2015 से 2021 थे इतिहास के 7 सबसे गर्म साल, पांचवे स्थान पर रहा 2021

2021 की बात करें तो वो इतिहास का पांचवा सबसे गर्म साल था। जब तापमान औसत से करीब 1.16 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया था

By Lalit Maurya

On: Tuesday 11 January 2022
 

2015 से 2021 के बीच इतिहास के सबसे गर्म सात साल दर्ज किए गए हैं। वहीं यदि सिर्फ 2021 की बात करें तो वो इतिहास का पांचवा सबसे गर्म साल था। जब तापमान 1850 से 1900 के बीच के औसत तापमान से करीब 1.16 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया था। वहीं यदि 1991 से 2020 के औसत वार्षिक तापमान से तुलना करें तो 2021 का वार्षिक औसत तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। यह जानकारी यूरोपियन यूनियन की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक न केवल 2021 इतिहास के सबसे गर्म वर्षों में से एक था। साथ ही वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन के स्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई थी। 

यदि इतिहास के सबसे गर्म वर्ष की बात करें तो 2016 काबिज है जब तापमान सामान्य से 1.32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके बाद 2020 में 1.31, 2019 में 1.28, 2017 में 1.22 डिग्री सेल्सियस, 2021 में 1.16, 2018 में 1.14 और 2015 में तापमान औसत से 1.14 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया था।

देखा जाए तो 2021 में पहले पांच महीने हाल के सबसे गर्म वर्षों को तुलना में अपेक्षाकृत रूप से कम गर्म थे। वहीं जून से अक्टूबर का मासिक तापमान इतिहास में चौथा सबसे गर्म था। वहीं यदि पिछले 30 वर्षों (1991से 2020) का तापमान औद्योगिक काल से पहले के तापमान से 0.9 डिग्री सेल्सियस अधिक था।  

2021 में यूरोप ने भी इतिहास के सबसे गर्म गर्मियों के मौसम का सामना किया था। जब तापमान 2010 और 2018 में गर्मियों के लगभग करीब ही था। यूरोप में 2021 के औसत तापमान को देखें तो वो 1991से 2020 के औसत से केवल 0.1 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। हालांकि वो 10 सबसे गर्म वर्षों में शामिल नहीं था। यूरोप के 10 सबसे गर्म साल 2000 के बाद से सामने आए हैं, जिनमें से सात सबसे गर्म वर्ष 2014 से 2020 के बीच दर्ज किए गए थे।   

यदि पिछले 30 सालों से तुलना करें तो 2021 में अमेरिका के पश्चिमी तट से कनाडा के उत्तर-पूर्वी हिस्सों, मध्य पूर्व और ग्रीनलैंड के साथ-साथ मध्य और उत्तरी अफ्रीका के बड़े हिस्से में तापमान औसत से ज्यादा था। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी और पूर्वी साइबेरिया, अलास्का, मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में वर्ष की शुरुआत और अंत में तापमान ला नीना के चलते सामान्य से कहीं ज्यादा कम था। इसी तरह अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया था।  

इस साल पूर्वोत्तर कनाडा में, वर्ष की शुरुआत और शरद ऋतु के दौरान औसत मासिक तापमान असामान्य रूप से गर्म था। वहीं जून में पश्चिमी उत्तरी अमेरिका ने असाधारण तौर पर लू का अनुभव किया था। यही वजह है कि जून में अमेरिका में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया था। जुलाई और अगस्त के दौरान अमेरिका जंगल की आग का सामना करता रहा। कैलिफोर्निया के इतिहास में दर्ज दूसरी सबसे बड़ी आग, 'डिक्सी फायर' ने न केवल वहां व्यापक तबाही मचाई थी, बल्कि साथ ही उसके चलते हुए प्रदूषण की चपेट में हजारों लोग आ गए थे।  

दावाग्नि से उत्सर्जित हुई 1850 मेगाटन कार्बन

कॉपरनिकस एटमॉस्फियर मॉनिटरिंग सर्विस (सीएएमएस) की मदद से सी3एस ने यह भी जानकारी दी है कि 2021 के दौरान ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई थी। इस साल कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) का वार्षिक औसत स्तर इतिहास के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था। इस साल सीओ2 का वार्षिक औसत स्तर करीब 414.3 पार्टस प्रति मिलियन (पीपीएम) पर पहुंच गया था। वहीं मीथेन (सीएच 4) का वार्षिक औसत स्तर लगभग 1,876 पीपीबी दर्ज किया गया था। 

इतना ही नहीं रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि दुनिया भर के जंगलों में लगने वाली आग से करीब 1,850 मेगाटन कार्बन उत्सर्जित हुई थी। जोकि पिछले साल की तुलना में करीब 100 मेगाटन ज्यादा है। इसके लिए विशेष रूप से साइबेरिया में लगने वाली आग जिम्मेवार माना गया है।  गौरतलब है कि 2020 में इसकी वजह से करीब 1,750 मेगाटन कार्बन उत्सर्जित हुई थी। हालांकि 2003 के बाद से यह प्रवृत्ति घट रही है।  

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