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ग्रीनलैंड में ज्यादा तेजी से पिघल रही है बर्फ, सदी के अंत तक 18 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा समुद्र का जलस्तर

सदी के अंत तक ग्रीनलैंड में इतनी बर्फ पिघल जाएगी, जिससे समुद्र का जल स्तर 18 सेंटीमीटर तक बढ़ जाएगा| पहले इसके 10 सेंटीमीटर बढ़ने का अनुमान था

By Lalit Maurya

On: Thursday 17 December 2020
 

यूनिवर्सिटी ऑफ लीज द्वारा किए शोध से पता चला है कि ग्रीनलैंड में बर्फ अनुमान से कहीं ज्यादा तेजी से पिघल रही है। पता चला है कि जिस तेजी से वातवरण गर्म हो रहा है उसके चलते इस सदी के अंत तक ग्रीनलैंड में इतनी बर्फ पिघल जाएगी जिससे समुद्र का जल स्तर 18 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा। इससे पहले इसके 10 सेंटीमीटर बढ़ने का अनुमान था। यह गणना लीज यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित एमएआर मॉडल पर आधारित है। इसके अनुसार पिछली आईपीसीसी रिपोर्ट (एआर5 2013) में की गई गणना की तुलना में नए शोध में ग्रीनलैंड की सतह के 60 फीसदी अधिक पिघलने का अनुमान लगाया गया है। यह शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित हुआ है।

यदि ग्रीनलैंड में जमी बर्फ की चादर की बात करें तो वह दुनिया में अंटार्कटिक के बाद दूसरी सबसे बड़ी है। यह बर्फ करीब 17 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। अनुमान है कि यदि यह सारी बर्फ पिघल जाए तो इससे समुद्र का जल स्तर 7.2 मीटर तक बढ़ सकता है।

कितनी तेजी से पिघल रही है ग्रीनलैंड में बर्फ

यदि नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो उनके अनुसार 2002 के बाद पहली बार इतने बड़े क्षेत्र में बर्फ का पिघलना रिकॉर्ड किया गया है। 70 फीसदी बर्फ में पिघलने के निशान मिले हैं। जहां 31 अक्टूबर 2020 को ग्रीनलैंड में 2.31 करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बर्फ का पिघलना दर्ज किया था। यह क्षेत्र 1981-2010 के औसत 2.2 करोड़ वर्ग किलोमीटर से थोड़ा ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार ग्रीनलैंड के उत्तरपूर्वी क्षेत्र में बर्फ ज्यादा तेजी से पिघल रही है। वहां बर्फ पिघलने के औसत समय में 25 दिनों का इजाफा हुआ है। जबकि इसी तरह दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में 10 से 20 अतिरिक्त दिन में बर्फ पिघलने के निशान मिले हैं। गौरतलब है कि 2020 में 10 जुलाई को ग्रीनलैंड में सबसे ज्यादा बर्फ पिघली थी। जब 551,000 वर्ग किलोमीटर (34 फीसदी) क्षेत्र में बर्फ पिघल गई थी।

क्या है इसके पीछे की वजह

इस शोध में समुद्र जलस्तर के बढ़ने और ग्रीनलैंड बर्फ के पिघलने की गणना लीज यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित एमएआर मॉडल पर आधारित है। जिसके अनुसार समुद्र के जल स्तर में करीब 18 सेंटीमीटर की वृद्धि हो जाएगी। नए क्लाइमेट मॉडल सीएमआईपी6 के अनुसार यदि उत्सर्जन में कम वृद्धि होती है तो समुद्र के जलस्तर में 2.6 सेंटीमीटर की वृद्धि होगी। जबकि माध्यम उत्सर्जन के परिदृश्य में 2.8 सेंटीमीटर और उच्च उत्सर्जन परिदृश्य में 5 सेंटीमीटर की वृद्धि होगी।

क्लाइमेट मॉडल सीएमआईपी6 के अनुसार 21वीं सदी में तापमान कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणामस्वरूप सदी के अंत तक पुराने मॉडल (सीएमआईपी 5) की तुलना में बर्फ पिघलने के समय में 22 दिनों का इजाफा हो जाएगा।    

शोधकर्ताओं के अनुसार यह पहला मौका है जब एमएआर मॉडल से पता चला है कि गर्मियों में आर्कटिक के गर्म होने के साथ ग्रीनलैंड में बर्फ का पिघलना बढ़ जाएगा। उच्च उत्सर्जन परिदृश्य में सीएमआईपी6 मॉडल के अनुसार सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि सीएमआईपी5 की तुलना में 0.6 डिग्री सेल्सियस अधिक होगी।

शोध के अनुसार तापमान की यह वृद्धि आर्कटिक में कहीं ज्यादा स्पष्ट दिखेगी, जब सीएमआईपी6 मॉडल के अंतर्गत सीएमआईपी5 की तुलना में तापमान की वृद्धि 1.3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होगी। जिसका मतलब होगा ग्रीनलैंड में कहीं ज्यादा बर्फ पिघलेगी।