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ट्रंप को पर्यावरणविद के तौर पर कितना स्वीकार करेंगे अमेरिकी मतदाता

नौ नवंबर को अमेरिकी चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इस चुनाव ने ट्रंप को जरूर यू-टर्न लेने के लिए मजबूर कर दिया है

By Anil Ashwani Sharma

On: Saturday 24 October 2020
 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo: wikimedia commons
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo: wikimedia commons अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo: wikimedia commons

आगामी तीन नवंबर, 2020 को अमेरिका में आम चुनाव होने जा रहे हैं। अब बमुश्किल से एक हफ्ता बचा है। इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार पर्यावरण एक बड़ा मुद्दा बन कर अमेरिकी मतदाताओं पर छा गया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चार सालों से पर्यावरणविदों की नजर में पर्यावरण के घोर विरोधी डोनाल्ड ट्रंप भी अब वोट पाने की खातिर अपने को पर्यावरणविद सिद्ध करने पर उतारू हैं। 

अमेरिका के कई महत्वपूर्ण राज्यों में खुद को मतदाताओं तक पहुंचाने के प्रयास में ट्रंप खुद को पर्यावरण के अनुकूल राष्ट्रपति के रूप में चित्रित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। फिर भले ही उनके प्रशासन ने दर्जनों प्रदूषण-विरोधी नियमों को वापस लेने की मांग की हो। यह घोषणा उनके राष्ट्रपति पद के सबसे बड़े नीतिगत परिवर्तनों में से एक है।

ट्रंप के इस बदलते चुनावी पैंतरे को उनके प्रतिद्वंदी जो बिडेन पर जोरदार हमले के रूप में देखा जा रहा है। ध्यान रहे कि अब तक हुए तमाम सर्वेक्षणों में देखा जा रहा है कि बिडेन आगे चल रहे हैं क्योंकि मतदाताओं के बीच जलवायु परिवर्तन के बारे में चिंता बनी हुई है, विशेषकर अमेरिकी युवाओं पर। वाशिंगटन पोस्ट में छपी रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप अभियान के प्रवक्ता कर्टनी परेला ने कहा कि जो बिडेन कट्टरपंथी वामपंथियों को खुश करने के लिए ऊर्जा सेक्टर में कार्य कर रहे लाखों अमेरिकियों की नौकरियों को दांव पर लगाने को तैयार हैं, जबकि दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप और उनका प्रशासन ऊर्जा सेक्टर की स्वतंत्रता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य दोनों को बढ़ावा दे रहे हैं।

यह ध्यान देने की बात है कि ट्रंप के आलोचकों ने पिछले चार वर्ष यह कहते हुए बिताया है कि अमेरिकी इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति का यह सबसे खराब पर्यावरणीय रिकॉर्ड में से एक है। ट्रंप के आलोचक कहते हैं कि अब इन मुद्दों से संबंधित मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बहुत देर हो चुकी है।

हालांकि इस हफ्ते ट्रंप ने पानी की गुणवत्ता और प्रबंधन में सुधार करने के लिए एक नई कमेटी बनाई है और एक अरब पेड़ लगाने की योजना है, ताकि कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम किया जा सके। ट्रंप अपने चुनावी प्रचार में एक खास मतदाता यानी युवा वर्ग को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। कारण कि यह वर्ग जलवायु परिवर्तन को एक संकट के रूप में देख रहा है। वाशिंगटन पोस्ट और कैंसर फैमिली फाउंडेशन द्वारा पिछले साल किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार डेमोक्रेट और निर्दलीय तो इससे सहमत हैं ही, साथ ही 60 प्रतिशत रिपब्लिकन समर्थकों ने भी इस बात से सहमति जताई है।

अभी तक कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों से ग्रीनहाउस गैस प्रदूषण पर लगाम लगाने के ओबामा दौर के प्रयासों को ट्रंप की पार्टी ने पर्यावरण विरोधी कदम करार दिया था। यह गर्मियों के सर्वेक्षण में शामिल पार्टियों के बीच डेमोक्रेट्स की सबसे बड़ी बढ़त है। हालांकि कुछ पर्यावरणीय मुद्दों पर ट्रंप ने मतदाताओं को अपनी ओर प्रभावित करने की हर चंद कोशिश अवश्य की है लेकिन इसके बावजूद अब तक ट्रंप अमेरिकी मतदाताओं को एक स्थिर संदेश में असमर्थ रहे हैं, जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उन सभी में से एक है।

29 सितंबर, 2020 के दौरान हुई राष्ट्रपति बहस में उन्होंने यह स्वीकार करने के लिए बड़ी मुश्किल से यह इच्छा दिखाई कि मनुष्य “एक हद तक” पर्यावरणीय समस्या में योगदान दे रहा है। लेकिन दो हफ्ते पहले, उन्होंने कैलिफोर्निया के अधिकारियों के साथ एक ब्रीफिंग के दौरान बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाओं के बीच किसी भी लिंक को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार ट्रंप का इस तरह के असमंज भरे हुए संदशों के चलते उन्हें अपने कार्यों को प्रचारित करना और भी कठिन हो होते जा है। और दूसरी ओर जो बिडेन लगातार जलवायु परिवर्तन को एक “अस्तित्ववादी खतरा” करार दे रहे हैं और उत्सर्जन को कम करने और इसके प्रभावों को कम करने के लिए आगामी चार वर्षों में 2 अरब डॉलर खर्च करने की बात कर रहे हैं।  लेकिन यह मुद्दा दृष्टिकोण को भी प्रेरित करता है।

उदाहरण के लिए ट्रंप के कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाने का एक ही उद्देश्य है कार्बन कम करना। ऐसे में यह सीधे तौर पर यह उल्लेख होता नहीं दिखता कि ऐसी कार्रवाई समस्या को कम करने के लिए है या उसे जड़ से खत्म करने के लिए है। अपने पहले वर्ष के दौरान ट्रंप के व्हाइट हाउस में एक जलवायु सलाहकार के रूप में कार्य करने वाले जॉर्ज डेविड बैंक्स कहते हैं कि वास्वत में राष्ट्रपति के पास जलवायु परिवर्तन पर गहरी वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं है। वे इस आधार पर जलवायु परिवर्तन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक रूप से इसमें लाभ नहीं देखते। बैंक्स ने कहा, किसी भी रिपब्लिकन नेता के लिए मतदाताओं के दिमाग को राजनीतिक रूप से तोड़ना मुश्किल है जो सबसे पहले पर्यावरण को तरजीह दे रहे हैं। 

ध्यान रहे कि ट्रंप ने अगस्त में एक प्रमुख पर्यावरण बिल पर हस्ताक्षर, ग्रेट अमेरिकन आउटडोर एक्ट किए थे, जो 1960 के दशक के बाद पहली बार भूमि और जल संरक्षण कोष को पूरी तरह से फंड देगा कुछ हद तक रिपब्लिकन सीनेटरों की मदद करने के लिए ही डिजाइन किया गया था।

हार्वर्ड टी.एच. की वैज्ञानिक रॉनी लेविन ने कहा, “ईपीए ने बहुत कम काम किया है।” चुनाव के एक हफ्ते पहले तक बता पाना मुश्किल है की ट्रंप इस मामले में ऐतिहासिक रूप से कितनी दूर तक जाते हैं। कुल मिलाकर रिपब्लिकन के लिए अपनी चुनावी समर के दौर में पर्यावरणीय मुद्दों पर पार पाना दिन ब दिन और कठिन होते जा रहा है। हालांकि दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर निकिता सुसान मैकमैनस ने कहा कि ट्रंप का अपने नए पर्यावरणीय अवतार के चलते पहले के मुकाबले कुछ बेहतर स्थिति में हैं।

अमेरिका में एक ही ऐसी जगह हैं जहां रिपब्लिकन के उम्मीदवार ट्रंप पर्यावरण के मुद्दों को लेकर जीतने में सक्षम हैं और स्थान है फ्लोरिडा।  इस संबंध में मैकमेनस ने कहा कि राज्य की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच “बहुत मजबूत संबंध” है। फ्लोरिडा की अर्थव्यवस्था तटीय क्षेत्रों पर पूरी तरह से निर्भर है,चाहे वह पर्यटन हो या मछली पकड़ने से संबंधित हो।