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लॉकडाउन हरियाणा: 57 फीसदी किसान कैसे बेचेंगे अपनी फसल?

हरियाणा ने ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से ही फसल खरीदने की घोषणा की है

By Shahnawaz Alam

On: Saturday 11 April 2020
 

हर साल एक अप्रैल से हरियाणा की मंडियों में सरसों और गेहूं की खरीद शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार देश में लॉक डाउन घोषित होने की वजह से ऐसा नहीं हो पाया। प्रदेश सरकार ने गेहूं की खरीद 20 अप्रैल और सरसों व चना को 15 अप्रैल से खरीदने का ऐलान किया है। लॉक डाउन के बीच बार-बार मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये किसानों को भरोसा दिला रहे है कि उनका एक-एक दाना सरकार खरीदेगी, लेकिन मुख्‍यमंत्री और कृषि मंत्री जेपी दलाल की बातों पर किसान भरोसा नहीं कर पा रहे है। हरियाणा सरकार द्वारा रबी की फसल खरीदने के लिए लगाई गई कुछ शर्तों ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।

हरियाणा में अबकी बार करीब 25 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल है और इससे करीब 125 से 130 लाख टन गेहूं उत्पादन होने की उम्मीद है। कुल गेहूं उत्पादन में से करीब 80 फीसदी गेहूं की खरीद की जाती है। पिछले साल चार खरीद एजेंसियों (हैफेड, डीएचएफसी, हैफेड और हरियाणा वेयर कॉरपोरेशन) के जरिये 93,20,866 मिट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस बार पांच लाख 62 हजार 440 हेक्‍टेयर रकबे पर सरसों और 45 हजार 500 हेक्‍टेयर पर चने की फसल है। सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि केवल उन किसानों की गेहूं, सरसों और चना खरीदी जाएगी, जिन्‍होंने मेरी फसल-मेरा ब्‍योरा पोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन कराया हो। इसके बाद दूसरे स्‍थानीय किसानों के बारे में सोचा जाएगा। दूसरे राज्‍यों से आने वाले किसानों की रबी फसल यानी सरसों, गेहूं या चना नहीं खरीदेगी। फसलों में नमी आठ फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सीएम ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी गेहूं व सरसो की खरीद के लिए रजिस्‍ट्रेशन को अनिवार्य बताया। उन्‍होंने कहा कि 5 दिनों में ही पूरी सरसों खरीदी जाएगी। सरसों का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में मिलेगा। गेहूं की अदायगी आढ़तियों के जरिए की जाएगी। गोदाम में फसल पहुंचते ही किसानों का पैसा रिलीज हो जाएगा।

सरकार का तर्क है कि रजिस्‍ट्रेशन प्रक्रिया की अनिवार्यता से स्‍थानीय किसानों को अधिक मुनाफा होगा। दलालों के चुंगल से किसान बचेंगे, लेकिन किसानों का कहना है कि जब फसल ही नहीं बिकेगी तो फायदा किस बात का। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्‍यक्ष फूल सिंह श्‍योकंद कहते है, पोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन प्रक्रिया जटिल है। इसलिए किसानों ने दूरी बना रखी है। कभी सर्वर डाउन रहता है तो कभी जानकारी अपडेट नहीं होती है।

खुद हरियाणा सरकार के आंकड़े कहते है कि प्रदेश में महज 43.63 फीसदी किसानों ने ही पोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन कराया है। ऐसे में प्रदेश के आधे से अधि‍क किसान न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर गेहूं बेचने से महरूम रह सकते है और औने-पौने दाम पर आढ़तियों को बेचना पड़ेगा। इस बार सरकार ने गेहूं के लिए तीन तरह के न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया है। 30 अप्रैल तक गेहूं बेचने वाले किसानों को 1925, 31 मई तक बेचने वाले 1975 रुपये व 30 जून तक बेचने वाले को 2050 रुपये दाम मिलेंगे। सरसों का समर्थन मूल्‍य 4425 रुपये कर दिया गया है।

हरियाणा स्‍टेट एग्रीकल्‍चर मार्केटिंग बोर्ड के मुताबिक, प्रदेश में 86,38,031 एकड़ भूमि पर रबी की फसल लगी हुई है। केवल 6,94,475 किसानों ने 37,69,087 एकड़ बिजाई को रजिस्‍टर्ड कराया है। सबसे कम मेवात (नूंह) में केवल 17 फीसदी बिजाई रजिस्‍टर्ड है। जबकि सोनीपत में 27 प्रतिशत, पलवल में 29 प्रतिशत, जींद में 32 प्रतिशत, हिसार में 35 प्रतिशत रजिस्‍ट्रेशन हुआ है। महेंद्रगढ़ को छोड़कर (75.54 फीसदी) अन्‍य जिलों का यही हाल है। आंकड़ों में बात करें तो फतेहाबाद जिले के 87 हजार किसान परिवारों में से अब तक मात्र 41,330 किसानों ने ही अपना पंजीकरण करवाया है। कम रजिस्‍ट्रेशन को देखते हुए सरकार ने दोबारा 19 अप्रैल तक पोर्टल खोल दिया है।

कृषि उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग कहते है, लगातार किसानों को पोर्टल पर फसल का ब्यौरा दर्ज करवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। रजिस्‍टर्ड किसानों को दो शिफ्टों में मैसेज कर बुलाया जाएगा। हर शिफ्ट में केवल 50 किसान मंडी में आएंगे। किसानों की सुविधा के लिए मंडिया और खरीद सेंटर बढ़ाई गई है। पिछले वर्ष प्रदेश में सरसों खरीद के लिए 67 मंडियां थीं, इस बार 248 मंडियां बनाई गई है। गेहूं खरीद के लिए 477 मंडियां और सब-सेंटर थे। इस बार इनकी संख्या 2000 से अधिक होगी।

वहीं, हरियाणा अनाजमंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्‍यक्ष धर्मबीर मलिक ने कहा कि सरकार के ई-खरीद के फैसले का एसोसिएशन विरोध करता है। किसान यूनियन का मानना है कि इस बार सरकार के नियम और आढ़तियों के विरोध के बीच किसानों को पीसना तय है।