विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग को जल्द मिलेगा नया घर

नए भवन का निर्माण करीब नौ एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा, जिसमें भूमि का 22 प्रतिशत हिस्सा घिरा होगा, हरित क्षेत्र 52 प्रतिशत होगा। इस परिसर में 16,500 वर्गमीटर क्षेत्र में कार्यालय होंगे।

 
By Umashankar Mishra
Last Updated: Friday 04 May 2018
भवन की आधारशिला बृहस्पतिवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के 47वें स्थापना दिवस के अवसर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने रखी
भवन की आधारशिला बृहस्पतिवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के 47वें स्थापना दिवस के अवसर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने रखी भवन की आधारशिला बृहस्पतिवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के 47वें स्थापना दिवस के अवसर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने रखी

सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए आवश्यक वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए अनुकूल माहौल और बेहतर सुविधाओं के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय अपने दो प्रमुख विभागों विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) एवं वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) तथा इनके अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्थानों के लिए आधुनिक भवन का निर्माण करने जा रहा है। इस भवन की आधारशिला बृहस्पतिवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के 47वें स्थापना दिवस के अवसर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने रखी है।

इस अवसर बोलते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि “मुझे उम्मीद है कि यह नया परिसर देश में सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्र में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को प्रदर्शित करने वाले एक प्रतीक के रूप में स्थापित होगा।” नई दिल्ली के कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया में इस भवन का निर्माण करीब 192 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

डीएसटी सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने बताया कि “नए भवन का निर्माण करीब नौ एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा, जिसमें भूमि का 22 प्रतिशत हिस्सा घिरा होगा, जबकि हरित क्षेत्र 52 प्रतिशत होगा। इस परिसर में कुल 16,500 वर्गमीटर क्षेत्र में कार्यालय होंगे।”

नया भवन पूरी तरह से पर्यावरण हितैषी होगा। इसमें लगे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये प्रतिदिन एक लाख लीटर सीवेज वाटर का उपचार करके उसका उपयोग बागवानी के लिए किया जाएगा। बाहरी क्षेत्र और अग्रभाग में पूरी तरह से एलईडी लाइट का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण के लिए वर्षा जल संचयन पिट और 300 किलोवाट क्षमता की ग्रिड इंटरेक्टिव सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली भी स्थापित की जाएगी।

इस नए भवन के परिसर के केंद्र में कलाकृतियों से सजा हरा-भरा प्रांगण भी होगा। इस परिसर का निर्माण दिव्यांगों को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अतिरिक्त इस परिसर में 500 लोगों की क्षमता वाला एक ऑडिटोरियम, एक बैंक और एक पोस्ट ऑफिस भी होगा। इस परिसर में भूतल और सतह को मिलाकर कुल 640 वाहन खड़े किए जाने की क्षमता होगी।

परिसर का निर्माण दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में पांच मंजिला दो ब्लॉक बनाए जाएंगें। एक ब्लॉक में डीएसटी और डीएसआईआर का ऑफिस होगा, वहीं दूसरे ब्लॉक में साइंस ऐंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, विज्ञान प्रसार, टाइफेक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड का ऑफिस होगा। दूसरे चरण में ऑडिटोरियम और अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए इरकॉन इन्फ्रा ऐंड सर्विसेज के साथ समझौता किया गया है। (इंडिया साइंस वायर)

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