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किसान आंदोलन: संगठनों ने ठुकराया केंद्र सरकार का प्रस्ताव

गृहमंत्री अमित शाह से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव किसानों को भेजा था

By Raju Sajwan

On: Wednesday 09 December 2020
 
किसानों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकराया।
किसानों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकराया। किसानों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकराया।

तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली में जमे बैठे किसानों को मनाने के लिए केंद्र सरकार ने सुबह एक प्रस्ताव भेजा, जिसे किसान संगठनों ने मानने से इंकार कर दिया है। किसान संगठनों ने कहा है कि सरकार जब तक कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी, तब तक वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

8 दिसंबर को किसान संगठन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। उसके बाद 9 दिसंबर (आज) होने वाली बैठक को सरकार की ओर से रद्द कर दिया गया। दोपहर को किसान संगठनों के बीच केंद्र की ओर से एक प्रस्ताव पहुंचा।

इस प्रस्ताव में किसान संगठनों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर सरकार की ओर से क्रमवार प्रस्ताव रखा गया था। इस प्रस्ताव में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि तीन कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जा सकता, लेकिन उनमें कुछ संशोधन किए जा सकते हैं।

सरकार की ओर से भेजे प्रस्ताव में कहा गया कि किसानों को आशंका है कि मंडी समितियों (एपीएमसी) द्वारा स्थापित मंडियां कमजोर होंगी और किसान निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएंगे। सरकार ने कहा कि अधिनियम में संशोधन कर प्रावधान किया जाएगा कि राज्य सरकार निजी मंडियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू कर सकेगी। साथ ही ऐसी मंडियों से राज्य सरकार एपीएमसी मंडियों में लागू सेस या शुल्क की दर तक सेस या शुल्क निर्धारित कर सकेगी।

किसान संगठन कह रहे हैं कि नए कानून के लागू होने के बाद व्यापारी के पंजीकरण की व्यवस्था न करके मात्र पैन कार्ड के आधार पर किसान से फसल खरीद की व्यवस्था के चलते उनके साथ धोखा हो सकता है। सरकार ने किसानों के समक्ष प्रस्ताव रखा कि इस शंका के समाधान के लिए राज्य सरकारों को इस पंजीकरण के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान की जा सकती है, जिससे स्थानीय परिस्थितयों के अनुसार राज्य सरकारें किसानों के हित में नियम बना सकें।

किसान संगठनों ने चिंता जताई थी कि आने वाले दिनों में एपीएमसी मंडी खत्म कर दी जाएंगी। साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी।

सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि केंद्र सरकार एमएसपी की वर्तमान खरीद व्यवस्था के संबंध में लिखित आश्वासन देगी।

किसानों का आरोप है कि विवाद समाधान के लिए सिविल न्यायालय में जाने का विकल्प नहीं है। अब सरकार ने भरोसा दिलाया है कि विवाद होने पर किसानों को एसडीएम-डीएम के अलावा सिविल न्यायालय में भी जाने का विकल्प दिया जा सकता है।

किसानों का कहना है कि नए कानून लागू होने के बाद उनकी जमीन पर बड़े उद्योगपति कब्जा कर लेंगे और किसान भूमि से वंचित हो जाएंगे।

सरकार ने कहा है कि नए कानूनों के प्रावधान पहले से ही स्पष्ट हैं, लेकिन फिर भी स्पष्ट कर दिया जाएगा कि किसान की भूमि पर बनाई जाने वाली संरचना पर खरीददार (स्पांसर) द्वारा किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया जा सकेगा और ना ही ऐसी संरचना उसके द्वारा बंधक रखी जा सकेगी। 

किसानों ने बिजली संशोधन विधेयक 2020 को खत्म करने की भी  मांग की है। दरअसल, इस विधेयक में कहा गया है कि किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी का भुगतान उनके खाते में किया जाएगा। जिसका मतलब है कि किसानों को पहले पूरा बिजली बिल देना होगा, इसके बाद उनके खाते में सरकार की ओर से सब्सिडी का भुगतान किया जाएगा।

सरकार का प्रस्ताव है कि किसानों के बिजली बिल भुगतान की वर्तमान व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

किसान संगठन पराली जलाने पर जुर्माना और आपराधिक कार्रवाई की इजाजत देने वाला एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आफ एनसीआर ऑर्डिनेंस 2020 को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। इस पर सरकार ने उनके समक्ष प्रस्ताव रखा था कि इस ऑर्डिनेंस के अंतर्गत किसानों की आपत्तियों का समुचित समाधान किया जाएगा।