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अपने ही देशों में शरणार्थी हैं 5.08 करोड़ लोग, 2019 में भारत में 50 लाख विस्थापित

आईडीएमसी ने 2019 में संघर्ष और हिंसा के चलते दुनिया भर में विस्थापित हुए लोगों का आंकड़ा जारी किया है

By Lalit Maurya

On: Tuesday 28 April 2020
 
Courtesy: UNHCR
Courtesy: UNHCR Courtesy: UNHCR

बाढ़, सूखा, तूफान, संघर्ष और गरीबी के चलते हर साल करोड़ों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ता है| साल दर साल विस्थापितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है| 2019 के लिए जारी आंकड़ों के अनुसार संघर्ष और आपदाओं के चलते दुनिया भर के करीब 5.08 करोड़ लोग अपने ही देश में शरणार्थी बन चुके हैं| गौरतलब है कि यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है| जोकि पिछले साल की तुलना में करीब 1 करोड़ अधिक है|

हाल ही में इससे जुडी एक रिपोर्ट जेनेवा स्थित इंटरनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर (आईडीएमसी) द्वारा जारी की गयी है| जिसके अनुसार 2019 में संघर्ष और हिंसा के चलते 4.57 करोड़ लोग अपने ही देश में विस्थापित हो गए हैं| जिनमें से ज्यादातर सीरिया, कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, यमन और अफगानिस्तान में सामने आये हैं| जबकि बाढ़, सूखा जैसी आपदाओं के चलते 95 देशों में करीब 51 लाख लोग आतंरिक रूप से विस्थापित हुए हैं| गौरतलब है कि इनमे से करीब 12 लाख लोग बाढ़ और सूखे के चलते अफगानिस्तान में विस्थापित हुए हैं| जबकि भारत में मानसून के दौरान आयी बाढ़ के चलते करीब 5 लाख लोगों को अपने देश में ही शरणार्थी बनना पड़ा था| वहीँ एक दशक पहले आये भूकंप के चलते आज भी करीब 33,000 लोग शरणार्थी के रूप में रहने को मजबूर हैं|

2019 में सामने आये 3.34 करोड़ नए विस्थापित, क्या जलवायु परिवर्तन है बड़ी वजह

रिपोर्ट के अनुसार 2019 में 3.34 करोड़ नए विस्थापित सामने आये हैं जोकि 2012 के बाद से सबसे ज्यादा हैं| हैरान कर देने वाली बात यह रही की जहां संघर्ष और हिंसा के कारण ज्यादा लोग विस्थापित होते थे वहीँ 2019 में जो आंकड़ें सामने आये हैं उनके अनुसार लोगों के शरणार्थी बनने की मुख्य वजह बाढ़, सूखा और तूफान जैसी आपदाएं हैं| जो स्पष्ट तौर पर जलवायु में आ रहे परिवर्तन के खतरे को दिखाता है|

यदि नए विस्थापितों से जुड़े आंकड़ें देखें तो 2019 में करीब 2.49 करोड़ लोग आपदाओं के चलते विस्थापित हुए हैं| उनमें से भी अकेले 50 लाख लोग भारत और बांग्लादेश में आये  तूफान 'फानी' और ‘बुलबुल’ के चलते विस्थापित हुए हैं| इसके साथ ही मोजाम्बिक में आये चक्रवात ईदई और केनेथ साथ ही बहामास में आये तूफान डोरियन और अफ्रीका में आयी बाढ़  की वजह से भारी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था| जबकि हिंसा और खूनी संघर्ष के चलते सीरिया, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, बुर्किना फासो और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे देशों में करीब 85 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा था|

भारत में भी बढ़ रहा है विस्थापितों का आंकड़ा

भारत में बाढ़, सूखा, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएं विस्थापन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं| भारत में 2019 के दौरान करीब 50 लाख 18 हजार लोग आपदाओं के चलते विस्थापित हुए हैं| जोकि दुनिया भर में सबसे ज्यादा हैं| जबकि 19,000 लोग संघर्ष और हिंसा के चलते विस्थापित हुए हैं| यह स्पष्ट रूप से देश में बढ़ रही आपदाओं, आबादी एवं सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता का परिणाम हैं| देश की आज भी करीब 22 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है| यदि जलवायु से जुड़े आंकड़ों पर गौर करें तो यह साल रिकॉर्ड का सातवां सबसे गर्म साल था| जबकि 25 सालों में पहली बार इतनी ज्यादा बारिश हुई है| जो स्पष्ट रूप से भारत में जलवायु परिवर्तन के खतरे को इंगित करता है| केवल इसी वर्ष में हमने 8 शक्तिशाली चक्रवाती तूफानों का सामना किया था| यही वजह रही कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों को छोड़ शरणार्थी बनना पड़ा| हाल ही में आये तूफान फानी के चलते भारत और बांग्लादेश में करीब 35 लाख लोग विस्थापित हुए थे| जबकि चक्रवात बुलबुल के चलते करीब 21 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था|

आईडीएमसी की निदेशक एलेक्जेंड्रा बिलाक का मानना है कि 2020 में कोरोनावायरस के चलते यह आंकड़ा और बढ़ सकता है| हालांकि उनका कहना है कि इसके बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा| पर एक बात तो स्पष्ट है कि शरणार्थी के रूप में रह रहे लोगों पर इस बीमारी की मार और गंभीर असर करने वाली है| जिससे निपटने के लिए तुरंत कार्यवाही करने की जरुरत है| जिससे उन्हें बचाया जा सके| उनके अनुसार साल दर साल संघर्ष, हिंसा और आपदाएं लाखों लोगों के घरों को उजाड़ देती हैं| पर जितने लोग 2019 में आतंरिक रूप से विस्थापित हुए हैं उतने पहले कभी नहीं हुए।