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इस साल मॉनसून ने बदली अपनी चाल, जानें कहां कितनी अधिक हुई बारिश

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वालों ने इस साल कम बारिश की आशंका जाहिर की थी क्योंकि मॉनसून देरी से आया और इसकी प्रगति भी धीमी थी। लेकिन बाद में हालात बदल गए और पूर्वानुमान गलत साबित हो गए। जानें, यह कैसे हुआ

By DTE Staff

On: Tuesday 05 November 2019
 

इस साल मॉनसून ने 8-9 जून को भारत में दस्तक दी तो मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले वैज्ञानिकों ने अंदेशा जाहिर किया कि मॉनसून की बारिश कम होगी। इसके पीछे वजह थी मॉनसून की सुस्त चाल। आमतौर पर 1 जून को आने वाला मॉनसून करीब 10 दिन की देरी से केरल पहुंचा और बेहद धीमी गति से आगे बढ़ा। मॉनसून सामान्यत: 5 जून को गोवा पहुंचता है लेकिन इस बार 15 दिन की देरी से पहुंचा। मॉनसून का इतनी देर से पहुंचना सामान्य घटना नहीं है। इससे भी असामान्य है मॉनसून की विदाई में रिकॉर्ड देरी। इसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि राजस्थान में 30 सितंबर को मॉनसून विदाई होती है लेकिन इस साल 40 दिन की देरी से यह विदा हुआ।

मॉनसून की शुरुआत से विदाई तक भारत में बहुत कुछ असामान्य हुआ। इसमें सबसे गौर करने वाली है अप्रत्याशित बारिश का होना। इस साल मॉनसून के दौरान 1,250 बार भारी बारिश हुई। एक जिले में 124.4 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने की घटना को भारी बारिश कहा जाता है। इस बारिश से कई राज्यों में बाढ़ आ गई और जानमाल को भारी नुकसान पहुंचा। इस साल मध्य प्रदेश में सामान्य से 44 प्रतिशत, गुजरात में 43 प्रतिशत, राजस्थान में 40, महाराष्ट्र में 32 और कर्नाटक में 23 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। दादरा एवं नगर हवेली में सामान्य से 68 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में सामान्य से 35 प्रतिशत, जम्मू एवं कश्मीर में 21 प्रतिशत, उत्तराखंड और झारखंड में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। मिजोरम में जो सामान्य से 56 प्रतिशत कम बारिश हुई। मॉनसून में बारिश का असामान्य वितरण “न्यू नॉर्मल” बन चुका है। कम दिनों में अधिक बारिश की प्रवृत्ति सामान्य हो चुकी है। उदाहरण के लिए, राजस्थान में जुलाई के पहले हफ्ते में 152 प्रतिशत अधिक बारिश हो गई।

इसी तरह कर्नाटक में केवल 8 अगस्त को सामान्य से 5 गुणा अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे 12 जिलों में बाढ़ आ गई। मॉनसून में बदलाव कृषि के चक्र को भी बाधित कर रहा है। बारिश देर तक होने से रबी के फसल चक्र लंबा खिंच रहा है।

स्रोत: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, आंकड़े 3 अक्टूबर 2019 तक