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किसानों को मिलेगा मुआवजा, उपभोक्ता अदालत ने कीटनाशक कंपनी को दिए आदेश

मध्य प्रदेश में एक उपभोक्ता फोरम ने एक एग्रो केमिकल को आदेश दिए हैं कि वह उन किसानों के नुकसान की भरपाई करे, जिन्हें उस कंपनी की नकली दवा का इस्तेमाल करने के कारण फसल का नुकसान हुआ

By Jitendra

On: Sunday 05 May 2019
 

मध्य प्रदेश में एक उपभोक्ता फोरम ने एक एग्रो केमिकल को आदेश दिए हैं कि वह उन किसानों के नुकसान की भरपाई करे, जिन्हें उस कंपनी की नकली दवा का इस्तेमाल करने के कारण फसल का नुकसान हुआ। आरोप है कि इस कंपनी ने 2018 में सोयाबीन के बीज का इलाज करने के नाम पर नकली फंफूद नाशक दवा की सप्लाई की, जिससे क्षेत्र के लगभग 200 किसानों की 5000 एकड़ से अधिक भूमि पर लगी सोयाबीन की फसल उग नहीं पाई।

अपने फैसले में, हरदा जिले के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने एग्रोकेमिकल कंपनी विजन ऑर्गेनिक्स को 30 दिनों के भीतर 13 किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया। जो नुकसान के हिसाब से 80,000 रुपये से लेकर 1,65,000 रुपये तक है। लगभग 30 किसानों ने क्षतिपूर्ति के लिए स्थानीय खुदरा विक्रेता हर्ष एग्रो एजेंसियों और निर्माता विजन ऑर्गेनिक्स के खिलाफ उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया था। किसानों की लड़ रहे वकील अनिल जाट ने बताया कि इनमें से 13 किसानों को मुआवजा देने के आदेश हो चुके हैं। शेष किसानों के फैसले आने वाले दिनों में होंगे।

हरदा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम के अध्यक्ष बिपिन बिहारी शुक्ला ने निर्देश दिया कि विजन ऑर्गेनिक्स के ब्रांड 'सवेरा फंगिसाइड्स पाउडर' - बैच नंबर वीओएस-114 (निर्मित तिथि 25-05-2018 है और समाप्ति तिथि 23-05-2020) को तुरंत हटा दिया जाए।

फोरम ने विजन ऑर्गेनिक्स को दंड के रूप में उपभोक्ता कल्याण निधि में 50,000 रुपए जमा कराने के निर्देश भी दिए। जाट ने कहा, 'अगर कंपनी स्टेट फोरम में अपील करने जा रही है, तो उन्हें किसानों को कम से कम 50 फीसदी मुआवजा राशि पहले देनी होगी।'

मध्य प्रदेश में यह पहला मामला है जहां किसानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और जीत हासिल की। हरदा के किसान यूनियन नेता केदार सिरोही ने कहा, "किसान कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को चुनौती देने के बारे में कभी नहीं सोचते हैं क्योंकि वे उत्पाद के बजाय अपनी गलती मानते हैं।" उन्होंने कहा, "इस फैसले से ऐसे किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा जो ऐसी स्थिति का सामना करते हैं, लेकिन अधिकारियों से संपर्क नहीं करते हैं,"।

ऐसे कई अध्ययन हैं जो बताते हैं कि किसान किस तरह से कीटनाशकों के शिकार हो रहे हैं। दिसंबर 2018 में, भारतीय किसान कृषक समाज ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें पाया गया कि खुले बाजार में बिकने वाले सभी कीटनाशकों का 25 प्रतिशत घटिया है। एनएबीएल मान्यता प्राप्त सरकारी प्रयोगशाला में नमूनों का परीक्षण करने वाली रिपोर्ट में पाया गया कि कीटनाशकों के 50 नमूनों में से 13 नमूने घटिया हैं। औद्योगिक संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने भी 2015 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें दावा किया गया था कि बाजार में बिकने वाले 30 फीसदी कीटनाशक नकली थे।