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टिड्डियों से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया ऐप, ऐसे करेगा काम

शोधकर्ताओं की टीम ने मैस्ट्रो नामक विशेष ऐप बनाया है, जो स्मार्टफोन के कैमरे के माध्यम से टिड्डियों और कीटों को पहचान सकता है और उनके जीपीएस लोकेशन को रिकॉर्ड कर सकता है

By Dayanidhi

On: Friday 14 February 2020
 
Photo credit: creative commons
Photo credit: creative commons Photo credit: creative commons

फसलों को नष्ट करने वाले कीटों से निपटने के लिए एक नया स्मार्टफोन ऐप विकसित किया गया है। यह जल्द ही उन किसानों की मदद कर सकता है जिनकी फसलों को टिड्डियों के झुंड द्वारा नष्ट किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी टिड्डियों के इस आतंक से बचने के लिए तेजी से कार्रवाई करने की बात कही है।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लिंकन के शोधकर्ताओं की टीम ने मैस्ट्रो नामक विशेष ऐप बनाया है, जो स्मार्टफोन के कैमरे के माध्यम से टिड्डियों और कीटों को पहचान सकता है और उनके जीपीएस लोकेशन को रिकॉर्ड कर सकता है। यह शोध साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

किसान ऐप की सहायता से टिड्डियां कहा है, उनकी जगह और उनकी संख्या रिकॉर्ड करके यह सुनिश्चित कर सकते है कि फसलों को बचाने के लिए कितनी मात्रा में कीटनाशक का उपयोग किया जाए तथा उन्हें फैलने से कैसे रोका जाए। इसका अगला चरण क्लाउड सर्वर का विकास करना है जिसमें ऐप डेटा को अपलोड किया जाएगा ताकि वास्तविक समय में कीट के स्थान की पहचान की जा सके।

इस ऐप की मदद से कीटनाशकों के सटीक उपयोग करके टिड्डी के झुंडों को कम किया जा सकता है।

जनवरी में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने चेतावनी दी कि अफ्रीका के हॉर्न में डेजर्ट टिड्डे का प्रकोप मानवीय संकट को बड़ा सकता है क्योंकि पलायन करने वाले कीटों के झुंड अपने रास्ते में पड़ने वाले फसलों को चोपट कर सकते हैं। बिगड़ते हुए हालातो को देखते हुए एफएओ ने इस पर तत्काल अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग की है।

अध्ययन का नेतृत्व लिंकन विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ़ कंप्यूटर साइंस के डॉ. बशीर अल-दरी ने  किया है। उन्होंने कहा कि हर साल, लगभग 1.8 करोड़ हेक्टेयर भूमि टिड्डियों और ग्रासशोप्पेर्स के कारण क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिसका किसानों और उनकी उत्पादकता पर काफी असर पड़ता है।

निगरानी तकनीक वर्तमान में टिड्डियों और ग्रासशोप्पेर्स के अंडों को खोजने, लोगों द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण पर निर्भर करती है। लेकिन यह जानकारी केवल किसानों को दीर्घकालिक पूर्वानुमान लगाकर उन्हें निर्णय लेने में मदद करती है।

शोधकर्ताओं नें कहा कि, हमारा लक्ष्य किसानों को उनकी जमीन पर टिड्डों को फैलने से रोकना है। हमें उम्मीद है कि यह नया ऐप किसानों को अधिक जानकारी और अधिक शक्ति देगा।  किसान कीटों के फैलने के बारे में पूर्वानुमान लगा पाएंगे, जिससे वे अपनी फसलों को बचाने के लिए जल्दी और सही निर्णय ले पाएंगे। 

नए सॉफ्टवेयर को बनाने के लिए, वैज्ञानिकों की टीम ने ऐप के सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए 3,500 से अधिक टिड्डों के चित्रों को इकट्ठा किया। साथ ही ऐप विभिन्न प्रकार के इलाकों और पौधों को भी पहचान सकता है।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे ऍप्लिकेशनों की एक बड़ी श्रृंखला के लिए ऐप फ्रेमवर्क का उपयोग किया जाएगा और प्रमुख फसल कीटों और रोगों के बारे में जानकारी समय से पहले मिल जाएगी।

उदाहरण के लिए, ऐप की मदद से किसान आसानी से पौधों की बीमारियों की पहचान कर सकते है। बीमारी से निपटने के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले सकते है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के हिस्से के रूप में विशिष्ट स्थानों में रहने वाले पक्षियों और वन्यजीवों की संख्या और प्रकार को डिजिटली कैप्चर कर उनके बारे में जानकारी इकट्ठा की जा सकती है।