Governance

सतत विकास लक्ष्य कार्यक्रम पर कैग ने खड़े किए सवाल

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र के साथ-साथ राज्यों में एसडीजी को लेकर गंभीरता नहीं दिख रही है 

 
By Himanshu Upadhyaya
Last Updated: Monday 08 July 2019
Photo: Prashant Ravi
Photo: Prashant Ravi Photo: Prashant Ravi

सोमवार को संसद के सदन में रखी गई भारत के नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट में कहा गया है कि सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को हासिल करने के लिए भारत सरकार की अधूरी हैं। कैग ने 17 केंद्रीय मंत्रालयों जिसमें नीति आयोग भी शामिल हैं की गतिविधियों का अध्ययन करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। कैग ने सात राज्यों का भी अध्ययन किया है, इनमें आसाम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

कैग ने कहा है कि 2030 तक एसडीजी के लक्ष्य हासिल करने हैं, लेकिन सरकार के बजटीय प्रावधानों में इसको लेकर कोई साफ तस्वीर नहीं दिखती। केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राज्य सरकारों ने अब तक अपने बजटों में एसडीजी के लक्ष्य हासिल करने के लिए वित्तीय संसाधनों का जिक्र नहीं किया है।

कैग ने केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा एसडीजी को हासिल करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की है और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैँ। कैग के ऑडिटर्स ने एसडीजी के तीसरे लक्ष्य (अच्छी सेहत और तंदुरुस्ती) का विस्तृत तौर पर निरीक्षण किया है।

कैग ने कई तरह की कमियां भी पाई हैं। खासकर 2030 तक के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2020 एवं 2025 के लक्ष्य पहले से तय किए जाने चाहिए थे, जिनका अभाव है।

कैग का कहना है कि इतने बड़े मिशन का अब तक कोई विजन डॉक्यूमेंट तैयार नहीं हुआ है और राज्यों ने पॉलिसी डॉक्यूमेंट तक तैयार नहीं किए हैं। कैग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्य में अलग अलग विभागों को संस्थागत मजबूती देनी चाहिए और उनकी जिम्मेवारी व भूमिकाएं निर्धारित कर देनी चाहिए।

कैग ने केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि यह मंत्रालय अब तक सतत विकास लक्ष्यों का राष्ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क तक तैयार नहीं कर पाया है, जिसकी वजह से एसडीजी के लक्ष्यों की स्थिति क्या है, इसका पूरी तरह से पता नहीं चल पा रहा है। कैग ने कहा कि 306 संकेतकों में से 137 संकेतकों के आंकड़े उपलब्ध ही नहीं हैं।  

कैग ने अपनी रिपोर्ट में एक बड़ा पहलू उजागर करते हुए कहा है कि एसडीजी कार्यक्रम में तीन महत्वपूर्ण मंत्रालय आयुष, गृह मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय को शामिल नहीं किया गया है। साथ ही, कहा गया है कि कई स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों को भी पब्लिक डोमेन में नहीं डाला जा रहा है।

कैग ने सरकार से कहा है कि एसडीजी का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का बजट आवंटन बढ़ाना चाहिए। ऑडिट में कहा गया है कि 2019-20 के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्र का आवंटन लक्ष्य से काफी कम है। इसी तरह राज्यों में कुल खर्च का केवल 3.29 फीसदी से लेकर 5.32 फीसदी ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रावधान किया गया है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है।

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