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... तो क्या 57 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान, अध्ययन से उठे सवाल?

दावा किया गया है कि पृथ्वी की सतह जितना अनुमान लगाया गया था, उससे कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रही है। यह नया मॉडल संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान अनुमान लगाने वाले जलवायु मॉडल के बदले लाया गया है।

By Dayanidhi

On: Wednesday 18 September 2019
 
Photo: GettyImages
Photo: GettyImages Photo: GettyImages

फ्रांस में दो प्रमुख अनुसंधान केंद्रों ने दो अलग-अलग जलवायु मॉडल तैयार किए है। इन मॉडलों के अनुसार सन 2100 तक यदि कार्बन उत्सर्जन इसी तरह जारी रहा तो तापमान में 7.0 डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। इस अध्ययन के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि भारत जैसे देशों में जहां तापमान अभी 50 डिग्री तक पहुंच जाता है तो क्या अगले 80 सालों में यहां 57 डिग्री उच्चतम तापमान पहुंच सकता है। 

वैज्ञानिकों ने कहा कि नई गणना यह भी बताती है कि पेरिस समझौते ने ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री से कम करने और संभावित 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रखने की बात की थी, जो कि चुनौतीपूर्ण है।

पेरिस में संस्थान पियरे साइमन लाप्लास क्लाइमेट मॉडलिंग सेंटर के प्रमुख ओलिवियर बाउचर ने बताया कि हम जो अपने दो मॉडल के साथ देखते हैं उसे (सिनेरियो) परिदृश्य एसएसपी1 को 2.6 के रूप में जाना जाता है। इसमें सामान्य रूप से हमें तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस के नीचे रखने की बात तो की जाती है, लेकिन तापमान उससे अधिक बढ़ जाता है।

अभी तक जबकि तापमान में केवल एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे कारण दुनिया घातक गर्मी की लहरों, सूखा की चपेट, बाढ़ की विभीषिका और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का सामना कर रही है, चक्रवात समुद्र के बढ़ते जल स्तर से और अधिक विनाशकारी हो गए हैं। नई पीढ़ी का 30-विषम जलवायु मॉडल जिसे सीएमआईपी 6 के रूप में जाना जाता है। जिसका कुछ समय पहले अनावरण किया गया हैं और यह मॉडल 2021 में आईपीसीसी की आने वाली प्रमुख रिपोर्ट को मदद करेगा।

इंपीरियल कॉलेज लंदन में  एसोसिएट प्रोफेसर और आईपीसीसी के प्रमुख अध्ययनकर्ता ने बताया कि सीएमआईपी6 में कई अनिश्चितताओं के बाद भी कई तरह के नवीनतम मॉडलिंग सुधार किए गए हैं। इन मॉडलों में सुपरकंप्यूटिंग पावर का उपयोग और मौसम प्रणालियों को बेहतर समझने वाला यंत्र, प्राकृतिक और मानव निर्मित कणों, और इस गर्म होती दुनिया में बादल किस तरह बनते है, आदि को समझने का प्रयास किया गया है।

बाउचर ने बतया कि हमारे पास अब बेहतर मॉडल हैं, बेहतर रिज़ॉल्यूशन है, और इससे हम वर्तमान जलवायु रुझानों का अधिक सटीक रूप से पता लगा सकते हैं। नए मॉडल की एक प्रमुख खोज यह है कि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) का स्तर बढ़ने से पृथ्वी की सतह अधिक गर्म होगी। और पहले की गई गणनाओं की तुलना में इस नए मॉडल को अधिक आसानी से उपयोग कर सटीक गणना की जा सकती है।

वैज्ञानिकों  ने कहा है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कल की बजाय आज कम करने पर जोर दिया जाना चाहिए, और वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन को बहुत कम अर्थात शून्य पर लाया जाना चाहिए। 2014 का जलवायु मॉडल के वर्तमान रुझानों के अनुसार पृथ्वी का तापमान सन 2100 तक अतिरिक्त 3 डिग्री सेल्सियस और कम से कम 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा, भले ही राष्ट्रीय कार्बन उत्सर्जन को कम करने के संकल्प को पूरा ही क्यों न किया गया हो।

पेरिस के एक संवाददाता सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र (सीएनआरएम) सहित दो फ्रांसीसी जलवायु मॉडल का अनावरण किया गया।