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लॉकडाउन ग्रामीण अर्थव्यवस्था: कटाई में कुछ दिनों की देरी बर्बाद कर सकती है फसल

खेतों में रबी की फसल तैयार है जिसे समय रहते नहीं काटा गया तो किसानों का लागत तक डूबने की आशंका है। लॉकडाउन में नहीं मिल रहे हैं मजदूर 

By Manish Chandra Mishra

On: Wednesday 01 April 2020
 

मध्यप्रदेश के रीवा जिले के हटवा गांव में अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है। गांव के इक्के दुक्के लोग घर के सामने आकर बैठे हैं, लेकिन चौक और चौराहे सूने है। गांव ने अपने इतिहास में मार्च महीने में ऐसा सन्नाटा कभी नहीं देखा। यह वक्त फसलों की कटाई का है। इस समय हर साल झुंड के झुंड महिलाएं-पुरुष हाथों में गेहूं और चना काटने के औजार लिए दिखते थे। थ्रेसरिंग मशीन और हार्वेस्टर का गांव में रेला लगा होता था। नोवेल कोरोना वायरस से निपटने के लिए सरकार के द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

गांव के बड़े किसान प्रेम शंकर बताते हैं कि लॉकडाउन की शुरुआत में कुछ किसानों ने खेतों में कटाई की कोशिश की थी लेकिन पुलिस ने उन्हें डंडे मारकर भगा दिया। इसके बाद से यहां मजदूरों का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन की तरफ से कई बार बयान आया कि वे कृषि कार्य को नहीं रोकेंगे, लेकिन अब मजदूरों में इतना डर बैठ गया है कि वे खेतों में नहीं जाना चाहते।

प्रेम शंकर की तरह हटवा गांव के सभी किसान इस मजदूर न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। गांव में कई तरह की अफवाह फैली है जिससे लोग अपने घरों में दुबके हैं। हार्वेस्टर से कटाई का विकल्प है लेकिन अनाज को मंडी तक पहुंचाने या उसे सुरक्षित रखना लॉकडाउन के समय एक बड़ी चुनौती है। गांव की आबाजी दो हजार के करीब है जिसमें 150 परिवार रहते हैं। गांव में खेती चार भागों में बंटी है जो कि लगभग 1,200 एकड़ में फैली है।

प्रेम शंकर बताते हैं कि डीजल, जुताई का खर्च, खाद-पानी सब मिलाकर एक एकड़ में लागत चार हजार के करीब आती है। इस तरह पूरे गांव भर का 50 लाख रुपया लॉकडाउन की वजह से दाव पर है। अगर इस बीच बारिश हुई तो गेहूं और दलहन की फसलों का रंग बदल जाएगा, जिसे बाजार में इसे बेचना नामुमकिन हो जाएगा। सरसों और चने की फसल सूख गई तो खेत में ही छिटककर बर्बाद होने की आशंका है।

इसी गांव के सुरसरि प्रसाद मिश्र बताते हैं कि उनकी सात एकड़ की गेहूं की फसल मजदूर न मिलने की वजह से खेत में खड़ी है। अगर 5-7 दिन और देरी हुई या बीच में बारिश हो गई तो फसल को नुकसान पहुंचेगा। 

इस साल गेहूं की अच्छी फसल देखकर एक एकड़ में 1,500 किलो तक पैदावार होने की उम्मीद थी। गांव के तकरीबन 70 फीसदी जमीन पर गेहूं लगाया गया है। इस हिसाब से पूरे गांव में लॉकडाउन की वजह से 3 करोड़ से अधिक रुपए की आमदनी दाव पर लगी हुई है। हटवा के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार पानी की उपलब्धता की वजह से कुछ खेतो में उत्पादन 2,500 किलो तक भी जा सकता था।

हटवा गांव में स्थानीय स्तर पर करीब 500 लोग मजदूरी का काम करते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से उनका रोजगार भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।