Sign up for our weekly newsletter

क्या होता है जलवायु परिवर्तन? आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

बदलती जलवायु न केवल इंसानों पर असर डाल रही है इससे अन्य पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं पर भी असर पड़ रहा है

By Lalit Maurya

On: Thursday 25 March 2021
 

इन दिनों अक्सर दो शब्द 'जलवायु परिवर्तन' बहुत ज्यादा चर्चा में हैं। यह तो स्पष्ट है कि यह शब्द हमारे मौसम से जुड़े हैं तो क्या यह मौसम विज्ञानियों के चिंतन का विषय नहीं है तो आखिर क्यों एक आम इंसान को इसकी चिंता करने की जरुरत है। सच कहूं तो जी हां आज यह इस तरह से हमारे जीवन पर असर डाल रहे हैं कि यह जरुरी हो जाता है कि हम इनके बारे में समझें। आमतौर पर लोग मौसम और जलवायु को एक ही समझ लेते हैं पर ऐसा नहीं है।

आपने रोज अपनी टीवी पर समाचार में मौसम का हाल सुना होगा जो बताता है कि फलां जगह पर अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना है। क्या बारिश होने की कोई सम्भावना है या तूफान आ सकता है या ओले पड़ सकते हैं। इसका मतलब है कि किसी निर्धारित समय और स्थान पर वातावरण से जुड़ी परिस्थितियों में होने वाला परिवर्तन ही मौसम है। पर जब जलवायु की बात करतें है तो वो किसी स्थान विशेष पर पिछले कई वर्षों, दशकों में वहां के मौसम की स्थिति को बताती है। यह किसी स्थान विशेष के लिए आमतौर पर कम से कम 30 वर्षों में मौसम का औसत पैटर्न होता है।

क्या होता है जलवायु परिवर्तन?

अब जब हम यह जान गए हैं कि जलवायु क्या होती है तो हम इसमें आ रहे परिवर्तन को भी समझ लेते हैं। सामान्य शब्दों में दशकों, सदियों या उससे अधिक समय में किसी स्थान विशेष और या पूरी धरती की जलवायु में आने वाला दीर्घकालिक बदलाव ही जलवायु परिवर्तन है। उदाहरण के लिए जहां बाढ़ आती थी वहां सूखा पड़ रहा है। जब सर्दी पड़नी चाहिए थी तब गर्मी हो रही है। तापमान में बदलाव आ रहा है। यह कहें की विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों वर्षों से जो औसत तापमान बना हुआ था, वह अब बदल रहा है।

क्या है इसके पीछे की वजह?

अब बड़ा सवाल यह है कि यह जलवायु परिवर्तन क्यों हो रहा है, क्या हम इंसान इसके लिए जिम्मेवार हैं? यदि धरती पर ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत को देखें तो वो सूरज है जिससे आने वाली गर्मी और ऊर्जा को धरती ग्रहण करती है और इसकी मदद से जीवों और पेड़-पौधों को जीवन मिलता है। इस तरह सूर्य से आने वाली ऊर्जा और पृथ्वी के बीच एक संतुलन बना रहता है। इसी को ग्रीन हाउस इफेक्ट कहते हैं। पृथ्वी के वातावरण में चारों तरफ ग्रीन हाउस गैसों की एक परत होती है।  इन गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, जलवाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड आदि होती हैं। सूर्य से आने वाले ऊर्जा का कुछ भाग इन गैसों द्वारा सोख लिया जाता है और धरती के वातावरण में बना रहता है जबकि कुछ भाग वापस अंतरिक्ष में लौट जाता है। जब यह ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी के वातावरण में बढ़ती है तो वो सूर्य की किरणों का ज्यादातर भाग पृथ्वी के वातावरण में सोखने लगती हैं और इससे वापस जाने वाला भाग कम होता जाता है। इस तरह यह संतुलन बिगड़ने लगता है।

क्या होता है ग्लोबल वार्मिंग?

एक बार जब ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने लगती है तो वो ज्यादा मात्रा में सूर्य की ऊर्जा को सोखने लगती है उसके चलते वैश्विक तापमान में वृद्धि होने लगती है इसी को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। आज इसके चलते ने केवल धरती के बल्कि समुद्रों के तापमान में भी वृद्धि हो रही है।

क्या हम इंसान भी हैं इसके लिए जिम्मेवार?

जी बिलकुल, जिस तरह से हम लोग तेजी से उद्योगों, परिवहन, ऊर्जा और कृषि आदि के लिए जीवाश्म ईंधन और अन्य स्रोतों का इस्तेमाल कर रहे हैं उसके चलते बहुत ज्यादा मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में मुक्त हो रही हैं। इसी को वैज्ञानिक भाषा में उत्सर्जन कहा जाता है। साथ ही जो जंगल इन गैसों को सोखते थे उन्हें भी हम तेजी से काट रहे है इसके चलते वातावरण में यह गैसें तेजी से बढ़ रही हैं परिणामस्वरूप ऊर्जा का जो एक संतुलन बना होता था वो बिगड़ रहा है और वातावरण कहीं तेजी से गर्म हो रहा है। 


इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का बढ़ना है। आमतौर पर यह गैस तब बनती है जब हम जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला आदि को जलाते हैं। इसके अलावा अन्य हानिकारक गैसों जैसे मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन भी बढ़ा है।

क्या होंगे इसके परिणाम?

जिस तरह से वातावरण में तापमान बढ़ रहा है उसके चलते पृथ्वी पर तापमान और जलवायु का जो संतुलन है वो बिगड़ रहा है। इसके चलते जलवायु में बदलाव आ रहा है। कहीं ज्यादा बारिश हो रही है, कहीं सूखा पड़ रहा है और कहीं बाढ़ और तूफ़ान आ रहे हैं। पीने के पानी की कमी होती जा रही है। कृषि उपज प्रभावित हो रही है। जिससे अनाज की कमी हो रही है। बदलती जलवायु न केवल इंसानों पर असर डाल रही है इससे अन्य पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं पर भी असर पड़ रहा है और वो इस बदलाव को अपना नहीं पा रहे हैं जिनसे उनमें जेनेटिक बदलाव आ रहे हैं। नतीजन बीमारियां बढ़ रही हैं। हाल ही में कोरोना महामारी इसी तरह के बदलावों का ही नतीजा थी।

इससे जुड़ी अन्य जानकारी के लिए पढ़ें अगला भाग