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वैश्विक जलवायु में हो रहे बदलाव के चलते लगातार बढ़ रहे है तूफान

शोधकर्ताओं के मुताबिक तूफानों में धीरे-धीरे बदलाव आया, पहले यह कमजोर हुआ करते थे, बाद में जलवायु में बदलाव के चलते इनका भी स्वरूप बदल गया, ये बार-बार आने के साथ अधिक खतरनाक होने लगे

By Dayanidhi

On: Wednesday 23 June 2021
 
वैश्विक जलवायु में हो रहे बदलाव के चलते लगातार बढ़ रहे है तूफान
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के चलते तूफानों में लगातार वृद्धि हो रही है। हाल के वर्षों में तूफानों के बार-बार आने की घटानाओं के साथ इनकी तीव्रता में भी बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर एशिया और अमेरिका में दक्षिण के बड़े मैदान कहे जाने वाले इलाकों में आने वाले तूफान, पृथ्वी पर सबसे तेज तूफानों में से एक हैं। एक नए शोध से पता चलता है कि बार-बार तूफान आने तथा उनमें आ रहे बदलावों के पीछे जलवायु परिवर्तन जिम्मेवार है।

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इलाके में वर्षा की जानकारी के लिए रडार का उपयोग किया। पिछले तूफानों और उनके आने के समय के रुझानों को समझने के लिए टेक्सास की गुफाओं से 30 से 50 हजार साल पुराने स्टैलेक्टाइट्स से ऑक्सीजन आइसोटोप का विश्लेषण किया। यहां बताते चले कि स्टैलेक्टाइट्स - चूने से बना कार्बोनेट होता है जो पुरानी गुफाओं की छत पर जम जाता है।

उन्होंने पाया कि हजारों सालों से आर रहे तूफानों में धीरे-धीरे बदलाव आया, पहले यह कमजोर हुआ करते थे, बाद में इनका स्वरूप बदल गया, ये अधिक खतरनाक होने लगे। हिमयुग के दौरान अचानक दुनिया की जलवायु में बदलाव आया, जो लगभग 120,000 साल पहले हुआ था, तभी से इनकी भी शुरुआत हुई।

आज के समय के संयुक्त (सिनॉप्टिक) विश्लेषण के माध्यम से, शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि दक्षिणी मैदानों में तूफान आने के साथ बहुत तेजी से चलने वाली हवाओं और नमी के पैटर्न में भी बदलाव आया। इन एक दूसरे से जुड़े परिवर्तनों को समझने से न केवल पिछले तूफानों की घटनाओं के सार को फिर से बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में मध्य-अक्षांश में आने वाले तूफानों के पैटर्न के बारे में पूर्वानुमान लगाने में भी मदद मिलेगी।

मौपिन ने बताया कि गुफाओं के भीतर दक्षिणी मैदानों में आए तूफानों के विभिन्न प्रकार के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। दक्षिणी मैदानों और दक्षिणी टेक्सास में शायद हजारों गुफाएं हैं। उन क्षेत्रों में अधिक शोध करने की जरुरत है। शूमाकर ने कहा कि वैज्ञानिक आजकल होने वाली वर्षा के पैटर्न को समझते हैं और ये बड़े तूफानों के समस्थानिकों अथवा एक तरह के सबूत को मिटा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि भविष्य में क्या होगा, इतना जरूर है कि यह अध्ययन भविष्य में तूफानों के रुझानों के बारे में पूर्वानुमान लगाने में मदद करेगा। अगर हम बीते समय के लिए एक जलवायु मॉडल चला सकते हैं जो गुफा के रिकॉर्ड के अनुरूप हो और आगे बढ़ते हुए उसी मॉडल को चलाएं, हम इसके निष्कर्षों पर अधिक भरोसा कर सकते हैं।

दो मॉडलों में से, यदि कोई वास्तव में गुफा के समस्थानिकों से मेल खाता है तो आप भविष्य में तूफान आने के बारे में पूर्वानुमान लगाने को लेकर उस पर भरोसा कर सकते हैं।

मौपिन जो कि एक जीवाश्म विज्ञानी हैं उन्होंने समय के आधार पर मौसम की घटनाओं के सही वितरण का पता लगाने में मौजूद सीमाओं का वर्णन किया। मौपिन ने कहा मौसम की बड़ी घटनाओं के बारे में अतीत में क्या हुआ था, इस बारे में जानना वास्तव में महत्वपूर्ण है। जो हमें बड़े तूफानों बनाम छोटे तूफानों की जानकारी दे सकता है।

बड़े तूफानों से बहुत अधिक वर्षा होती है और मॉडल ग्रिड बड़े मौसम की घटनाओं को कैप्चर नहीं कर सकते हैं, क्योंकि ग्रिड स्वयं इतने बड़े हैं। पेलियोक्लाइमेटोलॉजी पिछली घटनाओं को व्यवस्थित करने में मदद करती है ताकि वे इस बात के सबूतों के रिकॉर्ड विकसित कर सकें कि वे सामान्य जलवायु में किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं। यह अध्ययन नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित हुआ है।

मौपिन ने यूरेनियम थोरियम काल का पता (डेटिंग) करने के लिए ताइवान के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के साथ सहयोग किया और पाया कि स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स वास्तव में हिमयुग के आसपास के थे। शूमाकर ने कहा सैकड़ों मील की दूरी तय करने वाले बड़े तूफान टेक्सास में लगभग 50 से 80 फीसदी बारिश करते हैं।

आज के समय में, इन तूफानों में अलग-अलग आइसोटोप या एक तरह के सबूत होते हैं। मौपिन ने कहा कि गुफाओं के नमूनों का उपयोग टेक्सास पेलियोक्लाइमेट को समझने तथा इनके प्रभाव को जानने के लिए एक उपकरण के रूप में किया गया था।