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जलवायु प्रतिबद्ध्ता को तय समय पर ही पूरा करने पर फोकस किया जाना चाहिए: भारत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भारत का पक्ष रखा

By DTE Staff

On: Wednesday 24 February 2021
 
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में भारत का पक्ष रखते केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। फोटो: पीआईबी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में भारत का पक्ष रखते केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। फोटो: पीआईबी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में भारत का पक्ष रखते केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। फोटो: पीआईबी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में "अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जलवायु संबंधी जोखिमों" पर आयोजित खुली बहस में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सभी देशों को 2020 से पहले की प्रतिबद्धताओं को पूरा करना पर ध्यान देना चाहिए। यह लक्ष्य अवधि 2050 तक बढ़ाने की बात नहीं करनी चाहिए।

जावड़ेकर ने 2019 आईपीसीसी की विशेष रिपोर्ट "जलवायु परिवर्तन और भूमि" का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है कि मौसम में तेजी से हो रहे बदलावों और जलवायु परिवर्तन से विस्थापन बढ़ सकता है, जो भोजन की कमी पैदा कर सकती है, आजीविका को खतरा हो सकता है और आपसी संघर्ष बढ़ सकते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि जलवायु समझौतों को लेकर मौलिक रूप से सहमत सिद्धांतों से अलग कोई समानांतर ट्रैक नहीं बनाया जाए।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा, "हालांकि जलवायु परिवर्तन सीधे या स्वाभाविक रूप से हिंसक संघर्ष का कारण नहीं बनता है, लेकिन इसके साथ-साथ अन्य सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों से संघर्ष बढ़ रहे हैं। इससे शांति, स्थिरता और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि विकासशील देश पेरिस समझौते के तहत अपनी वचनबद्धता को पूरा करें।

जावड़ेकर ने फिर दोहराया कि विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को 100 अरब डॉलर सालाना का सहयोग भी नहीं मिल पाया। जबकि यह बहुत जरूरी हो गया है कि विकासशील देशों को पूरा सहयोग किया जाए, ताकि वे जलवायु परिवर्तन नीति और नियोजन पर काम कर सकें। खासकर हाशिए पर रहने वाले समूहों को समर्थन व सहयोग करने की तत्काल आवश्यकता है।

भारत के जलवायु अधिनियमों पर जावड़ेकर ने कहा कि भारत अपने जलवायु परिवर्तन शमन नियमों को पूरा करने के लिए जी20 राष्ट्रों के बीच भारत एकमात्र देश है जो सही रास्ते पर है। हम न केवल अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि आगे बढ़-चढ़ कर काम करेंगे।

मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) और आपदा निवारण सुविधा (सीडीआरआई) के लिए भारत द्वारा जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन की चुनौतियों का समाधान करने के लिए शुरू की गई पर दो पहलों पर प्रकाश डाला।

कोविड-19 पर काबू पाने के बाद टिप्पणी करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि भारत का मानना है कि कोविड-19 बचाव और रिकवरी के उपायों और दीर्घकालिक रणनीतियों के माध्यम से कार्बन उर्त्सजन को कम करने का मौका सभी देशों को मिला है। इसकी घोषणा 2021 में पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी26) के 26वें सत्र की जानी है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि यूनाइटेड किंगडम फरवरी 2021 के लिए यूएनएससी का अध्यक्षता कर रहा है और उनकी एक अध्यक्षता कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद खुली बहस का आयोजन "अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जलवायु संबंधी जोखिमों को संबोधित" करने पर कर रहा है।