हेलीकॉप्टर से टिड्डियों पर हमला, कहीं देर तो नहीं हो गई

पिछले साल हुए टिड्डी दलों के बड़े हमलों के बावजूद सरकार ने तब कोई बड़ा कदम नहीं उठाया

By Raju Sajwan

On: Wednesday 01 July 2020
 

देर से ही सही, लेकिन आखिरकार सरकार ने टिड्डियों के खात्मे के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हालांकि यह कितना कारगर सिद्ध होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना जरूर है कि केंद्र सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम है, जिसमें भारतीय वायुसेना तक की मदद ली जा रही है। 

31 जून को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर  स्थित एक हेलीपैड से स्प्रे उपकरण से युक्त एक बेल हेलीकॉप्टर को हरी झंडी दिखाई। यह हेलीकॉप्टर उत्तरलाई, बाड़मेर स्थित वायु सेना स्टेशन के लिए रवाना हुआ, जहां वह शुरुआती तौर पर तैनात रहेगा और वहां से बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और नागौर के रेगिस्तानी इलाकों में टिड्डी नियंत्रण के लिए भेजा जाएगा।

बेल 206-बी3 हेलीकॉप्टर एक ही पायलट से चलेगा, जिसमें एक बार में 250 लीटर कीटनाशक ले जाने की क्षमता है और एक बार में इसे 25 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में उपयोग में लाया जा सकता है। एक अधिकार प्राप्त समिति ने डीजीसीए और नागर विमानन मंत्रालय से सभी स्वीकृतियां मिलने के बाद रेगिस्तानी इलाकों में हवाई छिड़काव के लिए एक हेलीकॉप्टर की तैनाती के लिए कंपनी का चयन किया गया था।

यह भी पढ़ें- टिड्डी हमला: क्या खरीफ फसल की बुआई नहीं कर पाएंगे किसान?

दरअसल, इस हेलीकॉप्टर की जरूरत पिछले साल नवंबर-दिसंबर में उस समय महसूस की गई थी, जब टिड्डी दल ने गुजरात के कई जिलों में बड़ा हमला किया था और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था।

उस समय केंद्र की दो दर्जन से अधिक टीमों को गुजरात भेजा गया था और दिसंबर 2019 में गुजरात के कृषि मंत्री आरसी फाल्दू ने कहा था कि हेलिकाप्टर से कीटनाशक के छिड़काव की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, लेकिन गुजरात से कुछ दिन बाद टिड्डियां चली गई तो योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।

यह भी पढें - टिड्डी दलों का हमला: 2019 की गलतियों से सबक लेगी सरकार?

जबकि मुसीबत टली नहीं थी, बल्कि फरवरी 2020 तक टिड्डियों का हमला बरकरार रहा और इसके दो माह बाद यानी अप्रैल 2020 में टिड्डियां फिर से सक्रिय हो गई। इस बार का हमला पिछले सब हमलों से बड़ा है। 30 जून को केंद्रीय कृषि मंत्रालय के बयान में कहा गया कि इस साल अब तक टिड्डियां 9 राज्यों के 101 जिलों में अपना प्रकोप दिखा चुके हैं। हालांकि अधिकतर इलाकों में फसल कट चुकी है, इसलिए फसल का अधिक नुकसान नहीं हुआ है।

यह भी पढ़ें - 2019 में टिड्डी दलों ने भारत पर 200 से अधिक बार किया हमला

लेकिन अब सरकार की दो चिंताएं हैं। केंद्र सरकार के टिड्डी नियंत्रण संगठन (एलडब्ल्यूओ) के एक अधिकारी बताते हैं कि अब इन टिड्डियों के प्रजनन का समय है। भारत में भी कुछ स्थानों में प्रजनन की आशंका है, इससे यदि समय रहते बड़े स्तर पर कदम नहीं उठाया गया तो अगली फसल के लिए ये टिड्डियां बहुत बड़ा खतरा बन सकती हैं। देखा गया है कि ये टिड्डियां एक बार जिस इलाके से गुजर जाती हैं तो वहां दोबारा लौट सकती हैं, इसलिए इन 9 राज्यों पर खतरा अधिक है।

वहीं, खाद्य एवं कृषि संगठन के 27.06.2020 के लोकस्ट (टिड्डी) स्टेटस अपडेट के तहत, उत्तरी सोमालिया में जमा झुंडों के भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे ग्रीष्मकालीन प्रजनन क्षेत्रों के लिए हिंद महासागर का रुख करने का अनुमान है। पाकिस्तान के सिंध में झुंड अंडे देने की शुरुआत कर चुके हैं और वर्तमान में झुंड सिंधु घाटी में मौजूद हैं। दक्षिण पश्चिम एशियाई देशों (अफगानिस्तान, भारत, ईरान और पाकिस्तान) के तकनीक अधिकारियों की आभासी बैठकें साप्ताहिक आधार पर हुई हैं। इस साल अभी तक एसडब्ल्यूएसी-टीओसी की 15 बैठक हो चुकी हैं। क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण से संबंधित तकनीक जानकारियां साझा की जा रही हैं।

 इसका आशय है कि भारत में अभी से मंडरा रहे 10 से अधिक टिड्डी दलों के अलावा नए टिड्डी दल भी भारत में प्रवेश करने वाले हैं।

मीडिया के साथ बातचीत में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 26 साल के लंबे अंतराल के बाद, बीते साल टिड्डी दल का हमला हुआ था। भारत सरकार और राज्य सरकारें इन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मिलकर काम कर रही हैं। सरकार पूरी तरह तैयार है और सभी राज्य सरकारों को सतर्क कर दिया गया है और वे केन्द्र सरकार के साथ समन्वय में काम कर रही हैं।

यह भी पढ़ें - किसानों पर मंडराती आसमानी आफत

मशीनों, वाहनों और कार्यबल की तैनाती बढ़ा दी गई है और संबंधित राज्य संकट से निबटने के लिए एसडीआरएफ कोष का उपयोग कर रहे हैं। टिड्डी नियंत्रण में पहली बार ड्रोन का उपयोग किया गया है और आज हेलीकॉप्टर के उपयोग से कीटनाशकों के हवाई छिड़काव की शुरुआत भी कर दी गई है।

तोमर ने बताया कि यूके की एक कंपनी को 5 हवाई छिड़काव मशीनों का ऑर्डर जारी किया था और इनमें से एक मशीन मिल गई है। इन मशीनों को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा और टिड्डी नियंत्रण के लिए काम में लाया जाएगा।

कैबिनेट सचिव ने 27 मई, 2020 को टिड्डी दल की स्थिति की समीक्षा की और नागर विमानन मंत्रालय को ड्रोन, विमान/ हेलीकॉप्टर के माध्यम से कीटनाशकों के हवाई छिड़काव के लिए वस्तु एवं सेवाओं की खरीद को आसान बनाने में कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग को सहयोग करने के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें - तीन तरफ से समुद्र से घिरे भारत में आया टिड्डी दल, क्या हवा है इसकी दोषी?

इसके बाद कीटनाशकों के हवाई छिड़काव से संबंधित वस्तु एवं सेवाओं की खरीद सुनश्चित करने के लिए कृषि मंत्रालय के अपर सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी अधिकार प्राप्त समिति की स्थापना की गई थी। इस समिति में एमओसीए, पवन हंस, डीजीसीए, एयर इंडिया और डीएसीएंडएफडब्ल्यू के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं।

अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश पर डीएसीएंडएफडब्ल्यू ने ऊंचे पेड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में बैठे टिड्डी दलों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराने वाली पांच कंपनियों को जोड़ा है, जिसमें प्रति कंपनी 5 ड्रोन उपलब्ध कराएगी। अभी तक टिड्डी नियंत्रण के लिए जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर  व  नागौर में 12 ड्रोन तैनात किए गए हैं।

इस प्रकार भारत प्रोटोकॉल्स को अंतिम रूप देकर टिड्डी नियंत्रण के लिए ड्रोन का उपयोग करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।