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टिड्डी हमला: क्या खरीफ फसल की बुआई नहीं कर पाएंगे किसान?

लॉकडाउन की वजह से केन्या के पास टिड्डियों को मारने के लिए कीटनाशक नहीं है, इसके चलते भारत पर टिड्डियों का दूसरा हमला हो सकता है

By DTE Staff

On: Tuesday 26 May 2020
 
Photo: wikimedia commons
Photo: wikimedia commons Photo: wikimedia commons

टिड्डी दलों के हमले के कारण जहां राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर फसल का नुकसान हुआ है, वहीं अब अधिकारी एक दूसरे ही संकट की आशंका जता रहे हैं।

26 मई को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के वर्तमान हालात को लेकर एक बैठक की। सूत्र बताते हैं कि बैठक में कहा गया कि अभी टिड्डी दलों का हमला जारी रहेगा, बल्कि यह भी आशंका जताई गई कि हो सकता है कि जिन इलाकों में टिड्डियों ने हमला किया है, उन  इलाके के किसान मॉनसून के दौरान बोई जाने वाली फसल (खरीफ) की बुआई नहीं करेंगे।

टिड्डी दलों के हमले से अब तक राजस्थान सबसे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सरकार ने यहां 8,000 करोड़ रुपए की फसल के नुकसान का अनुमान लगाया है। इसके बाद मध्य प्रदेश के कई जिलों में टिड्डियों ने फसल को नुकसान पहुंचाया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी टिड्डी दलों के हमले से नुकसान से सचेत रहने को कह रही है।

इन दिनों खेतों में जो फसलें हैं, ये सर्दी की फसलें हैं और किसान इन्हें बेचकर नगदी अर्जित करता है। और इस फसल से होने वाले फायदे को खरीफ की फसल पर निवेश करता है।

एफएओ की बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि अब खतरा यह है कि अगर टिड्डी द्वारा वर्तमान हमला जारी रहता है, तो किसान डर के मारे अगली फसल नहीं लगाएंगे।

यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान में टिड्डी दलों का हमला बड़ा है और इस हमले को अभूतपूर्व बताया जा रहा है।

उधर, भारत के लिए एक और परेशानी है। माना जा रहा है कि भारत को केन्या से आने वाले टिड्डी दलों के कारण दूसरा बड़ा हमला झेलना पड़ सकता है।

आमतौर पर, जून के मध्य में केन्या से टिड्डियां चलती हैं और पाकिस्तान और ईरान से होते हुए भारत पहुंचती हैं।

ऐसे में यदि यही प्रक्रिया जारी रही तो जून में भारत में टिड्डी दलों का दूसरा हमला हो सकता है। दरअसल लॉकडाउन की वजह से केन्या टिड्डियों को रोकने का इंतजाम नहीं कर पाया।

एफएओ अधिकारी बताते हैं कि यदि हम पूरी कोशिश के बाद राजस्थान-मध्य प्रदेश में वर्तमान टिड्डी हमले को रोक भी देते हैं, तब भी किसानों को कोई खास फायदा नहीं होगा, क्योंकि केन्या की वजह से टिड्डियों का दूसरा हमला भी लगभग तय है।

एफएओ की बैठक से संकेत मिलता है, टिड्डियों की वजह से या तो किसान मानसून या खरीफ की फसलों की बुआई नहीं करेंगे। या फिर उन्हें देर से बुआई करनी पड़ेगी।

दरअसल, केन्या टिड्डियों को मारने के लिए कीटनाशकों की कमी से जूझ रहा है। कोरोना लॉकडाउन के कारण, कीटनाशक के आयात की  प्रक्रिया में देरी हुई। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि भारत केन्या को टिड्डियों के हमलों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशक और अन्य रसायन उपलब्ध करा रहा है। लेकिन केन्या के लिए शिपमेंट अगले कुछ दिनों में ही शुरू हो पाएगी और इसे केन्या पहुंचने में और समय लग सकता है।

अप्रैल के उत्तरार्ध में केन्याई सरकार ने वजीर, सम्बुरु और मार्सबिट काउंटियों में बड़े पैमाने पर छिड़काव अभियान शुरू किया, जहां टिड्डियों ने अपने अंडे दिए थे, जो अब बड़े हो चुके हैं। क्योंकि बाद में लॉकडाउन की वजह से यह काम रोक दिया गया।

हालांकि, केन्या के कृषि विभाग के प्रधान सचिव हमादी बोगा ने डाउन टू अर्थ से कहा था कि टिड्डियों को रोकने के इंतजामों में कोई कोताही नहीं बरती गई है, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सेवाओं को नहीं रोका गया।