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जलवायु परिवर्तन की वजह से फैलने वाले संक्रामक रोगों से अनजान हैं 50 फीसदी लोग : शोध

एक बहुराष्ट्रीय सर्वेक्षण में शामिल 64.6 फीसदी प्रतिभागियों ने संक्रामक बीमारी से डरने की बात कही

By Dayanidhi

On: Thursday 26 November 2020
 
Spread of infectious diseases due to climate change

जलवायु परिवर्तन के कारण नई-नई संक्रामक बीमारियां उभरती हैं। एक नए अध्ययन जिसमें बताया गया है कि सर्वेक्षण में शामिल आबादी में से 48.9 फीसदी को जलवायु परिवर्तन और संक्रामक बीमारियों के संबंध के बारे में जानकारी नहीं है।

कुछ विशेष संक्रामक रोग जलवायु और पर्यावरण संबंधी विसंगतियों से फैलते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण संक्रामक प्रकोपों में वृद्धि देखी जा सकती है, जलवायु परिवर्तन, जैसे अल-नीनो, सूखा, बाढ़, चक्रवात, कई वायरस और रोगजनकों की उपस्थिति, घनत्व, शक्ति, गतिशीलता और इनके फैलने के तरीकों को बदल रहे हैं।

यह समझना कि जलवायु परिवर्तनशीलता इन रोगों को फैलाने में किस तरह की भूमिका निभाता हैं, यह शोधकर्ताओं और आम जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए बहुत कुछ किया गया है, लेकिन अभी भी ऐसा लगता है कि जलवायु परिवर्तन के संक्रामक रोगों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी का व्यापक अभाव है।

पीएलओएस वन में प्रकाशित एक अध्ययन जिसे यूनिवर्सिटी डी डे टूर्स, यूएबी और हनोवर मेडिकल स्कूल के छात्रों द्वारा किया गया है।

यह शोध एक बहुराष्ट्रीय सर्वेक्षण पर आधारित था, जिसमें दुनिया भर के कुल 458 प्रतिभागियों का जलवायु परिवर्तन के संक्रामक रोगों के प्रभाव पर उनके जानकारी का आकलन किया गया।

सामान्य जनता में जानकारी का अभाव था और राष्ट्रीयता और शैक्षिक पृष्ठभूमि के अनुसार यह अलग-अलग थी। कुल 48.9 फीसदी प्रतिभागियों ने संक्रामक रोगों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में पहले कभी नहीं सोचा। जिन लोगों में प्राकृतिक विज्ञान की अधिक जानकारी थी उनमें 38.4 फीसदी लोग शामिल थे।

जो लोग विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में काम नहीं करते हैं उनमें 59.2 फीसदी लोग शामिल थे। इस अंतर के बावजूद, सर्वेक्षण ने यह भी दिखाया कि जलवायु परिवर्तन का ज्ञान और जागरूकता प्रतिभागियों के शैक्षिक स्तर से संबंधित नहीं है। फिर भी पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण से संबंधित विषयों की जानकारी अत्यधिक तीव्र गति से फैली है।

64.6 फीसदी प्रतिभागी जो कि एक बड़ा हिस्सा है, उन्होंने संक्रामक बीमारी से डरने की बात कही, वहीं यूरोप में 51.7 फीसदी प्रतिभागियों को उनके अमेरिका (71.4 फीसदी) और एशियाई (87.7 फीसदी ) समकक्षों की तुलना में डर कम था। सुरक्षा उपायों के संबंध में 70.5 फीसदी प्रतिभागी उष्णकटिबंधीय देश की यात्रा करने से पहले टीकों को लगाने की आवश्यकता के बारे में सुझाव देते हैं।

इसके अनुसार सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक 56.1 फीसदी उष्णकटिबंधीय देश में संक्रामक बीमारी से निपटने से डरते थे, हालांकि राष्ट्रीयता के अनुसार मतभेद पाए गए थे। इस मामले में यूरोपीय 72 फीसदी प्रतिभागियों को अधिक डर था, जबकि अमेरिका 41.3 फीसदी और एशियाई प्रतिभागियों की तुलना में 37.7 फीसदी था।

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि ये आंकड़े बेहतर उपाय करने में मदद कर सकते हैं जो 'एक स्वास्थ्य' की अवधारणा के तहत जलवायु परिवर्तन और संक्रामक रोगों से संबंधित मुद्दों पर जनता के बीच जागरूकता बढ़ा सकते हैं।