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कोरोना संक्रमण : एशिया की सबसे बड़ी मंडी में 50 फीसदी गिरावट, 40 हजार मजदूरों पर संकट

सप्लाई चेन टूटने के बाद से किसानों का माल सामान्य दिनों की तरह आजादपुर मंडी नहीं पहुंच रहा है

By Vivek Mishra

On: Saturday 28 March 2020
 
दिल्ली के आजादपुर मंडी में खाली बैठे मजदूर। फोटो: विकास चौधरी
दिल्ली के आजादपुर मंडी में खाली बैठे मजदूर। फोटो: विकास चौधरी दिल्ली के आजादपुर मंडी में खाली बैठे मजदूर। फोटो: विकास चौधरी

“यहां कोरोना संक्रमण से क्या बचाव करें ? हम जांच और पूरी सुरक्षा के साथ किसी तरह भी अपने अपने घर लौटना चाहते हैं। यहां काम कुछ बचा नहीं है। न बाहर से सब्जियों के वाहन आ रहे हैं और न ही खरीदार। पहले व्यस्त दिनों में 700 से 800 रुपये तक कमा लिए करते थे, इन दिनों 100-150 रुपये तक मिलना मुश्किल हो गया है।”  

करीब 20 पल्लेदारों की सघन भीड़ में खड़े इंद्रजीत सिंह ने डाउन टू अर्थ से यह बात कही। इंद्रजीत ने कहा कि वह बिहार के मधेपुरा जिले के रहने वाले हैं, यहां आदर्श नगर में रहते हैं। उनके पास न तो कोई श्रमिक कार्ड है और न ही आजादपुर मंडी में काम करने का कोई पहचान पत्र। अभी सिर्फ दिन काट रहे हैं। यही संकट आजादपुर मंडी से जुड़े करीब 40 हजार अनौपचारिक मजदूरों पर है। 

आजादपुर एपीएमसी कार्यालय के अधिकारियों ने नाम न लिखने की शर्त पर डाउन टू अर्थ को बताया कि लॉकडाउन के बाद से आवक में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है। सप्लाई चेन टूटने के बाद से किसानों का माल सामान्य दिनों की तरह आजादपुर मंडी नहीं पहुंच रहा है।

लॉकडाउन से पहले आजादपुर मंडी में 20 मार्च, 2020 को जहां 1912 वाहन, वहीं 2240 वाहन वितरण के लिए पहुंचे थे। 26 मार्च को सिर्फ 881 वाहन आए और वितरण वाले वाहनों की संख्या 1315 पहुंच गई। 27 मार्च को रात 12 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक 293 वाहन आए और करीब एक हजार वितरण वाले खाली वाहन आए।

लॉकडाउन के बाद आजादपुर मंडी पहुंचने वाले इन ट्रकों में सबसे ज्यादा माल आलू, टमाटर और बैंगन का है। हालांकि, आलू की कीमतों में आवक के बाद भी बढ़ोतरी है। अनिल महलोत्रा ने कहा कि बीते शनिवार को आलू की कीमत 600 से 800 रुपये के बीच बिका था लेकिन 27 मार्च, 2020 को आलू की कीमत 1100-2000 रुपये तक रही। मिर्च की कीमत 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है। 

आलू की उपलब्धता इसलिए भी है क्योंकि कोविड संक्रमण के लॉकडाउन से पहले ही आलू की खुदाई हो गई थी। मंडी में सिर्फ लॉकडाउन के कारण आवक में कमी नहीं आई है बल्कि प्रवेश और निकासी का पास हासिल करने की व्यवस्था ने भी इसमें रोक लगाई है। 

आजादपुर मंडी में दिल्ली के समीप हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश से मौसमी सब्जियों की आवक होती है और दूर-दराज के राज्यों से बेमौसमी सब्जियों और फलों की आवक होती है। मसलन, नागपुर से संतरा तो महाराष्ट्र के नाशिक से अंगूर। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के कोलकाता से केला यहां पहुंचता है। इन दिनों इन दोनों ही सप्लाई पर बाधा है। महाराष्ट्र, यूपी, राजस्थान और पंजाब के किसानों ने डाउन टू अर्थ से कहा है कि उनकी सब्जियां और फल खेतों में ही बर्बाद हो रही हैं।

कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) के सदस्य अनिल महलोत्रा ने कहा कि इस वक्त मंडी को बंद हो जाना चाहिए। करीब 25 फीसदी माल ही यहां तक पहुंच रहा है। खरीदार नहीं हैं। सबसे बड़ी चीज यह है कि व्यापक स्तर पर सेनेटाइजर्स आदि का छिड़काव हो नहीं रहा है। यदि एक भी व्यक्ति को कोविड 19 का संक्रमण हुआ तो बड़ी त्रासदी होगी। 

स्थिति काफी भयावह है, इसके बावजूद आढतियों और मजदूरों को किसी तरह का दिलासा देने अभी तक मंडी में भी कोई नहीं आया है। और न ही समिति ने इस मामले में कोई बैठक अभी तक की है। इन दिनों भी मंडी को 24 घंटे खोला जा रहा है। सफाई हो नहीं रही है। इस गंदगी में महामारी से बचाव एक बड़ा सवालिया निशान है। 

कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी ) के जरिए वाहनों के प्रवेश और निकासी के लिए पास जारी किया जा रहा है। लॉकडाउन के बाद से अभी तक करीब 2000 से 2500 के बीच पास जारी किए गए हैं। पास बांटने की प्रक्रिया मैनुअल ही है। ऐसे में डीसीपी कार्यालय के बाहर पास बांटने वालों की लाइन लगी हुई है।

यह पास आढ़ती, खरीदार, मजदूरों आदि को जारी किया जा रहा है। एपीएमसी के ही एक कर्मचारी ने बताया कि आढ़ती पहले अपना पास बनवा रहे हैं फिर वह संबंधित किसान का पास बनवाते हैं। या तो आढ़ती खुद ही पास लेकर किसान के सब्जी व फल लाने वाले वाहनों तक पहुंचाते हैं या फिर किसी व्यक्ति को भेजकर उन तक पास पहुंचवा रहे हैं। दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर सैकड़ों ट्रक अब भी पास के इंतजार में हैं।

हिमाचल और जम्मू के भंडार वाले सेब आजादपुर मंडी तक पहुंच रहे हैं लेकिन फलमंडी में अनार, अंगूर, संतरा जैसे फलों की आवक रुक गई है। आजादपुर मंडी में गिरधारी लाल एंड सन्स एक कमीशन एजेंट हैं। इनके यहां मौजूद पल्लेदार सच्चिदानंद ने कहा कि सब्जियों की स्थिति बड़ी खराब है। पुराना स्टॉक है जो मुश्किल से दो से चार दिन चलेगा। हापुड़ और मथुरा से चुकंदर, फूलगोभी, बंदगोभी व सूरत और अहमदाबाद से किसान उनके यहां सब्जियां भेजता है। लेकिन इन दिनों माल उन तक नहीं पहुंच रहा। 

24 घंटे व्यस्त रहने वाली यह एशिया की सबसे सब्जी और फल मंडी है। 1977 में बनाई गई इस मंडी से दिल्ली-एनसीआर और समूचे देश में फल और सब्जियों का आवागमन होता है। करीब एक लाख लोग इस मंडी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं।

मंडी के पूर्व प्रेसीडेंट राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सालाना यहां 45 लाख टन फल-सब्जी बिकता है। इनमें करीब 18 से 20 टन फल और करीब 25 टन सब्जी होती है। लेकिन ऐसा कोई रिकॉर्ड आजतक बनाया नहीं गया कि रोजाना कहां से कितनी सब्जी और फल उन तक आती है। करीब 150 तरीके की सब्जियां और फल यहां बिकता है। करीब 40 हजार अनौपचारिक मजदूर यहां काम करते हैं। इसमें अधिकांश उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं।

एपीएमसी के चेयरमैन आदिल अहमद खान ने कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण के बचाव के कदम उठाए जा रहे हैं। सेनिटाइजर्स की व्यवस्था की जी रही है। लोगों को मास्क बांटे जा रहे हैं। मंडी की रफ्तार कुछ थमी थी लेकिन अब सप्लाई पहले जैसी हो रही है। उन्होंने कहा कि पास जारी किए जा रहे हैं।

इसके उलट मंडी के मजदूर कोरोनावायरस के संक्रमण से इसे बंद करने की मांग कर रहे हैं। सी ब्लॉक में फल बेचने वाले प्रेम कुमार का कहना है कि फलों का जो पहले स्टोरेज था वही अब बिक रहा है। जल्द ही यह भंडारण खत्म होगा और वे भी आवक न आने के कारण मंडी आना बंद कर देंगे।

27 मार्च की सुबह कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सुबह के वक्त भीड़ न लगने पाए  इसलिए सीआरपीएफ के जवानों ने लाठी भी बरसाई। हालांकि, आजादपुर मंडी में प्रवेश करते ही कोविड-19 के बचाव से जुड़े सभी नियम लगभग खत्म हो जाते हैं। मास्क बिक रहा है और कुछ पल्लेदारों के पास थोड़े पैसों में मास्क पर खर्च करने की भी हिम्मत नहीं है।