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सुकून भरी मौत का स्विस मॉडल

स्विट्जरलैंड में आत्महत्या के लिए मदद को नागरिक का अधिकार माना जाता है। यह देश सुसाइड टूरिज्म के रूप में उभर रहा है। 

By Samuel Bloen
Last Updated: Thursday 02 August 2018
तारिक अजीज / सीएसई
तारिक अजीज / सीएसई तारिक अजीज / सीएसई

इसी साल मई में 104 वर्षीय ऑस्ट्रेलियन वैज्ञानिक डेविड गूडाल अपने घर पश्चिम ऑस्ट्रेलिया से स्विट्जरलैंड पहुंचे। वह मृत्यु के अधिकार समर्थक दो संस्थाओं लाइफसर्कल और एक्जिट इंटरनेशनल की सहायता से आत्महत्या करने गए थे। गूडाल एक विस्तृत लेकिन हाशिए की परिघटना का हिस्सा बने जिसे प्रायः “सुसाइड टूरिजम” कहा जाता है।

यह टूरिजम तब होता है, जब कोई स्विट्जरलैंड में मरने के लिए मदद लेने जाता है, क्योंकि उनके देश में इस पर रोक है या कड़े कानून हैं। पूरी दुनिया में उनकी कहानी से एक बहस ने जन्म लिया। हालांकि मीडिया ने मृत्यु में सहायता के इस स्विस मॉडल पर कोई सार्थक बहस प्रस्तुत नहीं की।

मीडिया में इस मसले पर जिन मुद्दों पर बात हुई, उनमें स्विस मॉडल की कार्य प्रणाली पर बात कम हुई। इसके बजाय सुसाइड टूरिजम पर हुए मीडिया कवरेज में ज्यादा बहस इस बात पर हुई कि किसी भी देश में मृत्यु के लिए दी जाने वाली सहायता में जनता का क्या मत है। मृत्यु की दिशा में जाने के लिए एकमात्र उम्मीद स्विट्जरलैंड ही नहीं है।

यह उन देशों की जनता के बीच बहस का मुद्दा है जिनके नागरिक स्विट्जरलैंड में मृत्यु के लिए सहायता मांग रहे हैं। वास्तव में उस देश की जनता पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है जिसके नागरिक अपने परिवार और घर से दूर दूसरे देश में मृत्यु के लिए जाते हैं। यह दृढ़ इच्छाशक्ति और पीड़ा का स्वीकार करने वाला साक्ष्य प्रदान करता है।

साथ ही मृत्यु पाने के लिए प्रदान की जाने वाली सहायता को कानून सम्मत बनाने की संभावनाओं को भी दर्शाता है। मैं पिछले तीन साल से कनाडा और स्विट्जरलैंड के बीच तुलनात्मक शोध कर रहा हूं, मुख्य तौर पर क्यूबेक प्रोविंस और स्विट्जरलैंड के कैंटोन दे वॉड के बीच। जब मैं जन योजनाओं का अध्ययन करता हूं तो मेरे द्वारा प्राप्त प्राथमिक सूचनाओं में मुख्य तौर पर यह पता लगाना होता है कि जो लोग मृत्यु देने में सहायक हैं, उनके इस कार्य के अपने क्या मायने और अनुभव हैं।

मृत्यु के लिए चिकित्सीय सहायता

कुछ लोग जो इस यात्रा पर जा रहे हैं उन्हें अपने निर्णय का जनता पर पड़ने वाले प्रभाव का भान है, जैसा कि हम गूडाल के मामले में देख सकते हैं। उन्होंने बसेल में अपनी मृत्यु से पहले 9 मई 2018 को एक प्रेसवार्ता रखी थी। कुछ लोग गुडाल की तरह एक ऐसे आंदोलन में भागीदारी कर रहे हैं जो वृद्ध लोगों के मरने के अधिकार “ओल्ड एज रैशनल सुसाइड” की वकालत करते हैं। वहीं कुछ लोगों के लिए चिकित्सीय अवस्था के कारण पीड़ा इस ओर जाने की मुख्य वजह है।

कनाडा में कई बार राष्ट्रीय चैनल पर स्विट्जरलैंड की इस मृत्यु सहायता के बारे में रिपोर्टें प्रसारित हुईं हैं। सबसे ज्यादा मशहूर घटना के कार्टर की है, उन्हें रीढ़ संबंधी विकार था। उन्होंने स्विस राइट टु डाई संस्था डिग्नितास की मदद से स्विट्जरलैंड में मृत्यु प्राप्त की।

अभी तक कनाडा में सहायता देकर मृत्यु वैध नहीं थी। पिछले कई वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी, जिसमें कार्टर एक प्रमुख वादी थीं। अब उनका नाम कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय के साथ जुड़ गया है जिसमें कनाडा में 2015 में मृत्यु के लिए चिकित्सीय सहायता को गैर अपराधिक मान लिया गया।

क्यूबेक में वर्ष 2004 में “मेननः ले दरनियर ड्राइट” नामक वृत्तचित्र में मेनन ब्रूनेल नामक महिला का जिक्र है। वह मल्टीपल स्केलोराइसिस से पीड़ित थी। वह कनाडा छोड़कर डिग्नितास की सहायता से मृत्यु प्राप्त करने के लिए स्विट्जरलैंड गईं। इस फिल्म ने लोगों के बीच बातचीत के लिए उत्सुकता पैदा की। कनाडा में मृत्यु के लिए चिकित्सीय सहायता को कानूनी वैधता प्राप्त होने के बावजूद तथाकथित “सुसाइड टूरिजम” खत्म नहीं हुआ। डिग्नितास के अनुसार, 1998 से 2017 के बीच 60 कनाडावासियों ने इसकी सेवाएं प्राप्त की। 2017 में 12 व्यक्तियों ने सेवा ली।

मृत्यु का अधिकार

अन्य स्विस राइट टु डाई संस्थाओं ने भी इस तरह के प्रयास आरंभ किए, जो अंतरराष्ट्रीय विवाद के रडार पर नहीं आ सके।

स्विस में राइट टु डाई के लिए 8 संस्थाएं काम कर रही हैं उनमें से केवल डिग्नितास ने ही लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। यह संस्था विवादों का सामना कर रही है। इसके संस्थापक लुडविग मिनेली पर इस कार्य में व्यक्तिगत मुनाफा कमाने के लिए मुकदमा चल रहा है। उन पर मृत्यु में सहायता देने के तीन मामलों पर अभियोग चल रहा है जो कि स्विस क्रिमिनल कोड के अनुसार वर्जित है। हालांकि इन आरोपों को अभी तक न्यायालय में साबित नहीं किया जा सका है।

वर्ष 1942 से ही स्विट्जरलैंड में मृत्यु में सहायता देने को मान्यता मिली है बशर्ते मृत्यु में सहायता देने वाले व्यक्ति का इसमें अपना कोई हित न हो। यही नहीं जो व्यक्ति यह सुविधा प्राप्त करना चाहता है उसमें निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। उसे प्राणघातक दवाई भी स्वयं ही लेनी होगी। मृत्यु के लिए चिकित्सीय सहायता पर कनाडा संघ व राज्य के कानूनों की तुलना की जाए तो स्विस नियम और संरक्षण को थोड़ा लचीला माना जा सकता है। हालांकि इसमें स्विट्जरलैंड में सहायता प्राप्त आत्महत्या को कोई अर्थ समझ में नहीं आता।

कनाडा के विपरीत स्विट्जरलैंड में सहायता प्राप्त आत्महत्या को एक नागरिक का अधिकार माना जाता है न कि स्वास्थ्य सेवा का हस्तक्षेप। स्विट्जरलैंड सहायता प्राप्त मृत्यु के लिए चिकित्सीय दृष्टिकोण को ज्यादा महत्व नहीं देने का विचार प्रस्तुत करता है।

स्विस दिशानिर्देश

स्विस मॉडल मुख्यतः विभिन्न स्वास्थ्य सेवा प्रदानकर्ता संस्थाओं द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों और राइट टु डाई संस्थाओं द्वारा निर्धारित नियमों पर आधारित है। स्विट्जरलैंड के फ्रेंच भाषी शहर में सक्रिय स्वयंसेवी संस्था एग्जिट में 26,000 सदस्य हैं जिन्हें वार्षिक सम्मेलन में वोट का अधिकार प्राप्त है। संस्था का सदस्य बनने के लिए उम्र 20 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। सदस्य को वार्षिक अनुदान 40 अमेरिकी डॉलर देना पड़ता है। उसे स्विस नागरिक भी होना चाहिए। यह संस्था अपने सदस्यों को बिना किसी शुल्क के मृत्यु में सहायता प्रदान करती है।

कानूनी प्रावधान के अतिरिक्त इस संस्था के अपने मानदंड हैं, इसके सदस्य उन मानदंडों के आधार पर व्यक्ति को मरने में सहायता प्रदान करते हैं जिनके मानदंडों में किसी भी असाध्य बीमारी या किसी अमान्य स्थिति या किसी असहनीय दर्द से पीड़ित होना या वृद्धावस्था में विक्लांग करने वाली बीमारी पोलीपैथोलोजिस से पीड़ित होना शामिल है।

एक परामर्शदाता चिकित्सक से आवेदक की स्थिति का पूरा जायजा लिया जाता है। यदि उसका आवेदन सत्य पाया जाता है तो चिकित्सक उसके लिए एक प्राणघातक दवाई लिखता है, जो एक स्वयंसेवक लेकर आता है। स्वयंसेवकों को उनकी पेशागत योग्यता के आधार पर चुना नहीं जाता है बल्कि उनकी कार्यकुशलता को ध्यान में रखकर चुना जाता है। इसमें व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और उसकी स्थिति के प्रति समझ जैसे गुण निर्णायक होते हैं। व्यक्ति की मृत्यु के बाद स्वयंसेवक पुलिस को बुलाता है जो मामले का निरीक्षण करता है। उसके बाद जन अभियोक्ता निर्धारित करता है कि जो भी व्यक्ति इस मामले में संलग्न हैं उनके प्रति आपराधिक मामला बनता है कि नहीं।

जीवन के अंत की गरिमा

क्यूबेक में एंड ऑफ लाइफ केयर का सम्मान करने वाला कानून वर्ष 2014 में पारित और 2015 से लागू किया गया। यह कानून दर्द निवारक देखभाल के अधिकार का सृजन करने और निरंतर दर्द निवारक औषधि के लागू करने जैसे अन्य नियमों के अतिरिक्त मृत्यु प्राप्त करने के लिए चिकित्सीय सहायता को कानूनी रूप से वैध घोषित करता है। इसमें केवल युथेनसिया (डॉक्टर की निगरानी में) को शामिल किया गया है न कि सहायता प्राप्त आत्महत्या (स्व-नियंत्रित) को। इस संदर्भ में सहायता प्राप्त आत्महत्या को एक उपयुक्त विकल्प के तौर पर नहीं समझा गया है क्योंकि यह चिकित्सीय सहायता और सुरक्षा के महत्व को इंगित नहीं करता।

राज्य के कानून ने मृत्यु प्राप्त करने के लिए चिकित्सीय सहायता को वर्ष 2016 में वैध घोषित किया और इसमें युथेनेसिया और सहायता प्राप्त आत्महत्या दोनों को शामिल किया। राज्य का कानून युथेनेसिया और सहायता प्राप्त आत्महत्या दोनों की आज्ञा देता है, अपितु कनाडावासी पूरी तरह से पहले विकल्प का ही चयन करते हैं। अक्टूबर 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 2,149 में से केवल 5 व्यक्तियों ने स्व-नियंत्रित मृत्यु का विकल्प चुना। अतः कनाडा के लिए स्विट्जरलैंड एक मॉडल नहीं हो सकता।

वहीं, दूसरी ओर मैं जो तुलना लगातार कनाडा और स्विट्जरलैंड के बीच कर रहा हूं, वह बताता है कि मृत्यु में सहायता को न केवल एक रोगी के निर्णय की तरह देखा जाना चाहिए बल्कि एक व्यक्ति के निर्णय के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। उसी तरह जैसे जन्म के लिए दूसरे गैर चिकित्सीय विकल्प मौजूद हैं। मृत्यु के लिए सहायता के तौर पर गैर चिकित्सीय या कम चिकित्सीय तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए।

स्विस मॉडल दर्द निवारक देखभाल का विकल्प देता है। साथ ही अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त पीड़ा व मृत्यु की गरिमा से उत्पन्न चुनौतियों से परिचित कराता है और अन्य सामाजिक प्रतिक्रियाओं के बारे में विचार करने के लिए एक निमंत्रण प्रस्तुत करता है।

(लेखक मान्ट्रियल विश्वविद्यायल में पीएचडी कर रहे हैं। यह लेख द कन्वरसेशन से विशेष समझौते के तहत प्रकाशित)

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