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बढ़ रहा खेती की जमीन पर दबाव, 4 वर्ष में 49,051 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि घटी

जहां 2011-12 में कुल कृषि भूमि 15,53,007 वर्ग किलोमीटर थी, जोकि 2015-16 में घटकर 15,03,956 वर्ग किलोमीटर रह गई थी

By Lalit Maurya

On: Monday 12 October 2020
 

भारत में कृषि को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। आज भी देश की 70 फीसदी ग्रामीण आबादी अपनी जीविका के लिए कृषि पर ही निर्भर है। जबकि यदि किसानों की बात करें तो देश के 82 फीसदी किसान छोटे और सीमांत हैं। ऐसे में फसल उनके लिए कितनी मायने रखती है वो बताने की जरुरत नहीं है। ऐसे में देश के लिए जरुरी हो जाता है कि सरकार देश में कृषि भूमि को संरक्षण प्रदान करे साथ ही उसका पूरी तरह से उपयोग किया जाए यह भी सुनिश्चित करे। मगर हाल ही में छपी सरकारी रिपोर्ट "एनवी स्टैट्स इंडिया 2020: वॉल्यूम II" तो कुछ और ही कहानी कहती है। यदि उसपर छपे आंकड़ों को देखें तो जहां 2011-12 में कृषि भूमि 15,53,007 वर्ग किलोमीटर थी, वो 2015-16 तक घटकर 15,03,956 वर्ग किलोमीटर रह गई थी। स्पष्ट है कि इन वर्षों के दौरान कृषि भूमि में 49,051 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। 

इसके साथ ही 2010-11 के मुकाबले 2015-16 में शुद्ध बोए गए क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गई है। जहां 2010-11 में इसका कुल क्षेत्रफल 14,15,630 वर्ग किलोमीटर था वो  2015-16 में घटकर 13,95,060 वर्ग किलोमीटर रह गया था। इसी तरह इस अवधि के दौरान कृषि जोत में भी कमी दर्ज की गई थी जो 18,20,100 से घटकर 2015-16 में 18,16,030 वर्ग किलोमीटर रह गई थी। 

वहीं देश में यदि स्थानांतरित कृषि की बात करें तो उसके क्षेत्र में वृद्धि आई है। जहां 2011-12 में वो 3,743 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2015-16 तक बढ़कर 4,023 वर्ग किलोमीटर में फैल गई थी। इसी तरह देश के बागानों में भी वृद्धि देखी गई है जो 2011-12 में 83,514 से बढ़कर 2015-16 में 85,118 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल गए हैं। देश में परती भूमि में भी काफी वृद्धि हुई है। जहां 2011-12 में उसका क्षेत्र 1,81,469 वर्ग किलोमीटर का था, वो 2015-16 में बढ़कर 2,28,179 वर्ग किलोमीटर हो गया था।

हालांकि सबसे अच्छी बात यह रही की देश में ऊसर और बंजर भूमि में कमी दर्ज की गई है। जहां 2011-12 में उसका कुल क्षेत्रफल 4,24,717 वर्ग किलोमीटर का था वो 2015-16 तक घटकर 3,63,860 वर्ग किलोमीटर रह गया था। 

यदि देश में खनन के क्षेत्रफल की बात करे तो उसमें भी वृद्धि हुई है। जो 6,024 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2015-16 में 6,620 वर्ग किलोमीटर में फैल गई है। इसी तरह ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में बढ़ रहे निर्माण क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है। जहां 2011-12 में ग्रामीण क्षेत्र का 74,653 वर्ग किलोमीटर हिस्सा निर्मित था वो 2015-16 में बढ़कर 75,079 वर्ग किलोमीटर हो गया था। इसी तरह शहरी क्षेत्र में भी 38,321 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 40,150 वर्ग किलोमीटर हिस्सा निर्मित हो चुका था।

जलस्रोतों और वेटलैंड के क्षेत्रफल में 570 वर्गकिलोमीटर की कमी 

रिपोर्ट के अनुसार जो भूमि जंगलों के रूप में वर्गीकृत है उसमें भी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार जहां 2011-12 में 7,25,543 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर जंगल थे वो 2015-16 तक 7,914 वर्ग किलोमीटर घटकर 7,17,629 वर्ग किलोमीटर में ही सिमट गए थे। जबकि इंडिया स्टेट ऑफ़ फारेस्ट रिपोर्ट 2019 के अनुसार 24.56 फीसदी भूभाग पर जंगल थे। जबकि यदि देश में घास और चराई स्थल की बात करें तो उसमें भी कमी आई है। इसका विस्तार 25,397 से घटकर 23,551 वर्ग किलोमीटर का रह गया है। जबकि दूसरी ओर देश में बर्फ और ग्लेशियर के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। यह 2011-12 में 32,581 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 1,01,325 वर्ग किलोमीटर में फ़ैल गए हैं। वहीं यदि देश में जलस्रोतों और वेटलैंड्स की बात करें तो उसमें भी 520 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है यह कमी मुख्य रूप से नदी धाराओं और नहरों में दर्ज की गई है। जहां 2011-12 में इनका कुल क्षेत्र 1,38,294 वर्ग किलोमीटर था वो 2015-16 तक घटकर 1,37,774 वर्ग किलोमीटर रह गया था। 

यदि सिंचित क्षेत्र की बात करें तो उसमें 2005-06 के मुकाबले 2015-16 में वृद्धि दर्ज की गई है।  जहां 2005-06 में कुल कृषि भूमि का 43.7 फीसदी हिस्सा सिंचित था वो 2015-16 में बढ़कर 49 फीसदी हो गया था। हालांकि इस अवधि में सीमान्त किसानों में वृद्धि दर्ज की गई है जो 20.2 फीसदी से बढ़कर 24 फीसदी पर पहुंच गए थे। जबकि इसके विपरीत बड़े किसानों में कमी दर्ज की गई है। जो 11.8 से घटकर 2015-16 में सिर्फ 9.1 फीसदी रह गए हैं। 

देश में भूमि की गुणवत्ता में आ रही गिरावट की बात करें तो अच्छी बात यह रही कि उसमें कमी दर्ज की गई है जहां 2005-06 में 912,98,196 वर्ग किलोमीटर जमीन अवक्रमण की चपेट में थी वो 2015-16 तक घटकर 912,06,650 वर्ग किलोमीटर रह गई थी।  2015-16 के आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 5.6 करोड़ हेक्टेयर भूमि बंजर है, जोकि कुल भूमि का करीब 17 फीसदी हिस्सा है। यह बात मायने रखती है जब दुनिया की 17 फीसदी आबादी 2 फीसदी भूभाग पर रहती हो। 

इसके साथ ही इस रिपोर्ट में देश की जैवविविवधता का भी उल्लेख किया है। जिसके अनुसार स्थल पर कुल 906 संरक्षित क्षेत्र हैं जोकि 165282 वर्ग किलोमीटर में  फैले हैं। वहीं यदि समुद्री संरक्षित क्षेत्र की बात करें तो वो 9,979 वर्ग किलोमीटर में हैं, जिनकी संख्या करीब 133 है। रिपोर्ट के अनुसार यदि फ़्लोरा और फौना की सभी प्रजातियों को जोड़ दे तो अब तक करीब 1,51,602 प्रजातियों के बारे में जानकारी है। जबकि देश में करीब 29,964 हाथी हैं। वहीं देश में शेरों की आबादी करीब 2,967 है।