Health

बिहार में चमकी बुखार से 11 और बच्चों की मौत, सरकार ने लापरवाही मानी

बिहार में एक्यूट इन्सेफलायटिस सिंड्रोम बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 62 पहुंची, केंद्र ने टीम भेजी 

 
Last Updated: Wednesday 12 June 2019
मुजफ्फरपुर के अस्पताल में भर्ती एक बच्चा। फोटो: पुष्यमित्र
मुजफ्फरपुर के अस्पताल में भर्ती एक बच्चा। फोटो: पुष्यमित्र मुजफ्फरपुर के अस्पताल में भर्ती एक बच्चा। फोटो: पुष्यमित्र

पुष्यमित्र

बिहार के मुजफ्फरपुर औऱ आसपास के जिलों में फैले एक्यूट इन्सेफलायटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटों के दरम्यान 11 बच्चों की मौत हो चुकी है. 9 बच्चों की मंगलवार को और दो की बुधवार की सुबह को मृत्यु हुई। इनमें से सात मुजफ्फरपुर के दो समस्तीपुर और दो वैशाली जिले के बच्चे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वीकार किया है कि इस साल अधिक संख्या में बच्चों की मौत के पीछे कहीं न कहीं जागरुकता की कमी रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी कहा है कि चुनावी व्यस्तताओं की वजह से जागरूकता के काम में कमी रह गयी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इन मौतों पर चिंता व्यक्त की है और बुधवार को एक केंद्रीय टीम इस बीमारी की जांच और स्थितियों का जायजा लेने के लिए मुजफ्फरपुर पहुंची है, जबकि स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे भी बृहस्पतिवार को मुजफ्फरपुर पहुंच रहे हैं। 

पिछले चौबीस घंटे में इस बीमारी से हुए 11 बच्चों की मौत के बाद इस रोग से इस साल मरने वाले बच्चों की संख्या 62 हो गयी है। वहीं अब तक 154 पीड़ित बच्चे सामने आ चुके हैं। वैसे तो इस रोग का इलाज मुख्य रूप से मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में हो रहा है। मगर समस्तीपुर, वैशाली और पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी इन रोग से बच्चे भर्ती हैं। पिछले 24 घंटों में नये मरीजों की संख्या में थोड़ी कमी दिख रही है, जानकार बता रहे हैं कि गर्मी में थोड़ी कमी आने की वजह से ऐसा हो रहा है। मगर फिर भी यह अभी नियंत्रित नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बुधवार की सुबह भी दो बच्चों की मृत्यु की सूचना है।

मंगलवार को आइजीआइएमएस में एक समारोह में उपस्थित राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे दोनों ने स्वीकार किया कि जागरूकता के प्रसार में कमी की वजह से इस साल यह स्थिति पैदा हुई है। अश्विनी चौबे ने तो कहा कि अधिकारी चुनाव में व्यस्त हो गये, इसलिए इस साल जागरूकता के काम में कमी रह गयी। हालांकि उन्होंने केंद्र सरकार की तरफ से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। उधर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने भी इस रोग के प्रकोप को लेकर चिंता जाहिर की है और एक सात सदस्यीय केंद्रीय टीम जांच के लिए आज शाम मुजफ्फरपुर पहुंचने वाली है। इस टीम में स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी रहेंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम मामले की जांच कर रही है. अब इसको लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बच्चों को अधिक देर तक भूखे न रहने दें और रात में भूखे सोने नहीं दें। इस बीच मीडिया में लगातार इससे संबंधित खबरें आने से लोग भी सतर्क हो गये हैं और बच्चों को धूप में घूमने नहीं दे रहे हैं। साथ ही, लीची खाने से रोक रहे हैं और भूखे पेट सोने नहीं दे रहे।

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