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मध्यप्रदेश सरकार की एक घोषणा से गिर गई मूंग की कीमत, लागत निकालना मुश्किल

रजिस्ट्रेशन न होने से अब किसानों को व्यापारियों के हाथों समर्थन मूल्य से लगभग आधी कीमत पर मूंग बेचना पड़ रहा है

By Manish Chandra Mishra

On: Tuesday 30 June 2020
 
पिछल कई वर्षों से मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी समर्थन मूल्य पर होती रही है। फाइल फोटो: मनीष चंद्र मिश्र
पिछल कई वर्षों से मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी समर्थन मूल्य पर होती रही है। फाइल फोटो: मनीष चंद्र मिश्र पिछल कई वर्षों से मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी समर्थन मूल्य पर होती रही है। फाइल फोटो: मनीष चंद्र मिश्र

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के नसरुल्लागंज के किसान गजू ने अपना 12 क्विंटल मूंग कृषि ऊपज मंडी पर बेचा। कीमत मिली 3500 रुपए प्रति क्विंटल, यानि न्यूनतम समर्थन मूल्य से 3550 रुपए कम। मूंग का समर्थन मूल्य 7050 रुपए क्विंटल निर्धारित किया गया है और गजू को इस बार फसल की आधी कीमत भी नहीं मिल पाई। मध्यप्रदेश सरकार के कृषि मंत्री कमल पटेल ने दो जून को घोषणा की थी कि चार जून से 15 जून तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाना है, लेकिन 15 जून तक इंतजार करने के बाद जब रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हुआ तो गजू ने 17 जून को काफी कम कीमत पर ही मूंग बेचना पड़ा।

होशंगाबाद के प्रकाश मालवीय ने इस वर्ष पानी की उपलब्धता होने की वजह से 8 एकड़ में मूंग की खेती की थी। वह कहते हैं कि सरकार की घोषणा से पहले व्यापारियों को खरीदी होने की उम्मीद थी, इसलिए किसानों की समर्थन मूल्य के आसपास की कीमत मिल रही थी। सरकार की घोषणा का अमल जब होता हुआ नहीं दिखा तो व्यापारियों ने लागत लायक कीमत भी देना बंद कर दिया। अब व्यापारियों की किसान की मजबूरी का अंदाजा है। मालवीय ने आठ एकड़ में प्रति एकड़ लगभग 4 क्विंटल मूंग उपजाया था और उन्हें 5,550 रुपए क्विंटल की कीमत मिली। यह कीमत खरीदी की घोषणा से पहले इतनी कम नहीं थी। किसान सरकारी खरीदी का इंतजार करने लगे। मालवीय बताते हैं कि अच्छे से अच्छे क्वालिटी के मूंग को कीमत नहीं मिल रही है। 

मध्यप्रदेश के होशंगाबाद और हरदा में सिंचाई के लिए नहर बने हैं और पिछले मॉनसून की अच्छी बारिश ने यहां के किसानों को मूंग की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। हरदा और होशंगाबाद जिले में प्रदेश का 55 फीसदी मूंग उत्पादित होता है। कृषि विभाग के मुताबिक होशंगाबाद में 1,82,000 हेक्टेयर और हरदा में 82,500 हेक्टेयर के रकबे में मूंग लगाई गई है। अगर किसानों को सही कीमत मिलती तो मूंग से किसानों की आय 2,700 करोड़ रुपए होती। पूरे प्रदेश में तकरीबन 5 लाख हेक्टेयर में ग्रीष्म मूंग की फसल लगाई गई थी। विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रदेश में इस वर्ष ग्रीष्म मूंग का उत्पादन 5.76 मीट्रिक टन हुआ है। इसके अलावा, उड़द का उत्पादन भी 40 हजार मीट्रिक टन अनुमानित है। कृषि मंत्री कमल पटेल ने घोषणा करते हुए कहा था कि कुल उत्पादन के 25 प्रतिशत मात्रा मूंग में 1.44 लाख मीट्रिक टन और उड़द में 10 हजार मीट्रिक टन की खरीदी का लक्ष्य है।

हरदा के किसान अनिल झबर ने 6 एकड़ में मूंग की खेती की थी और 40 क्विंटल मूंग उन्होंने 5200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा है। झबर बताते हैं कि कीटनाशक की बढ़ी कीमत से लागत में बढ़ोतरी हुई है और 15 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक सिर्फ खर्च आ रहा है।

मंत्री कमल पटेल सरकारी खरीदी न होने को लेकर डाउन टू अर्थ के सवालों के जवाब देने के लिए लिए उपलब्ध नहीं थे। कृषि विभाग से सूत्रों से पता चला है कि केंद्र ने मूंग की खरीदी की अनुमति नहीं दी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हो सका।

किसानों की संस्था राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 6 जून को 30 जून को एक बैठक में इस नतीजे पर पहुंचे कि मक्का और मूंग को न्यूनतम समर्थन मूल्य ने मिलना सरकार के उस योजना का हिस्सा है, जिसमें वह अध्यादेश लाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने वाली है। बैठक में मध्यप्रदेश से किसान नेता शिव कुमार कक्काजी ने कहा कि 6 जुलाई से डीजल की कीमत बढ़ोतरी, समर्थन मूल्य और किसानों की अन्य समस्याओं को लेकर आंदोलन किया जाएगा।