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सरकार और आढ़तियों की लड़ाई में फंसे हरियाणा के किसान

हरियाणा में 23 अप्रैल की शाम तक करीब 20 हजार किसानों ने तीन लाख मीट्रिक टन गेहूं की बिक्री की है

By Shahnawaz Alam

On: Thursday 23 April 2020
 
हरियाणा की पटौदी अनाज मंडी में गेहूं लेकर आने के बाद नमी नापते हैफेड के कर्मचारी। फोटो: शाहनवाज आलम
हरियाणा की पटौदी अनाज मंडी में गेहूं लेकर आने के बाद नमी नापते हैफेड के कर्मचारी। फोटो: शाहनवाज आलम हरियाणा की पटौदी अनाज मंडी में गेहूं लेकर आने के बाद नमी नापते हैफेड के कर्मचारी। फोटो: शाहनवाज आलम

हरियाणा सरकार ने 20 अप्रैल से प्रदेश में गेहूं की खरीददारी शुरू की है। लॉकडाउन के बीच हरियाणा सरकार ने बार-बार कहा, किसानों को फसल बेचने में कोई दिक्‍कत नहीं होगी, लेकिन किसान अब आढ़ती और सरकार की लड़ाई में फंस गए है। नई व्‍यवस्‍था में सरकार ने गेहूं खरीद के पैसे सीधे किसानों के खाते में भेजने का निर्णय लिया था, लेकिन इससे आढ़ती खफा है।

आढ़तियों का कहना है कि सरकार उनके अकाउंट में पैसे भेजे, वह किसानों को देंगे। प्रदेश में तीन दिनों से विरोध के बीच सरकार ने यह मांगे मौखिक तौर पर मान ली है, लेकिन अभी 23 अप्रैल दोपहर तक लिखित आदेश जारी नहीं किए। जिसकी वजह से आठ जिले हिसार, सोनीपत, रोहतक, पानीपत, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र और झज्‍जर में आढ़ती हड़ताल पर है।

23 अप्रैल की शाम तक करीब 20 हजार किसानों ने तीन लाख मीट्रिक टन गेहूं की बिक्री की है। 

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भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्‍यक्ष गुरणाम सिंह चंढूणी का कहते है, सरकार ने लॉकडाउन का हवाला लेकर 20 दिन देरी से खरीददारी शुरू की। गेहूं की खरीद हर साल 30-35 दिनों में पूरी हो जाती है। इस बार सरकार ने जो सिस्टम बनाया है, उससे तो खरीद तीन महीने से पहले पूरी नहीं होगी। उतने दिनों तक किसान खाएगा क्‍या..?

23 अप्रैल की  दोपहर बाद कई जिलों में हुई बारिश ने किसानों की मुसीबत और बढ़ा दी है। फसल भीग गई है। चंढूणी कहते हैं कि अधिक नमी होने की वजह से प्रति कुंतल 150 से 200 रुपये तक नुकसान उठाना होगा। हजारों ट्रॉलियां मंडी और खेतों में पड़ा गेहूं भीग चुका है। दूसरी ओर, छोटे खरीद सेंटर पर किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है। शेड नहीं है। पक्‍के फर्श नहीं है। फिर बरसात आने की स्थिति में वहां रखा गेहूं खराब होना तय है।

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अंबाला के डंगडेहरी गांव के किसान भाग सिंह का कहना है फसल लाने के लिए बुधवार को मैसेज आया, जब वहां पहुंचे तो आढ़तियों की हड़ताल थी। 40 कुंतल गेहूं वापस लेकर आना पड़ा। गांव घसीटपुर के किसान जगबीर सिंह ने बताया, हड़ताल की वजह से कुछ आढ़ती मनमाने दाम दे रहे है। 12 फीसदी से अधिक नमी बताकर एमएसपी भी नहीं दिया जा रहा है। 1850 रुपए प्रति कुंतल की दर से बुधवार को बेच आया। किराये पर गाड़ी लेकर गया था, अगर दोबारा जाता तो 75 रुपए बढ़कर मिलते, लेकिन गाड़ी का किराया दोगुना लग जाता। बेचना मुनासिब समझा।

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हिसार के किसान हरकेश सिंह ने दस एकड़ सरसों मेरी फसल मेरा ब्‍यौरा पर रजिस्‍ट्रेशन कराया था, लेकिन जब अपनी बारी मालूम करने के लिए गुरुवार को पहुंचे तो उनकी जमीन पर सब्‍जी की बुआई अंकित है। हरकेश का दावा है कि इसी तरह सैकड़ों किसानों को यह समस्‍या आ रही है।

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करनाल जिला प्रशासन द्वारा एक किसान को एक ही ट्राली फसल लाने को कहा गया है। अब अधिक पैदावार करने वाले किसानों को कई कई बार मंडी में आना पड़ेगा। हिसार अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान छबील दास केडिया का कहना है, सरकार ने जो जगह जगह छोटे खरीद सेंटर बनाये हैं वो बिल्कुल गलत हैं। आढ़ती दूसरी जगह पर जाकर गेहूं खरीद नहीं कर सकता। किसानों की मैपिंग में कई तरह की परेशानी आ रही है। किसानों के फोन नंबर नहीं मिलते। किसी किसान के पास 2 एकड़ जमीन है और उसने 10 एकड़ ठेके पर लेकर खेती की हुई है तो उसकी 2 एकड़  फसल की ही मैपिंग हो रही है। इन सबसे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।