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जलवायु परिवर्तन की वजह से अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहा है यूरोप

यूरोप में जहां गर्म दिनों की संख्या बढ़ रही है, वहीं सर्दियों के दिन कम हो रहे हैं, जो की एक बड़े खतरे की घंटी है

By Lalit Maurya

On: Saturday 30 November 2019
 
Photo: Gettyimages

जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में छपे नए अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन के चलते यूरोप में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या बढ़ रही है। वहीं अत्यधिक ठन्डे दिनों की संख्या कम हो रही है। जो आने वाले  समय में यूरोपियनस के लिए नए खतरे पैदा कर सकता है गौरतलब है कि इस बार गर्मियों में यूरोप का तापमान रिकॉर्डऊंचाई पर पहुंच गया था । जिसका सबसे अधिक प्रभाव दक्षिणी फ्रांस में देखने को मिला जब पारा 46 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। 

जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में छपे नए शोध के अनुसार 1950 से लेकर अब तक भीषण गर्मी के दिनों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हो गई है । जिसका अर्थ यहहुआ कि ग्रीष्मकाल कुल मिलाकर और गर्म हो गया है। जबकि अत्यधिक सर्द दिनों की संख्या आधी से कम रह गई है । या ये कह सकते हैं कि कुल मिलाकर सर्दियोंका मौसम गर्म हो रहा है । अध्ययन के अनुसार यूरोप के कई हिस्से जलवायु के किये गए आंकलन से कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहे हैं।

यूरोप में क्षेत्रीय स्तर पर भी पड़ रहा है इन परिवर्तनों का असर

स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, स्विट्जरलैंड की जलवायु वैज्ञानिक रुथ लॉरेंज जो कि इस शोध का हिस्सा रही है, ने बताया कि "यूरोप में स्थानीय स्तर पर भी हो रहे परिवर्तनों को साफ देख सकते हैं, मौसम में आने वाला यह परिवर्तन सामान्य से कहीं अधिक है । जो कि जलवायु में आने वाले परिवर्तनों कि ओर इशारा करता है ।"

अत्यधिक गर्मी इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि यह मानव शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। और मुख्यतः हीट स्ट्रोक का कारण बनती है। वैज्ञानिकों को पहले से पता था कि जलवायु में आने वाले परिवर्तन यूरोप को गर्म कर रहे है, लेकिन उन्होंने ज्यादातर लम्बी अवधि के दौरान तापमान में आये बड़े परिवर्तनों का अध्ययन किया था। लेकिन नए अध्ययन में हमने पहले से इकठा किये आंकड़ों का अध्यन क्षेत्रीय स्तर पर आने वाले परिवर्तनों को समझने के लिए किया । जिससे हम यह जान सकें कि क्या क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु मॉडल के उपयोग से भी वही आंकड़ें प्राप्त होते हैं जो दीर्घकालीन अध्ययन से प्राप्त हुए थे ।

इसके लिए लोरेंज और उनके सहयोगियों ने 1950 से 2018 के दौरान यूरोप के विभिन्न मौसम केंद्रों द्वारा अध्ययन किये गए आंकड़ों का उपयोग किया है । उन्होंने पाया कि 1950 से लेकर अब तक यूरोप के अत्यधिक गर्म दिनों कि संख्या में तीन गुनी वृद्धि हो गयी है । जबकि मध्य यूरोप में गर्मियों का तापमान औसत से 50 फीसदी अधिक हो गया है । वहीं पूरे यूरोप में इस अवधि के दौरान तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है । जबकि इसके विपरीत अत्यधिक सर्द दिन कम हो रहे हैं । जोकि औसतन 3 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो गए हैं । वहीं कई स्थानों पर इनका तापमान सर्दियों के औसत तापमान से कहीं अधिक हो गया है । तापमान में होने वाले इन परिवर्तनों को यूरोप के 94 फीसदी से अधिक स्टेशनों पर देखा गया है । जो इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि यूरोप में स्थानीय इलाकों पर भी जलवायु परिवर्तन का असर पड़ रहा है ।

यूरोप में जनजीवन पर पड़ेगा इसका व्यापक प्रभाव

अध्ययन के अनुसार यूरोप में गर्मी और सर्दियां का मौसम आने वाले वर्षों में कहीं अधिक गर्म हो जायेगा । जिसका सीधा प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जनजीवन पर पड़ेगा । शहरों में रहने वाले लोगों पर इसका भारी असर पड़ने के आसार हैं । जहां गर्मी के बढ़ते दबाव के कारण ऐरकंडिशन और रेफ्रीजिरेटर जैसे उपकरणों की मांग बढ़ जाएगी और वह जरुरत की एक आवश्यक वस्तु बन जाएगी । वहीं जर्नल नेचर में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि जलवायु में होने वाले परिवर्तनों के चलते नदियों में आने वाली बाढ़ का एक नया रूप देखने को मिलेगा । जहां ब्रिटेन सहित उत्तर-पश्चिमी यूरोप में बाढ़ की समस्या और गंभीर होती जा रही हैं, वहीं दक्षिणी और पूर्वी यूरोप में आने वाली बाढ़ों में कमी आ जाएगी । साथ ही सूखा, तूफान, हीटवेव जैसे अन्य खतरे भी सिर उठा सकते हैं | इसलिए यह जरुरी हो जाता है कि यूरोप ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कमी लाये । साथ ही जितना हो सके सोलर, विंड और अन्य ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा दें । जिससे आने वाले वक्त में जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को जितना अधिक हो सके सीमित किया जा सके ।