुजा में सरकार ने व्यक्तिगत वनाधिकार के तहत भूमि प्रदान की है जो बेहद कम है। पेकरा का कहना है कि ऐसे कई मामले हैं जहां मूल कब्जा 5 एकड़ पर है लेकिन वनाधिकार के तहत 0.5 एकड़ जमीन ही दी गई है।

वनाधिकार के तहत अधिकतम 4 हेक्टेयर तक जमीन दी जा सकती है।

पेकरा बताते हैं कि संवेदनशील आदिवासी समूह पहाड़ी कोरबा समुदाय का वनाधिकार मैपिंग होने के बाद भी पिछले दो साल से सब- डिवीजनल स्तर की समिति के पास लटका हुआ है।   

जब इस मामले में जिला कलेक्टर कार्यालय में एक अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं है। जिला कलेक्टर प्रतिक्रिया देने के लिए उपलब्ध नहीं थे। 

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