समुद्र का स्तर बढ़ने से दुनिया भर के आधे से अधिक तटों पर मंडरा रहा है खतरा

अध्ययन में शामिल दुनिया भर के 7,283 समुद्र तटों में से लगभग आधे से अधिक में हर साल सदी के अंत तक कई बार समुद्र का स्तर बढ़ेगा। 

By Dayanidhi

On: Tuesday 31 August 2021
 
समुद्र का स्तर बढ़ने से दुनिया भर के आधे से अधिक तटों पर मंडरा रहा है खतरा
फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

भविष्य में समुद्र स्तर में चरम बढ़ोतरी आम बात होगी। चरम समुद्री स्तर तब होता है जब तूफान तथा ज्वार-भाटा की लहरें आपस में मिलती हैं। संवेदनशील स्थानों पर, चरम समुद्री स्तर गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं, जिससे लोगों, बस्तियों और तटीय पारिस्थितिक तंत्र दोनों को काफी नुकसान हो सकता है। यह तब होता है जब मानवीय हस्तक्षेप या छेड़-छाड़ से प्राकृतिक सुरक्षा को खत्म कर दिया जाता है या भंग कर दिया जाता है। यह हस्तक्षेप दुनिया भर में बढ़ते तापमान के रूप में देखा जा सकता है, जिससे औसत समुद्र स्तर में वृद्धि जारी रहने की बात कही गई है।  

अब वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक नया अध्ययन कर बताया है कि, बढ़ते तापमान से लगभग हर साल सदी के अंत तक समुद्र चरम स्तर तक बढ़ जाएगा। इसके चलते दुनिया भर में प्रमुख समुद्र तट और वहां रहने वाले लोग प्रभावित होंगे। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन में शामिल दुनिया भर के 7,283 समुद्र तटों में से लगभग आधे से अधिक में समुद्र का स्तर 100 बार से अधिक लगातार बढ़ता रहेगा।

हाल ही में जारी जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल यानी इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) रिपोर्ट में भी कहा गया है कि हिंद महासागर तेजी से गर्म हो रहा है, भारत में लू और बाढ़ की घटनाओं में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हिंद महासागर के गर्म होने से समुद्र के स्तर में वृद्धि होगी, जिसकी वजह से निचले इलाकों में अधिक लगातार और खतरनाक तटीय बाढ़ आएगी।  

सह-अध्ययनकर्ता एवं मेलबर्न विश्वविद्यालय के डॉ एब्रू किरेजी, जो कि एक महासागर इंजीनियरिंग के शोधकर्ता हैं, ने कहा कि जिन क्षेत्रों में समुद्र के स्तर के बार-बार अत्यधिक तेजी से बढ़ने की आशंका है, उनमें दक्षिणी गोलार्ध और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र, भूमध्य सागर और अरब प्रायद्वीप, दक्षिणी उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट और हवाई, कैरिबियन, फिलीपींस और इंडोनेशिया के इलाके शामिल हैं।

डॉ किरेजी ने कहा इस अध्ययन से पता चलता हैं कि ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी तट 2100 तक हर साल चरम समुद्र स्तरों से प्रभावित होंगे। बार-बार चरम स्तर तक बढ़ता समुद्र स्तर वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ भी बढ़ेगा। इस तरह के बदलाव के सदी के अंत की तुलना में जल्द ही होने के आसार जताए गए हैं। कई स्थानों पर 2070 तक चरम घटनाओं में 100 गुना वृद्धि होने की आशंका जताई गई है।

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के पैसिफिक नॉर्थ वेस्ट नेशनल लेबोरेटरी में जलवायु वैज्ञानिक और प्रमुख अध्ययनकर्ता डॉ क्लाउडिया तेबाल्डी ने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि समुद्र के स्तर में वृद्धि 1.5 डिग्री पर भी नाटकीय तरीके से बढ़ेगी। समुद्र के स्तर की चरम आवृत्तियों और परिमाण पर अच्छा-खासा प्रभाव पड़ेगा। यह अध्ययन नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित हुआ है।

डॉ तेबाल्डी ने कहा यह अध्ययन दुनिया भर में एक और पूरी तस्वीर को उजागर करता है। हम अच्छी तरह से स्थानीय विस्तार में बढ़ते तापमान के स्तरों की एक विस्तृत श्रृंखला को देख सकते हैं। शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए कि परिवर्तन विभिन्न देशों के लोगों को कैसे प्रभावित करेंगे इस पर अधिक विस्तृत अध्ययन करने का सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि अध्ययन में जिन प्राकृतिक परिवर्तनों का वर्णन किया गया है, उनका स्थानीय पैमानों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा, जो कई कारणों पर निर्भर करता है, जिसमें यह भी शामिल है कि वे जगहें बढ़ते पानी को सहन करने के काबिल है या नहीं और बदलाव के लिए वहां रहने वाले लोग कितने तैयार हैं।  

डॉ किरेजी ने कहा सार्वजनिक नीति निर्माताओं को इन अध्ययनों पर ध्यान देना चाहिए और तटीय सुरक्षा और उससे निपटने के उपायों में सुधार की दिशा में काम करना चाहिए। समुद्र की दीवारों का निर्माण, तटरेखा से पीछे हटना और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को तैनात करना कुछ ऐसे कदम हैं जो इस बदलाव के अनुकूल होने के लिए उठाए जा सकते हैं।