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सेहत और स्वाद की घंटियां

कई बीमारियों के उपचार के साथ-साथ जमरूल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। भारत समेत कई देशों में इसे सौभाग्य का प्रतीक माना गया है

 
By Chaitanya Chandan
Last Updated: Thursday 27 April 2017
जमरूल जैम (विकास चौधरी / सीएसई)
जमरूल जैम (विकास चौधरी / सीएसई) जमरूल जैम (विकास चौधरी / सीएसई)

बचपन में जब दोस्तों के साथ सुबह की सैर पर निकलते थे तो उस वक्त हमारी सबसे पसंदीदा जगह थी जयप्रकाश उद्यान, जिसे कंपनी गार्डन के नाम से भी जाना जाता था। यह बिहार के मुंगेर जिले में स्थित है। जयप्रकाश उद्यान की विशेषता यह थी कि उसमें सैकड़ों तरह के फल-फूलों के पेड़-पौधे थे। हम लोग वहां जाते और तरह-तरह के फलों का रसास्वादन करते। उन्हीं फलों में से एक था - जमरूद, जिसे जमरूल या अंग्रेजी में वैक्स एप्पल और वाटर एप्पल भी कहा जाता है। भारत में जमरूल कुछ दशक पहले आसानी से मिल जाया करते थे, जो कि आजकल दुर्लभ होते जा रहे हैं।

जमरूल का वैज्ञानिक नाम सिजीजियम समरंजेंस है। यह मुख्यतः दो रंगों - सफेद और गुलाबी- का होता है। इसमें 70 प्रतिशत तक पानी होता है, इसलिए अंग्रेजी में इसे वाटर एप्पल भी कहा जाता है। गुलाबी जमरूल को अंग्रेजी में रोज एप्पल के नाम से जाना जाता है। इसके पेड़ की ऊंचाई 12 मीटर तक होती है, िजस पर सफेद रंग के फूल आते हैं। यह मुख्यतः गर्मी का फल है और मई-जून के महीने में पकता है।

जमरूल का स्वाद बहुत कम मीठा होता है। कुछ जमरूल थोड़े खट्टे भी होते हैं। सबसे मीठे जमरूल का रंग सबसे गहरा या सबसे हल्का होता है। इसलिए सफेद और गहरे गुलाबी जमरूल सबसे मीठे होते हैं। जमरूल का सर्वाधिक उत्पादन ताइवान और अमेरिका के फ्लोरिडा में होता है।

जमरूल की उत्पत्ति मूल रूप से मलाया और निकोबार द्वीप समूह में मानी जाती है। समझा जाता है िक प्रागैतिहासिक काल (करीब 30,000 वर्ष पहले) में इस फल का प्रसार फिलीपींस और अन्य एशियाई देशों में हुआ। वर्तमान में यह थाईलैंड, कंबोडिया, ताइवान, वियतनाम, लाओस और भारत का लोकप्रिय फल है। वर्ष 1993 के आसपास यह जमैका और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया। हालांकि इस फल के जल्दी सड़ने की प्रकृति होने के कारण इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर नहीं किया जाता है। अमेिरका के फ्लोरिडा प्रांत में भी जमरूल का वाणिज्यिक उत्पादन किया जाता है।

औषधीय गुणों से 
लबरेज जमरूल के फल (मनोज के. मोहन)

जमरूल को संस्कृत में जम्बू फल कहा जाता है और शास्त्रों में भी इसका उल्लेख मिलता है। एक मान्यता के अनुसार, भारतवर्ष का नाम जम्बू द्वीप इसी जम्बू फल के नाम से पड़ा। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जम्बू फल हाथियों के आकार िजतने बड़े हुआ करते थे। मान्यता है िक यह फल भगवान गणेश को प्रिय हैं। उनकी स्तुति में भी इस फल का नाम आता है। हालांकि, जम्बू फल को लेकर कई मान्यताओं में अन्तर्विरोध भी हैं। कई विद्वान इसे जामुन का फल भी बताते हैं। जमरूल का दक्षिण पूर्व एशिया की लोक कथाओं में भी काफी जिक्र मिलता है। फिलीपींस की कई लोक कथाओं में इसके पेड़ को सौभाग्य के प्रतीक के रूप में वर्णित किया गया है। एक मिथक बताता है कि कैसे एक तटीय शहर ने एक सुंदर घंटी को दंगाइयों द्वारा चोरी िकये जाने से बचाने के लिए दफन कर दिया था। इस जगह एक पेड़ उग आया और उस पर घंटी के आकार के सुन्दर फल लगने लगे, जिसे बेल फ्रूट का नाम दिया गया।

औषधीय गुण

ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के साथ ही जमरूल अपने में औषधीय गुणों को भी समेटे है। ताईवान में जमरूल का इस्तेमाल दस्त और बुखार के उपचार के लिए किया जाता है। मलेशिया में जमरूल के सूखे पत्तों का इस्तेमाल फटी जीभ के उपचार और इसके तने की छाल के चूर्ण का इस्तेमाल त्वचा रोगों के इलाज में किया जाता है। पुस्तक ‘फ्रूट्स ऑफ वार्म क्लाईमेट्स’ के अनुसार कम्बोडिया के लोग फल, पत्तियों को मिलाकर एक लेप बना लेते हैं, िजसका इस्तेमाल बुखार के उपचार के साथ ही त्वचा की शुष्कता दूर करने के लिए िकया जाता है। ब्राजील में जमरूल का इस्तेमाल सिरदर्द, खांसी, मधुमेह और कब्ज दूर करने के लिए होता है।

जमरूल के औषधीय गुणों की पुष्टि कई वैज्ञानिक शोधों से भी होती है। वर्ष 2003 में फूड केमिस्ट्री नमक जर्नल में प्रकशित एक शोध के अनुसार जमरूल में मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल को दूर करने की क्षमता है। वर्ष 2012 में फूड एंड केमिकल टॉक्सिकोलॉजी नामक जर्नल में प्रकाशित शोध बताता है कि जमरूल शरीर की सूजन को दूर कर सकता है। वर्ष 2004 में प्लांटा मेडिका नामक जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार जमरूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है।

जमरूल जैम
 
सामग्री:
जमरूल : 500 ग्राम
पानी : 1 कप
चीनी : 400 ग्राम
इलाइची : 4 नग
नींबू का रस: 4 चम्मच
लौंग : 4 नग


जमरूल को धो-पोंछकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और एक गहरे बर्तन में नरम होने तक उबालें। अब उबले हुए जमरूल को चम्मच से मसल लें और चीनी डालकर ब्लेंड करें। अब इस मिश्रण को तब तक पकाएं, जब तक कि यह जैम की तरह गाढ़ा न हो जाए। अब इसमें लौंग, इलाइची और नींबू का रस मिलाएं। ठंडा होने पर कांच के मर्तबान में संरक्षित करें।

जमरूल का अचार
सामग्री:
जमरूल : 250 ग्राम
मिर्च पाउडर : 3 चम्मच
हींग : 1/4 चम्मच
मेथी और सरसों के दाने : 1/2 चम्मच
हल्दी पाउडर : 1/4 चम्मच
सरसों तेल : 4 चम्मच
नमक : स्वादानुसार

विधि: एक पैन में तेल गरम कर उसमें सरसों और मेथी के दाने डालें। अब दाने उछलने लगे तो कटे हुए जमरूल और नमक उसमें डालें। 7-10 मिनट तक पकाने के बाद उसमें हींग, हल्दी पाउडर और मिर्च पाउडर मिलाएं। 5 मिनट तक पकाएं। जमरूल का अचार तैयार है।

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