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मिलने लगा ऊंटों को इलाज, पशुपालकों ने ली राहत की सांस

लॉकडाउन की वजह से राजस्थान के ऊंटों को इलाज नहीं मिल पा रहा था

By Madhav Sharma

On: Saturday 09 May 2020
 
मेंज बीमारी के शिकार राजस्थान के ऊंटों का इलाज करते कर्मचारी। फोटो: माधव शर्मा
मेंज बीमारी के शिकार राजस्थान के ऊंटों का इलाज करते कर्मचारी। फोटो: माधव शर्मा मेंज बीमारी के शिकार राजस्थान के ऊंटों का इलाज करते कर्मचारी। फोटो: माधव शर्मा

थार में मेंज बीमारी से पीड़ित ऊंटों को अब इलाज मिलने लगा है। जैसलमेर और बाड़मेर के पशुपालन विभाग ने अलग-अलग गांवों में जाकर सर्वे किया है। बीमार ऊंटों को वैक्सीन और केमिकल स्प्रे दिया गया है।

बता दें कि डाउन-टू-अर्थ ने 27 अप्रैल को ‘रेगिस्तान के ऊंटों में फैली मेंज बीमारी, लॉकडाउन में नहीं मिल रहा इलाज ’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद पशुपालन विभाग ने जैसलमेर और बाड़मेर के ज्वाइंट डायरेक्टरों को जल्दी इलाज मुहैया कराने और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने का आदेश जारी किया।

पशुपालन विभाग, बाड़मेर के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. गिरधर शर्मा ने डाउन-टू-अर्थ को बताया, ‘खबर प्रकाशित होने के बाद मैं टीम के साथ कई गांवों-ढाणियों में गया. समद का पार, अकली, पिट्ठा, सुंदरा और केरला में विभाग ने कैंप लगाया। हमने 91 ऊंट पालकों के 550 से ज्यादा ऊंटों का इलाज किया है. हमारे पास 350-400 इंजेक्शन बचे हैं, जिन्हें कुछ दिन बाद लगाया जाएगा.’

उन्होंने बताया कि इस बीमारी में हर 15-20 दिन बाद ये दवाई लगाई जाती है। मेंज बीमारी का लगातार दो-तीन महीने तक ऊंटों का इलाज होता है।

वहीं, जैसलमेर के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. विनोद कालरा ने हमें बताया कि डाउन-टू-अर्थ में प्रकाशित खबर के मुताबिक जिन गांवों में मेंज के केस थे। उनमें से कुछ गांवों में टीम ने दौरा किया। पोछिणा, लूणार, रतनसिंह की ढाणी में जिनके पशु बीमार थे उन्हें वैक्सीन और केमिकल स्प्रे लगा कर आए हैं। आने वाले दिनों में सम पंचायत समिति के अन्य गांवों में भी टीम जाएगी और बीमार ऊंटों का इलाज किया जाएगा।

इलाज मिलने पर ऊंट पालकों ने राहत की सांस ली है। जैसलमेर जिले में सम तहसील के लूनाण पंचायत के रतनसिंह की ढाणी में रहने वाले नरेन्द्र सिंह सोढ़ा के चार बीमार ऊंटों का इलाज भी हुआ है। डाउन-टू-अर्थ ने प्रकाशित खबर में नरेन्द्र के ऊंटों की बीमारी के बारे में जिक्र किया था।