कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का दौर आएगा

देश में कृषि व कृषि शिक्षा की दशा पर पड़ताल करती रिपोर्ट्स की सीरीज में प्रस्तुत है भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के वीसी एके सिंह से बातचीत 

By ukumar845@gmail.com

On: Wednesday 21 August 2019
 
भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के वीसी एके सिंह। फोटो: उमेश कुमार राय
भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के वीसी एके सिंह। फोटो: उमेश कुमार राय भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के वीसी एके सिंह। फोटो: उमेश कुमार राय

देश में कृषि शिक्षा की क्या स्थिति है?

वर्तमान कृषि शिक्षा को लेकर युवाओं में क्रेज बढ़ा है। यह अलग बात है कि आज भी लोग इंजीनियरिंग व मेडिकल व अन्य क्षेत्रों में विद्याथियों में रूझाान ज्यादा है, लेकिन इसका यह कारण है कि देश में कृषि विवि काफी कम है। देश में 80 से ज्यादा विवि हैं। बिहार में कृषि की पढ़ाई इंटर से शुरू हो गयी है, लड़के इंटर में कृषि की पढ़ाई कर रहे हैं. विश्वविद्यालय में काउंसलिंग में भी इंटर कृषि के छात्र की प्राथमिकता दी जा रही हैं। आने वाले दिन दोबारा कृषि के ही होंगे। जब लड़के पढ़ेंगे, तो इसमें नये-नये शोध कार्य होंगे।

कृषि शिक्षा में कितनी दिलचस्पी ले रहे हैं युवा ?

युवाओं में दिलचस्पी बढ़ी है, प्रत्येक वर्ष नामांकन में भीड़ ज्यादा होती है। युवा पढ़ रहे हैं। अब पारंपरिक डिग्री के अलावा युवा प्रोफेशनल पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते हैं। सरकार भी चाहती है कि लोग पढ़ कर ज्यादा से ज्यादा लोग रोजगार पाये, यह उनके लिये लाभदायक होगा, उन्हें नोकरियां मिलेगी, आज बीएयू से पासआउट छात्र कई अच्छे कंपनी व अन्य सरकारी क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे हैं।

युवाओं के लिए कृषि शिक्षा के क्या मायने हैं?
युवा कृषि शिक्षा के महत्व को समझ रहे हैं. यह यूं कहा जा सकता है कि देशके युवा वर्ग अब ज्यादा कृषि के प्रति चिंतित हैं. आप देख सकते हैं कि लोग बोनाफाइड प्लांट या फिर छोटे कलमी वाले पौधे व सब्जी उनके आंगन में लगे होते हैं। आज शहरी क्षेत्रों में किचन गार्डन काफी फैमस है, लोग ताजी सब्जियां खाना पसंद करते हैं। अपने छोटे से गार्डन में ही सही, लोग सब्जियां उगा रहे हैं। रही बात लघु कृषि के क्षेत्र की, तो इस क्षेत्र मेें भी कृषि के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ी है, अगर ऐसा नहीं होता, तो कई ऐसे उदाहरण आपको मिल जायेंगे, जिसमें आइआइएम व आइआइटी के छात्र करोड़ों के पैकेज को छोड़कर कृषि क्षेत्र में अपनी कैरियर तलाश रहे हैं।

क्या छात्रों को पढाया जाने वाला कृषि पाठ खेती-किसानी को मदद पहुँचा रहा है? 

हां, बिल्कुल। आज हमारा विवि एक पहचान बन कर उभरा है. आज अगर किसी किसान को बीज चाहिए, तो वे सबौर गेहूं व सबौर अन्य प्रजाति लेना पसंद करते हैं. इसका तात्पर्य है कि हमारे शोध द्वारा तैयार किये गये बीज सही हैं, और ज्यादा उत्पादन भी दे रहे हैं। हम अपने छात्रों को छह माह के लिये किसानों के यहां भेजते हैं, वहां से कई जानकारी वह लाते हैं ओर अपने पढ़ाते हैं।

आपकी नजर में इस वक्त किसानों क्या स्थिति है ?

किसान खेती से नहीं भाग रहे हैं, बल्कि आप ऐसे समझ सकते हैं कि आज लोग एमबीए व आइआइटी पास युवाओं में भी किसानों को खेती करते देख सकते हैं. बस ये युवावर्ग प्रोफेशनल की तरह इसे ले रहे हैं। मधुबनी के आइआइएम से पास एक युवा सत्तू बेचने व किसानों को सत्तू की ब्रांडिग का नयी तरीके से कर रहे हैं. राजस्थान में भी आप कई मुखियाओं को देख सकते हैं।

क्या भारत अब कृषि संकट की चपेट में है?

भारत कृषि संकट के चपेट में नहीं है। लोगों को देखने का नजरिया अलग है। पहले लोग पूरी तरह खाद्यान्नों पर निर्भर थे, लेकिन आज लोगों के शाम मांसाहरी भोजन पर भी लोग निर्भर होते जा रहे हैं। आज देश में मछली उत्पादन, चिकन आदि कई ऐसे मांसाहरी भोजन हैं, जो ले रहे हैं। यानि शाकाहारी भोजन में कमी आयी है।

कृषि का क्या भविष्य क्या देखते हैं? 

ट्रेंड चेंज हो रहा है, लेकिन आज भी देश में सबसे ज्यादा निर्भरता खेती पर ही है। लोग कृषि कार्य में ज्यादा संलग्न है। ऐसे में आप नवउन्नत कृषि करने का ट्रेंड आ चुका है।