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229 जिलों में सामान्य से कम बारिश: धान, मोटा अनाज, दलहन-तिलहन की बुआई पर दिखा असर

23 जुलाई 2021 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच साल की औसत बुआई के मुकाबले इस साल लगभग 3 फीसदी कम बुआई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 9 फीसदी कम है

By Raju Sajwan

On: Friday 23 July 2021
 
बारिश में कमी के कारण कई इलाकों में बुआई में देरी हो रही है। फोटो: मोयना, सीएसई
बारिश में कमी के कारण कई इलाकों में बुआई में देरी हो रही है। फोटो: मोयना, सीएसई बारिश में कमी के कारण कई इलाकों में बुआई में देरी हो रही है। फोटो: मोयना, सीएसई

देश के 229 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि 22 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से बहुत कम (60 से 99 फीसदी कम) बारिश हुई है। इसका असर खरीफ सीजन की बुआई पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

कृषि मंत्रालय द्वारा 23 जुलाई को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में पिछले वर्ष जुलाई के तीसरे सप्ताह के अंत तक 791.84 लाख हेक्टेयर में फसल की बुआई हो चुकी थी। जबकि इस साल 2021 में 23 जुलाई को समाप्त सप्ताह तक 721.36 लाख हेक्टेयर में बुआई हो पाई है। यानी कि पिछले साल के मुकाबले 70.48 लाख हेक्टेयर (8.90 फीसदी) में कम बुआई हुई है। 

देश में 1073 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ सीजन की बुआई का लक्ष्य रखा गया है। सामान्यता जुलाई के तीसरे सप्ताह तक देश में 744.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल की बुआई हो जाती है। जिसका आशय है कि जुलाई के तीसरे सप्ताह तक आमतौर पर लगभग 70 फीसदी बुआई हो जाती है। सामान्य से आशय पिछले पांच साल के दौरान बुआई क्षेत्रफल के औसत से है। इसका आशय है कि पिछले पांच साल के औसत के मुकाबले इस साल अब तक तीन फीसदी कम बुआई हो पाई है।    

हालांकि 16 जुलाई 2021 को समाप्त सप्ताह के मुकाबले इस सप्ताह बुआई में थोड़ा सुधार हुआ है। पिछले सप्ताह तक सामान्य से 24.92 लाख हेक्टेयर कम बुआई थी।

पिछले साल के मुकाबले धान की फसल की बुआई लगभग 6.83 प्रतिशत कम हुई है। अगर राज्यों की बात करें तो ओडिशा, छत्तीसगढ़, आसाम, बिहार, गुजरात आदि राज्यों में धान की बुआई लक्ष्य से काफी कम हो पाई है। हालांकि मध्यप्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश में अब तक धान की बुआई अधिक हुई है।

दालों की बुआई पिछले साल भी पांच साल के औसत के मुकाबले कम हुई थी। दलहन का सामान्य क्षेत्रफल 135.29 लाख हेक्टेयर में है और जुलाई के तीसरे सप्ताह तक सामान्य तौर पर 99.28 लाख हेक्टेयर में बुआई हो जाती है, लेकिन इस वर्ष अब तक 87.30 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई है।

पिछले साल भी 97.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुआई हो चुकी थी, जो इस साल के मुकाबले 10.17 प्रतिशत अधिक थी। दालों की बुआई के मामले में सबसे अधिक राजस्थान और फिर मध्यप्रदेश पिछड़े हैं। 23 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में 9.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुआई नहीं हो पाई है, जबकि मध्य प्रदेश में 5.44 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुआई प्रभावित हुई है।

किसानों के लिए तिलहन की फसल भी काफी मायने रखती है और कई राज्यों में तिलहन खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है। इस सीजन में देश में 180.03 लाख हेक्टेयर में तिलहन बोई जाती है। जुलाई के तीसरे सप्ताह तक आमतौर पर 147.02 लाख हेक्टेयर में तिलहन बोई जाती है, लेकिन 2021 में अब तक 145.81 हेक्टेयर में तिलहन बोई गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 16.87 लाख हेक्टेयर (10.37) प्रतिशत कम है।

तिलहन के मामले में सबसे प्रभावित राज्य मध्य प्रदेश है। यहां अब तक तय लक्ष्य के मुकाबले 5 80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की बुआई नहीं हुई है। जबकि दूसरे नंबर पर प्रभावित राज्य राजस्थान है। यहां तक 2.67 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुआई नहीं हुई है।

मोटा अनाज की फसल की बुआई भी इस सीजन में काफी प्रभावित हुई। पिछले साल के मुकाबले इस साल साल लगभग 15.51 प्रतिशत बुआई कम हुई है।

इस साल देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून देरी से आया, जबकि जिन हिस्सों में मानसून समय पर पहुंचा, वहां सामान्य से काफी अधिक बारिश होने के कारण भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।

हालांकि जानकारों का कहना है कि जुलाई के मध्य में मानसून की रफ्तार में काफी सुधार हुआ है, लेकिन 23 जुलाई 2021 तक देश के 229 जिलों में बारिश सामान्य से कम (20 से 59 फीसदी) बारिश हुई। जबकि 22 जिले ऐसे भी हैं, जहां सामान्य से बहुत कम (60 से 99 फीसदी) बारिश हुई है। केवल 35 फीसदी जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य बारिश हुई है, जबकि 13 फीसदी जिले में सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश हुई है।

हालांकि 23 जुलाई तक पूरे देश में मानसून की स्थिति का आकलन किया जाए तो सामान्य से केवल 5 फीसदी ही कम बारिश हुई है। जबकि इससे पहले 2019 में 19 फीसदी कम बारिश हुई थी। पिछले साल 2020 में 6 फीसदी अधिक बारिश हुई थी।