संसद में आज (31 मार्च 2022): कम हो रही है हिमालय में बर्फबारी

देश में विभिन्न स्तरों पर राज्य, जिला, उप-मंडल और ब्लॉक स्तर पर 2,022 पेयजल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं।

By Madhumita Paul, Dayanidhi

On: Thursday 31 March 2022
 
संसद में आज (31 मार्च 2022): कम हो रही है हिमालय में बर्फबारी

हिमालय में बर्फबारी में कमी

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च के अध्ययन से पता चलता है कि पश्चिमी हिमालय के चार से अधिक ग्लेशियर बेसिन (चंद्र, भागा, मियार और पार्वती) 1979 - 2018 के दौरान बर्फबारी की समग्र घटती प्रवृत्ति दिखाते हैं। हालांकि यह प्रवृत्ति एक जैसी नहीं है, (सर्दियों) के मौसम के दौरान बारिश में कमी (गर्मी) के मौसम (15.4 फीसदी) की तुलना में अधिक (23.9 फीसदी) कम होती है।

इसके अलावा, अध्ययनों से पता चलता है कि बर्फबारी कम हो रही है, विशेष रूप से अधिकतम महीनों के दौरान इन ग्लेशियर बेसिनों पर वर्षा बढ़ रही है, यह जानकारी आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में दी। 

हरियाणा में जल संकट

देश के डायनामिक या गतिशील भूजल संसाधनों का मूल्यांकन केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। 2020 के आकलन के अनुसार, हरियाणा में कुल 141 मूल्यांकन इकाइयों (ब्लॉकों) में से 85 ब्लॉकों को 'अति-शोषित', 12 ब्लॉकों को 'गंभीर' और 14 ब्लॉकों को 'अर्ध-संकटग्रस्त' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, यह आज जल शक्ति राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू ने लोकसभा में बताया।

नदियों में प्रदूषण का स्तर

सितंबर 2018 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा प्रकाशित अंतिम रिपोर्ट के मुताबिक जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी), जैविक प्रदूषण का एक संकेतक है, इसके आधार पर की गई निगरानी परिणामों से पता चला है कि 323 नदियों में 351 प्रदूषित हिस्सों की पहचान की गई थी। इस बात की जानकारी आज जल शक्ति राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू ने लोकसभा में बताया।

राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) ने अब तक देश के 16 राज्यों में फैले 77 शहरों में 34 नदियों पर प्रदूषित हिस्सों को कवर किया है, जिसकी परियोजना स्वीकृत लागत 6,050.18 करोड़ रुपये है और अन्य बातों के साथ-साथ 2,677 मिलियन लीटर प्रति सीवेज उपचार क्षमता भी है। टुडू ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 30,853 करोड़ रुपये की लागत से कुल 364 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें 5,024 एमएलडी के सीवेज उपचार के लिए 160 परियोजनाएं और 5,227 किलोमीटर के सीवर नेटवर्क शामिल हैं।

जल परीक्षण प्रयोगशालाएं

जैसा कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट के माध्यम से जानकारी दी गई है, आज की तारीख में, देश में विभिन्न स्तरों पर राज्य, जिला, उप-मंडल और ब्लॉक स्तर पर 2,022 पेयजल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं। इस बात की जानकारी आज जल शक्ति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने लोकसभा में दी। 

पटेल ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य में पेयजल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं के मौजूदा नेटवर्क की समीक्षा करने और राज्य में क्षेत्रीय स्तर, जिला स्तर और ब्लॉक या उप-मंडल स्तर पर अतिरिक्त प्रयोगशालाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी की स्थापना करके इसे मजबूत करने की सलाह दी गई है। 

वनवासियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में बताया कि मंत्रालय ने पारंपरिक वनवासियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की निगरानी के लिए कोई विशेष अध्ययन नहीं किया है। मंत्रालय द्वारा प्रकाशित इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले एक दशक में राष्ट्रीय स्तर पर वन क्षेत्र में कुल मिलाकर 21,762 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि देश के वनावरण में कोई कमी नहीं हो रही है।

उत्तर पूर्वी क्षेत्र में वनावरण में कमी

भारतीय वन सर्वेक्षण द्विवार्षिक रूप से  इंडिया स्टेट ऑफ़ फारेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) प्रकाशित करता है। आईएसएफआर-2021 के अनुसार पूर्वोत्तर क्षेत्र में वनावरण 4,574 वर्ग किलोमीटर है, जो आईएसएफआर-2019 में पिछले मूल्यांकन की तुलना में 365 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्शाता है।

आईएसएफआर-2021 के अनुसार, देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में कुल वनावरण 1,69,521 वर्ग किलोमीटर है, जो कुल मिलाकर 1,020 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्शाता है, जबकि 2019 में पिछले आकलन की तुलना में वृक्षों के आवरण में 365 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। इस बात की जानकारी आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में दी।

चौबे ने कहा कि उत्तर पूर्वी राज्यों में वन क्षेत्र में नुकसान मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं, मानवजनित दबाव, विकास गतिविधियों और खेती के तरीकों में बदलाव करने से हो सकता है।

ताप विद्युत संयंत्रों में ग्रिप गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी)

यह आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में बताया कि मंत्रालय ने कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) हेतु सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) के लिए 07.12.2015 को उत्सर्जन मानदंड अधिसूचित किए, जिन्हें अधिसूचना अर्थात 07.12.2017 से दो साल के भीतर लागू किया जाना था। 

तदनुसार, मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना दिनांक 31.03.2021 के माध्यम से टीपीपी के लिए 07.12.2015 को अधिसूचित एसओ2 के लिए उत्सर्जन मानदंडों के कार्यान्वयन के लिए समय सीमा बढ़ा दी है। चोबे ने कहा कि समय सीमा बढ़ाने का औचित्य पर्यावरण संबंधी विचारों पर आधारित था।

चौबे ने कहा कि केंद्रीय या निजी संस्थाओं द्वारा संचालित बीस इकाइयों ने थर्मल पावर प्लांट से ग्रिप गैस के डी-सल्फराइजेशन के लिए वेट फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) तकनीक (16) और ड्राई सॉर्बेंट इंजेक्शन (डीएसआई) तकनीक (4) स्थापित की है। हालांकि किसी भी राज्य द्वारा संचालित संयंत्र ने एफजीडी इकाइयां स्थापित नहीं की हैं।

गिर वन की वहन क्षमता

जैसा कि गुजरात सरकार द्वारा जानकारी दी गई है कि गिर और ग्रेटर गिर वन क्षेत्रों की वहन क्षमता का आकलन करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया गया है। हालांकि शेरों का घनत्व प्रति 100 वर्ग किमी का अंदाजा है। गुजरात वन विभाग द्वारा जून 2020 में आयोजित गिर परिदृश्य में एशियाई शेरों के अंतिम आबादी अनुमान के अनुसार, वन क्षेत्र में शेरों का घनत्व 15.20 प्रति 100 वर्ग किमी है, इस बात की जानकारी आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में दी।

अनौपचारिक क्षेत्र में ई-कचरा प्रबंधन

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 और 2020-21 के दौरान क्रमशः 1,64,663 टन 2,24,041 टन और 3,54,291.22 टन ई-कचरा एकत्रित और संसाधित किया गया था। यह आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में बताया।

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