Sign up for our weekly newsletter

समय से पहले जमने लगे हैं बीज, नहीं हैं शुभ संकेत

पृथ्वी के तीसरे ध्रुव माने जाने वाले तिब्बती पठार पर शोधकर्ताओं ने एक व्यापक अध्ययन किया, जिसमें कई चिंताजनक बातों का पता चला

By Dayanidhi

On: Wednesday 26 February 2020
 
तिब्बती पठार। फोटो: विकीपीडिया कॉमन्स
तिब्बती पठार। फोटो: विकीपीडिया कॉमन्स तिब्बती पठार। फोटो: विकीपीडिया कॉमन्स

एक नए अध्ययन से पता चला है कि किस तरह बढ़ते तापमान से मौसम बदल रहा है और भारी बारिश हो रही है, उससे तिब्बती पठार के मैदान और अन्य जगहों पर बीजों को नुकसान पहुंच रहा है। यह अध्ययन इकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका के जर्नल इकोलॉजिकल एप्लिकेशन में प्रकाशित हुआ है।

तिब्बती पठार, एक ऐसा स्थान है जो हजारों वर्षों से घास के मैदानों के लिए जाना जाता हैं। यह वनस्पति पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष जलवायु प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक आदर्श स्थान है। अध्ययन में कहा गया है कि ये दुनिया के सबसे ऊंचे पठार है, जिनकी ऊंचाई 12,000 फीट से अधिक है, इसे पृथ्वी का तीसरा ध्रुव माना जाता है। यहां जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ने की दर लगभग 1.5 गुना है जिसके कारण पठार के अधिकांश क्षेत्रों में साल भर होने वाली वर्षा में वृद्धि हुई है।

शोधकर्ताओं ने पठार से मिट्टी के नमूने और पौधों के सर्वेक्षण संबंधित आकड़ों को एकत्र किया। चीन के लान्चो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पठार के उत्तरपूर्वी भाग में विभिन्न ऊंचाई और विभिन्न तरह की पारिस्थितिकी तंत्र से 57 नमूने लिए। उन्होंने मिट्टी के 1026 नमूने इकट्ठे किए और वहां उग रहे विभिन्न पौधों का सर्वेक्षण किया। पौधों से समय के साथ बीज जमीन में गिरते रहते हैं।

इसके बाद, शोधकर्ताओं द्वारा नमूनों का अंकुरण कराया गया और उनके विकास के अध्ययन के लिए उन्हें प्रायोगिक भूखंडों में उगाया गया। इसका उद्देश्य यह जानना था कि विभिन्न परिस्थितियां तिब्बत में  "मिट्टी के बीज बैंकों" को किस तरह प्रभावित करती हैं।

जबकि कुछ पौधे बढ़ते वर्षा और तापमान के तहत अच्छी तरह से विकसित होते दिखाई दिए। इन परिवर्तनों के चलते मिट्टी में होने वाले बदलावों का छोटे बीजों पर हानिकारक प्रभाव पड़ा।

कोलिन्स कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन बीजों के अंकुरण, बढ़ने और जीवित रहने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। जलवायु से अंकुरण प्रभावित होता है जिसमें सूखा, ठंड, आदि अंकुरण में कमी के कारण हो सकते हैं।

अध्ययन के अनुसार बीज के जमने जमने (निष्क्रियता) को नियंत्रित करने के लिए तापमान एक मुख्य कारण होता है। बढ़ते तापमान में, बीज बहुत जल्दी अंकुरित हो जाते है जबकि यह उनके स्वस्थ विकास के लिए आदर्श परिस्थितियां नहीं होती हैं। कुछ दिनों के लिए एक असामान्य रूप से गर्म तापमान कड़ी सर्दियों के दौरान उन बीजों को उगने के लिए मजबूर कर सकता है, लेकिन बाद में उनका विकास होना कठिन हो जाता है। कई बीज मिट्टी में अधिक नमी के कारण जल्द ही अंकुरित हो सकते हैं।

तापमान और वर्षा में वृद्धि, उनके आसपास के वातावरण को बदलकर अप्रत्यक्ष रूप से बीजों को भी प्रभावित कर सकते हैं। रोगाणु, जो बीजों के लिए हानिकारक होते हैं। वे गर्म और गीली मिट्टी की स्थिति में अधिक ताकतवर हो सकते हैं।

मिट्टी की अम्लता भी बदल सकती है, रोगाणुओं की अधिक संख्या माइक्रोबियल समुदायों को प्रभावित करती है। बदलती परिस्थितियों में मिट्टी में अतिरिक्त नाइट्रोजन से कुछ पौधों की प्रजातियों को दूसरों पर हावी होने का मौका मिल जाता है। जिससे समग्र प्रजातियों की विविधता में गिरावट आती है, जो कम विविधता वाले बीजों का उत्पादन करते है।