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पारिस्थितिकी तंत्र के कामकाज को प्रभावित करता है तापमान: स्टडी

तापमान पौधों और सूक्ष्म जीवों के कार्य करने के तरीके और उनकी क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है 

By Dayanidhi

On: Saturday 30 November 2019

पारिस्थितिक तंत्र पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव जांचने के लिए शोधकर्ता जंगलों में पौधों और सूक्ष्म जीवों पर तापमान के असर का अध्ययन किया है। इसके लिए अलग-अलग प्रजातियों के लक्षणों को मापा गया और उनकी तुलना करके यह समझने की कोशिश की गई कि वातावरण में तापमान की एक सीमा तक ये कैसे कार्य करते हैं। उन्होंने पाया कि तापमान पौधों और सूक्ष्म जीवों के कार्य करने के तरीके और उनकी क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

यह अध्ययन नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ता ने बताया कि यह परियोजना 2011 में शुरू हुई थी, इसके अंतर्गत गर्म उष्णकटिबंधीय जंगलों से लेकर ठंडे बोरियल जंगलों तक मिट्टी और जंगलों की निगरानी की गई और यह समझने का प्रयास किया गया कि हमारी खाद्य श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर जीव तापमान के साथ कैसे जुडे़ हैं। इन कामों में मिट्टी के माइक्रोबियल डीएनए और बड़े डेटासेट का उपयोग करके कंप्यूटर विश्लेषण किया गया।  

टीम ने बैक्टीरिया के पोषक चक्रण से बंधे जीन में एक बदलाव देखा, यह बदलाव तापमान के कारण आया था।उष्णकटिबंधीय जंगलों में, पेड़ जल्दी से बढ़ते हैं और उनकी पत्तियां भी बड़ी-बड़ी और चौड़ी होती हैं। इसका मतलब है कि ये पत्तियां लगातार जमीन पर गिरती रहती है और सूक्ष्म जीव इनका उपभोग करते हैं। शोध टीम ने बताया कि स्थानीय सूक्ष्म जीवों के जीन में कार्बन के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) की बहुत कमी थी।  देवदार के घने जंगलों में पेड़ों की पत्तियां छोटी होती है, जिनसे अंकुरित बीज गिरते रहते हैं, वहां स्थानीय बैक्टीरिया में अलग-अलग कार्य करने के  लक्षण पाए गए, यहां समशीतोष्ण क्षेत्रों में कार्बन-साइक्लिंग जीन की अधिकता पाई गई।

शोधकर्ता कहते है कि यदि तापमान पौधों और बैक्टीरिया के कामकाज में बदलाव करता है, तो गर्म जलवायु के अंतर्गत पारिस्थितिक तंत्र के कार्यों में बदलाव के साथ-साथ बायोजिओकेमिस्ट्री में भी बदलाव होगा। पारिस्थितिकी प्रणालियों के सामंजस्य स्थापित करने के लिए यह बदलाव बहुत जल्दी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विविधता केवल तापमान से ही नहीं होती है। वहां अन्य कारक भी हो सकते हैं जिनका अध्ययन अलग से किया जाना चाहिए।