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आंगनबाड़ी के आहार में अंडा शामिल करने की मांग, 1.20 लाख लोगों ने किया समर्थन

 विरोध करने वाले अंडे को मांसाहार बताते हुए इसे संस्कृति विरोधी मान रहे हैं। हालांकि, पोषण आहार में अंडा शामिल करने के पक्ष में भी मध्यप्रदेश के लाखों लोग हैं।

By Manish Chandra Mishra

On: Tuesday 24 December 2019
 

फोटो : पन्ना जिले के गहरा गांव में खाद्य सुरक्षा और कुपोषण से मुक्ति यात्रा के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते कार्यकर्ता

मध्यप्रदेश सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने हाल ही में आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषण आहार में अंडा को शामिल करने का प्रस्ताव बनाया है। सरकार ने इस प्रस्ताव पर सहमति देते हुए अगले वर्ष से अंडा देने की योजना बनाई है। प्रस्ताव के सामने आते ही प्रदेश में विपक्ष के नेताओं और कई संगठनों का विरोध देखने को मिला। विरोध करने वाले अंडे को मांसाहार बताते हुए इसे संस्कृति विरोधी मान रहे हैं। हालांकि, पोषण आहार में अंडा शामिल करने के पक्ष में भी मध्यप्रदेश के लाखों लोग हैं। इसकी एक बानगी देखने को मिली हाल ही में सम्पन्न हुए हस्ताक्षर अभियान में। 

एक लाख बीस हजार लोगों ने आंगनबाड़ी में अंडे देने का हस्ताक्षर अभियान चलाकर समर्थन किया है। भोजन के अधिकार अभियान के कार्यकर्ताओं ने खादय सुरक्षा से जुड़ी अपनी मांगों का ज्ञापन सोमवार को महिला एवं बाल विकास के प्रमुख सचिव अनुपम राजन को सौंपा। इसके साथ ही उन्हें हस्ताक्षर सौंपकर मांग की कि मध्यप्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण मानकों को बेहतर बनाने के लिए इन पर एक्शन लिया जाना चाहिए। भोजन का अधिकार अभियान से राकेश मालवीय, रेखा श्रीधर, शिवराज कुशवाह, जावेद अनीस एवं अंजलि आचार्य ने यह ज्ञापन सौंपा। दिसंबर महीने में प्रदेश से ग्रामीण और आदिवासी इलाके के लोगों ने ट्विटर पर 'अंडा दो' अभियान भी चलाया। 

पोषण के लिए 18 जिलों में यात्रा
भोजन के अधिकार अभियान से जुड़े विभिन्न जन संगठनों एवं संस्थाओं द्वारा खाद्य असुरक्षा और कुपोषण से मुक्ति के लिए जनयात्रा 2 अक्टूबर से 20 नवम्बर 2019 निकाली गई। यह यात्रा रीवा, पन्ना, सतना, उमरिया, निवाड़, शिवपुरी, झाबुआ, शहडोल, विदिशा, खंडवा, बडवानी, खरगोन, मंडला, जबलपुर, बैतूल, शाजापुर,  छतरपुर एवं भोपाल जिले में इस जनयात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा के माध्यम से बच्चों में कुपोषण को पूरी तरह से खत्म करने के लिए समुदाय से साथ विभिन्न पहुलओं जिसमे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जेंडर जैसे मुद्दों पर चर्चा एवं संवाद किया गया। यात्रा के दौरान समुदाय ने कुपोषण को खत्म करने के लिए आंगनवाड़ी एवं मध्यान्ह भोजन में अंडा एवं फल के वितरण, मातृत्व हक को दो बच्चों तक लागू करने का व्यापक समर्थन दिया है।

यात्रा के बारे में भोजन का अधिकार अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मालवीय बताते हैं कि इस यात्रा का उद्देश्य मध्यप्रदेश के कुपोषण से प्रभावित आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना था। राकेश बताते हैं कि मध्यप्रदेश के इन इलाकों में निवासरत अधिकांश लोग मांसाहार करते हैं उन्होंने अंडे में मौजूद सम्पूर्ण पोषण के बारे में जानकर सरकार के फैसले का समर्थन किया।