Sign up for our weekly newsletter

देश में 34 हजार मंडियों की कमी, किसान कहां बेचें अपने उत्पाद?

राजनीतिक दलों को किसान की चिंता तो है, लेकिन उनके पास मंडी व्यवस्था को लेकर ठोस योजना नहीं है

By DTE Staff

On: Thursday 11 April 2019
 
Credit : Wikimedia commons
Credit : Wikimedia commons Credit : Wikimedia commons

महेंद्र सिंह 

पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के एक जिले बहराइच में सात आठ साल पहले केले की खेती बड़े  पैमाने पर शुरू हई। जिले की आबोहवा भी केले की खेती के अनुकूल थी। ऐसे में केले की उपज भी अच्‍छी रही। केले की बेहतर गुणवत्‍ता की वजह से किसानों को 14 से 15 रुपए प्रति किलो का दाम थोक में मिला। उस समय के लिहाज से यह बेहतर दाम था। इससे उत्‍साहित किसानों ने खेती का रकबा और बढ़ाया। फिर बहराइच के केला किसानों पर दिल्‍ली स्थिति आजादपुर मंडी के केला व्‍यापारियों की नजर पड़ी। यहीं से केला किसानों के बुरे दिन शुरू हो गए।

दिल्‍ली के केला व्‍यापारियों ने आपस में तय कर लिया कि कोई व्‍यापारी केला 7- 8 रुपए से अधिक प्रति किलो के दाम पर केला नहीं खरीदेगा। बहराइच में केले की खेती करने वाले किसान कीर्ति सिंह बताते हैं कि केले की खेती बहराइच में अब भी हो रही है लेकिन अब किसानों को सही कीमत नहीं मिल रही है। देश की सबसे बडी आजादपुर मंडी के एक व्‍यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केले के अलावा पपीते जैसे दूसरे फलों में भी कार्टेलाइजेशन का खेल चलता है और कुछ व्‍यापारी हैं जो पूरे कारोबार को नियंत्रित करते हैं। इस मामले में साफ है कि जो मंडी किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई थी, वहीं मंडी अब किसानों की मुसीबत बन रही है।

दरअसल, बहराइच के केला उत्पादक किसान तो एक बानगी भर है। देश के ज्यादातर किसानों की दशा यही है। देश में मंडी व्यवस्था सही न होने के कारण किसानों को अपने उत्पादों का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर सरकार बहुत कुछ करने का दावा करती हैं, लेकिन इसका फायदा किसानों को नहीं मिल पाता।

कृषि मामलों के जानकार देवेंद्र शर्मा बताते हैं कि देश में किसानों के उत्पादों की खरीद के लिए एग्रीकल्‍चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी यानी एपीएमसी की व्यवस्था है। मौजूदा समय में देश भर में 7,600 एपीएमसी मंडियां हैं। यह काफी कम हैं। देश में एपीएमसी मंडियों की संख्‍या बढ़ा कर 42,000 करने की जरूरत है। इससे देश में हर 5 किलोमीटर पर एपीएमसी मंडियों का नेटवर्क होगा। इससे किसान को अपने उत्‍पाद बेचने के लिए दूर नहीं जाना होगा। इसके अलावा सरकार को एपीएमसी मंडियों में सुधार करना होगा।

शर्मा के मुताबिक, दिक्‍कत यह है कि सभी एपीएमसी मंडियों के चेयरमैन सत्‍तारूढ़ राजनीतिक दलों के होते हैं। ऐसे में, सरकार इन मंडियों में सुधार नहीं करना चाहती है। उनका कहना है कि देश में सिर्फ 6 फीसदी किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य यानी एमएसपी का लाभ मिलता है और बाकी 96 फीसदी किसानों कम कीमत में अपनी उपज बेचनी पडती है। पंजाब और हरियाणा में एपीएमसी मंडियों का नेटवर्क मजबूत है इसलिए यहां किसानों को एमएसपी का फायदा मिलता है लेकिन देश के दूसरे हिस्‍सों में ऐसा नहीं है।

वहीं, एग्री एक्‍सपर्ट विजय सरदाना एपीएमसी सिस्टम पर ही सवाल उठाते हुए कहते हैं कि किसानों के पास अपने उत्‍पाद को एपीएमसी की मंडियों में लाने के अलावा कोई विकल्‍प नहीं है। इसके अलावा मंडियों में बिचौलियों का कब्‍जा है। अगर सरकार किसानों की इनकम दोगुनी करने की बात करती है तो उसे बिचौलियों को खत्‍म करना होगा। इसके लिए मंडियो में आधी दुकाने किसान संगठनों को आवंटित होनी चाहिए। ऐसे किसान संगठन जो रजिस्‍टर्ड हैं। इससे वे मंडी में अपने उत्‍पाद आसानी से बेच पाएंगे।

सरदाना कहते हैं कि सरकार को तमाम सार्वजनिक स्‍थल जैसे बगीचे और दूसरे स्‍थान किसानों को आवंटित करना चाहिए जहां किसान सब्‍जी, फल या दूसरी चीजें बेच सकें। दूसरे कदम के तौर पर किसी भी खरीदार को यह छूट होनी चाहिए कि वह लाइसेंस के बिना किसान से सीधे खरीद कर सके। इससे मंडियों का एकाधिकार खत्‍म होगा। विजय सरदाना का कहना है कि अब बात करते हैं पशुओं की किसान मछली पालन के अलावा पशु पालन भी करता है। सरकार जब अनाज का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य बढ़ाती है तो मछली, मुर्गा और दूसरे पशुओं की कीमतें भी बढ़ती हैं। ऐसे में सरकार को इनकी कीमतें तय करने का मकैनिज्‍म भी बनाना चाहिए।

मोदी सरकार ने सत्‍ता में आने के बाद किसानों के लिए ऑनलाइन बाजार नेशनल एग्रीकल्‍चर मार्केट यानी ईनैम शुरू किया लेकिन यहां भी किसानों को सही कीमत नहीं मिल रही है। ईनैम में उपज की मॉडल कीमत यानी जिस कीमत पर किसान की उपज खरीदी जाती है एमएसपी से कम होती है। वहीं सरकार का दावा है कि ईनैम के जरिए किसान मोबाइल पर कीमतें चेक कर सकता है और जहां कीमतें अधिक हों वहां अपनी उपज बेच सकता है। देवेंद्र शर्मा का कहना है कि ईनैम से किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक अब तक देश की 585 मंडियों को ईनैम प्‍लेटफॉर्म से जोड़ा गया है और मार्च 2020 तक 415 और मंडियों को ईनैम प्‍लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

मोदी सरकार ने 2014 आम चुनाव के घोषणापत्र के बाद एक बार 2019 आम चुनाव के घोषणापत्र में भी किसानों की इनकम दोगुनी करने का वादा दोहराया है। हालांकि सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि उसके पास ऐसा कौन सा फार्मूला है, जिससे किसानों की आय 2022 तक दोगुनी हो जाएगी। वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने घोषणात्र में किसानों के लिए अगल से बजट लाने का वादा किया है। हालांकि कांग्रेस ने भी साफ नहीं किया है कि कृषि क्षेत्र में आवंटन में कितना इजाफा किया जाएगा और अलग से किसानों के लिए बजट लाने से किसानों को क्‍या फायदा होगा।