बारिश और बाढ़ से धान की फसल को नुकसान, ज्यादा नमी से आलू, सरसों की बुवाई में देरी

उत्तर प्रदेश के 19 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। सभी जिलाधिकारियों से 5 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है

By Arvind Shukla

On: Thursday 27 October 2022
 
पानी में भीगे धान निकाल कर सड़क पर रखने जाते सुरेश गुप्ता। फोटो: अरविंद शुक्ला
पानी में भीगे धान निकाल कर सड़क पर रखने जाते सुरेश गुप्ता। फोटो: अरविंद शुक्ला पानी में भीगे धान निकाल कर सड़क पर रखने जाते सुरेश गुप्ता। फोटो: अरविंद शुक्ला

घुटने तक पानी में झुके-झुके एक एक मुट्ठा धान काटकर सड़क के किनारे रख रहे किसान सुरेश गुप्ता कहते हैं, “भैया धान तो गवय कीन, यू पानी सूखय में दुई महिना लगिहैं, यानि गेहुअं बोई पाना मुश्किल है।’ 

22 साल के सुरेश गुप्ता उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के टांडपुर गांव में रहते हैं। उनके खेत के आसपास के कई खेत 27 अक्टूबर तक पानी से भरे हुए थे। सुरेश के मुताबिक उनके इलाके (आसपास के 5-7 गांवों में) धान की फसल में 80-90 फीसदी तक नुकसान है।

अक्टूबर की भारी बारिश का दौर निकले हुए 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं, जैसे-जैसे पानी खेतों से कम होता जा रहा है, उसके साथ ही नुकसान की भयावह तस्वीर और साफ हो रही है।

सुरेश के खेत से करीब 500 मीटर दूर मोहम्मद हबीब (45 वर्ष) अपने डेढ़ बीघा (5 बीघा एक एकड़) धान को बेमन काट रहे थे। मन करता भी कैसे, पूरा धान गिरा हुआ, लगातार भीगते-भीगते ज्यादातर धान जम गया था, खेत का नजारा कुछ ऐसा था जैसे धान की बुवाई (रोपाई नहीं) के 21-25 दिन बाद होता है। पूरे खेत में हरियाली झिटकी हुई थी।

“इसमें करीब 4.5 हजार रुपए की लागत लगाई थी, उम्मीद थी कि 5-7 क्विंटल धान पैदा हो ही जाएगा, लेकिन अब 1 से 1.5 क्विंटल मुश्किल है।” हबीब हताशा भरे शब्दों में बताते हैं। चलते हुए वो पूछते हैं, “भाइया कुछ मिली विली (मुआवजा-बीमा) का?”

सुरेश और हबीब, दिल्ली से करीब 575 किलोमीटर दूर बाराबंकी जिले के निवासी हैं। 15 सितंबर की बारिश से पहले ये इलाका लगभग सूखे की चपेट में था। किसान डीजल पंपिंग सेट से सिंचाई कर किसी तरह अपने धान जिंदा रखे हुए थे।

लेकिन पहले सितंबर की अतिवृष्टि और फिर अक्टूबर 5 से 13 तारीख की बीच ऐसी बारिश हुई थी कि खेत-खलिहान सब डूब गए। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक अक्टूबर से 27 अक्टूबर के बीच बाराबंकी में 35.5 मिलीमीटर के मुकाबले 330.6 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य से 829 फीसदी (लार्ज एक्सेस) ज्यादा है। जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में इस दौरान 27.9 मिलीमीटर के मुकाबले 144 मिलीमीटर ज्यादा बारिश हुई जो सामान्य से 421 फीसदी ज्यादा है।

बाराबंकी के ही किसान शैलेंद्र बताते हैं, “हमारे पास 6 एकड़ से ज्यादा था, सूखे के कारण एक एकड़ तो लगा नहीं पाए थे। गेहूं बेचकर डीजल पर खर्च किया, फसल अच्छी आई थी कोई रोग नहीं था लेकिन निगरय के वक्त (फूल आने के दौरान) बारिश का दौर शुरु हो गया और फिर इतनी ज्यादा बारिश हुई की 90 फीसदी फसल खेत में ही बर्बाद हो गई।” 

यूपी में अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिले मौसमी आपदा की चपेट में हैं। बाराबंकी, सीतापुर, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती से लेकर गोरखपुर तक कई जिलों किसान के अतिवृष्टि और बाढ़ के सबसे ज्यादा सताए हैं।

उत्तर प्रदेश में किसानों को प्राकृतिक आपदा से राहत देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार नुकसान का आंकलन करवा रही है। इसके अतिरिक्त 20 अक्टूबर को जारी एक शासनादेश में कहा कि राजस्व, कृषि एवं बीमा कंपनियों की टीमें 15 दिन में क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट भेजें जबकि 30 दिन के अंदर प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता मिल जाए।

उत्तर प्रदेश के राहत विभाग के मुताबिक बाढ़ और बारिश से कुल कितना नुकसान हुआ है, इसका आंकलन अभी जारी है। सूखे के संबंध में भी दोबारा से आकंलन किया जा रहा है। राहत विभाग में अनुसचिव हरी प्रसाद ने डाउन टू अर्थ को फोन पर बताया, “प्रदेश के 19 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। सभी जिलाधिकारियों से 5 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है। इसी के बाद सही तस्वीर सामने आएगी।” 

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