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फिर सामने आए जलवायु परिवर्तन के सबूत, इतिहास का पांचवा सबसे गर्म जून किया गया रिकॉर्ड

इस वर्ष जून का वैश्विक औसत तापमान 20 वीं सदी के औसत तापमान से 0.88 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है   

By Lalit Maurya

On: Tuesday 20 July 2021
 

जून 2021 इतिहास का पांचवा सबसे गर्म जून था। यह जानकारी एनओएए के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन द्वारा जारी रिपोर्ट में सामने आई है।  यही नहीं इस साल के पहले छह महीनों  में रिकॉर्ड किया गया तापमान उसे अब तक के सबसे 10 गर्म वर्षों में से एक बनाता है। एनओएए के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जून का वैश्विक औसत तापमान 20 वीं सदी के औसत से 0.88 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है जो उसे  पिछले 142 वर्षों के इतिहास का पांचवा सबसे गर्म जून बनाता है। गौरतलब है कि 20वीं सदी का औसत तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।

यह जो तापमान दर्ज किया गया है उसमें भूमि और महासागर दोनों के तापमान में हो रही वृद्धि को सम्मिलित किया गया है। वहीं यदि सिर्फ भूमि के तापमान में आ रही वृद्धि को देखें तो वो 20 वीं सदी के औसत से 1.42 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जो अब तक जून महीने में भूमि की सतह पर रिकॉर्ड किया गया अब तक का सबसे ज्यादा तापमान था। जिसकी सबसे बड़ी वजह उत्तरी गोलार्ध में जून के दौरान भूमि पर पाया गया उच्च तापमान था। 

इस बार अमेरिका और कनाडा में जिस तरह गर्मी और लू ने अपना कहर बरसाया है उसके चलते उत्तरी अमेरिका में यह अब तक का सबसे गर्म जून था। इसी तरह यदि अफ्रीका में तापमान से जुड़े आंकड़ों को देखें तो इस साल अफ्रीका में जून का महीना इतिहास का सबसे गर्म जून था। 1909 से लेकर अब तक दर्ज तापमान के आधार पर न्यूज़ीलैंड में भी यह अब तक का सबसे गर्म जून था।

इसी तरह यूरोप में भी यह रिकॉर्ड का दूसरा सबसे गर्म जून है वहीं कई यूरोपियन देशों में यह रिकॉर्ड के पांच सबसे गर्म जून के महीनों में से एक है। एशिया में जून 2021 का तापमान 2010 के साथ सम्मिलित रूप से दूसरा सबसे गर्म जून था।      

अब तक दर्ज तापमान के अनुसार इतिहास का 8वां सबसे गर्म वर्ष है 2021

वहीं यदि 2021 के पहले छह महीनों के तापमान की बात करें तो वो इस वर्ष को इतिहास का अब तक का आठवां सबसे गर्म वर्ष बनाता है। जब तापमान 20 वीं सदी के औसत तापमान (13.5 डिग्री सेल्सियस) से 0.79 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। 

वहीं अफ्रीका में पिछले छह महीनों में दर्ज किया गया औसत तापमान उसे अब तक तीसरा सबसे गर्म वर्ष बनाता है। इससे पहले 2010 और 2016 में तापमान इतना ज्यादा था।  वहीं दक्षिण अमेरिका में अब तक दर्ज तापमान उसे इतिहास का दसवां सबसे गर्म वर्ष बनता है, जोकि 2013 के बराबर है। यदि उत्तरी अमेरिका के तापमान में हो रही वृद्धि को देखें तो वो इतनी ज्यादा थी कि वो इसे 11 वां सबसे गर्म साल बनाता है, वहां तापमान में हो रही वृद्धि 1999 के बराबर ही है। 

वैश्विक स्तर पर देखें तो इस वर्ष जून के महीने में 9 उष्णकटिबंधीय चक्रवात आए थे। वहीं अटलांटिक में जून 2021 के अंत तक चार तूफान दर्ज किए गए थे, जो  2012, 2016 और 2020 के साथ उसे भी जनवरी से जून के बीच आए सबसे ज्यादा अटलांटिक तूफानों वाला वर्ष बनाता है। 

यदि आर्कटिक महासागर में जमा समुद्री बर्फ की बात करें तो जून 2021 में उसका औसत विस्तार 41.4 लाख वर्ग मील था, जोकि 1981 से 2010 के औसत विस्तार से करीब 4.05 लाख वर्ग मील कम है। नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर द्वारा किए विश्लेषण के अनुसार, जून के महीने में आर्कटिक में बर्फ का यह विस्तार 43 वर्षों के इतिहास में छठा सबसे छोटा विस्तार है।