बारिश और ओलों से उत्तर प्रदेश में फसल बर्बाद, अब मुआवजे का इंतजार

किसानों का कहना है कि बीमा कंपनियों ने 2019 में हुए नुकसान का मुआवजा ही अब तक नहीं दिया है

By Gaurav Gulmohar, Aman Gupta

On: Tuesday 11 January 2022
 
उत्तर प्रदेश के जहांगीराबाद निवासी किसान देवी प्रसाद प्रजापति बारिश में गिरे आलू के पौधों को दिखाते हुए (फाइल फ़ोटो- गौरव गुलमोहर)
उत्तर प्रदेश के जहांगीराबाद निवासी किसान देवी प्रसाद प्रजापति बारिश में गिरे आलू के पौधों को दिखाते हुए (फाइल फ़ोटो- गौरव गुलमोहर) उत्तर प्रदेश के जहांगीराबाद निवासी किसान देवी प्रसाद प्रजापति बारिश में गिरे आलू के पौधों को दिखाते हुए (फाइल फ़ोटो- गौरव गुलमोहर)

बारिश और ओलावृष्टि उत्तर प्रदेश के किसानों पर एक बार फिर से कहर बन कर बरसी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 9 जनवरी 2022 के दौरान राज्य में सामान्य से 701 प्रतिशत बारिश अधिक हुई है। किसानों का कहना है कि इस सीजन में अमूमन न तो इतनी बारिश होती है और ना ही ओले गिरते हैं, लेकिन इस बार हुई भारी बारिश और ओलों ने उन्हें बर्बाद कर दिया। 

बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, महोबा और बांदा में लाही, चना, मटर, और मसूर की सैकड़ों बीघा फसल तेज बारिश और ओला पड़ने से बर्बाद हो गई। जिला झांसी के मऊरानीपुर निवासी रणजीत सिंह ने डाउन टू अर्थ को बताया कि उनके खेतों में दो-दो फुट पानी भरा है सारी फसल खेत में टूटकर गिर गई है। वे लगातार खेत से पानी निकाल रहे हैं लेकिन उम्मीद नहीं है कि दोबारा फसल खेतों में लहला पाएगी।

वह बताते हैं कि, "2019 का फसल बीमा का प्रीमियम कटा था, उस समय भी बारिश की वजह से फसल का नुकसान हुआ, लेकिन आज तक पैसा नहीं मिला। पिछले साल दिसंबर में बैंक ने खाते से प्रीमियम का पैसा फिर काटा, लेकिन जून-जुलाई में उड़द, तिल्ली की जो फसल बारिश से बर्बाद हुई उसका एक पैसा नहीं मिला। कुछ किसानों का आया लेकिन सबका पैसा नहीं आया। हम बैंक जाते हैं तो बैंक वाले बीमा कम्पनी के पास जाने के लिए बोलते हैं, बीमा कम्पनी के पास जाते हैं तो वो बैंक के पास जाने के लिए बोलते हैं, हम इसी तरह बैंक और बीमा कम्पनी का चक्कर वर्षों से लगा रहे हैं।"

हमीरपुर जिले के गल्हिया गांव किसान ब्रह्मकिशोर 65 बीघे में खेती करते हैं, जिसमें से उन्होंने करीब 35 बीघे में मटर और 25 बीघे में गेंहू बोया था। बारिश और ओले गिरने के कारण उनकी मटर की पूरी फसल खराब हो गई, जबकि गेंहू की फसल में पचास प्रतिशत तक नुकसान है। वह कहते हैं कि पिछली बार मटर का भाव अच्छा था, इस कारण बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों ने मटर की खेती को प्राथमिकता दी, लेकिन अब यही मटर नुकसानदायक हो गई। 

हमीरपुर जिले के धमना गांव के किसान संदीप 30 बीघा की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि ये फसलों की सिंचाई का समय होता है, यही समय पौधों मे फूल आने का समय होता है इस लिए हल्की बारिश तो फसलों के लिए ठीक होती है। ऐसे में थोड़ी सी बारिश होना बहुत लाभदायक होती है और किसानों को सिंचाई के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता जिससे उनकी थोड़ी सी बचत भी हो जाती है। लेकिन इस बार बारिश की मात्रा ज्यादा है और लगातार कई दिनों तक होती रही जिससे खेतों में पानी भर गया है, साथ ही ओले गिरने के कारण मटर और मसूर के पौधे के फूल गिर गए जिसके कारण अब फसल का होना और न होना बराबर है।

जिला कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर द्वारा दिये गये आंकड़ों के अनुसार साल जिले में सबसे ज्यादा चने की खेती (93974 हेक्टेयर) उसके बाद गेहूं (83658 हेक्टेयर), तीसरे नंबर पर मसूर (58208 हेक्टेयर), तथा मटर का रकबा मटर (19558 हेक्टेयर) जो कुल फसल उत्पादन का 72 प्रतिशत है। असमय हुई बारिश के कारण सबसे ज्यादा नुकसान भी इन फसलों को ही हुआ है, जोकि कुल 70 प्रतिशत तक हो सकता है।

बुंदेलखंड में खेतों में ओलों की परत सी जमा हो गई। फोटो: अमन गुप्ता 

महोबा जिले के भटेवरा गांव के मनोज श्रीवास बताते हैं कि इस समय मटर, मसूर में फूल आने लगते हैं, जिससे पौधों का वजन बढ़ने लगता है। जिसके लिए हल्की बारिश तो ठीक होती है, खेतों की सिंचाई के साथ फसलों में लगने वाले कीड़े भी मर जाते हैं। लेकिन लगातार हुई बारिश ने और उसके बाद ओले गिरने से फंसलें खराब हो गईं।

देवेंद्र पांडेय (72) कानपुर नगर के पतारा निवासी हैं। कुल दस बीघा खेती के मालिक हैं। बेमौसम बारिश ने लगभग पचास फीसदी खेती बर्बाद कर दी है। देवेंद्र पांडेय ने डाउन टू अर्थ को बताया, "हमने लगभग ढाई बीघा में टमाटर लगाया था, अभी सिर्फ एक बार खेत से दस कैरेट टमाटर बाजार तक पहुंचा पाया था, जिसमें कुल तीन हजार रुपये मिले। अब छः जनवरी से लगातार बारिश हो रही है और 90 फीसदी टमाटर बर्बाद हो गया।"

वे आगे कहते हैं, "ढाई बीघा टमाटर की खेती करने में 25 से 30 हजार तक लागत आती है, लेकिन इस बारिश ने टमाटर की खेती को पूरी तरह चौपट कर दिया। इसी तरह लाही, चना और मटर की खेती भी बारिश से बर्बाद हो गई।"

वहीं दूसरी चिंता आलू किसानों को सता रही है कि यदि अचानक तेज धूप हुई तो आलू में झुलसा रोग पकड़ सकता है।

आलू किसान देवी प्रसाद प्रजापति (55) ने डाउन टू अर्थ से बताया कि, "चार दिनों से लगातार तेज हवा के साथ हुई बारिश से आलू का पौधा पूरी तरह खेत में लेट गया है, अब अंदर ही अंदर आलू में सड़न पैदा हो जाएगी। अभी आलू पकी भी नहीं है कि हम उसे खोदकर मंडी तक पहुंचा सकें। आगे अगर तेज धूप हुई तो आलू के पौधे पीले पड़ जाएंगे।"

उत्तर प्रदेश किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शिव नारायण सिंह परिहार ने किसानों के साथ जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर मांग की कि बुंदेलखंड के जनपद ललितपुर, झांसी बांदा, जालौन आदि जनपदों में किसानों की रबी की फसल नष्ट हुई है उसका अविलंब प्लाट टू प्लाट सर्वे कराकर फसल का मुआवजा दिलाया जाए और किसानों की नष्ट हुई फसल का बीमा क्लेम दिलाया जाए।

यूं तो राज्य में 11 जिलों को छोड़ कर बाकी सभी जिलों में सामान्य से बहुत अधिक बारिश हुई है, लेकिन सबसे अधिक बारिश ललित पुर में 53.7 मिमी ( सामान्य से 4028% अधिक ), चित्रकूट में 61 मिमी ( सामान्य से 2673% अधिक), हमीरपुर 57 मिमी ( सामान्य से 2491% अधिक), झांसी में 45.7 मिमी ( सामान्य से 2491% प्रतिशत अधिक) अधिक बारिश हुई है।

मौसम विभाग के अनुसार कानपुर में रविवार 9 जनवरी 2022 को पूरे दिन में नौ मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं जालौन में 1.3 मिमी, झांसी में 1.6 मिमी, महोबा 5.4 मिमी, हमीरपुर में 9.3 मिमी, ललितपुर में 10.7 मिमी, बांदा में 24.8 मिमी और चित्रकूट में 4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

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