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नई संरचना तिब्बती पठार के पर्माफ्रोस्ट को गलने से बचा सकती है

जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते तापमान ने पर्माफ्रोस्ट की गर्मी को बढ़ा दिया है जिसके कारण पर्माफ्रोस्ट में गिरावट देखी जा रही है।

By Dayanidhi

On: Tuesday 01 June 2021
 
नई संरचना तिब्बती पठार के पर्माफ़्रोस्ट को गलने से बचा सकती है
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

किंघाई तिब्बत का पठार (क्यूटीपी), जिसकी औसत ऊंचाई 4000 मीटर से अधिक है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे पठारों में से एक है और इसमें पृथ्वी पर सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित पर्माफ्रोस्ट का सबसे बड़ा क्षेत्र शामिल है।

हाल के दशकों में, किंघाई तिब्बत के पठार (क्यूटीपी) पर जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते तापमान ने पर्माफ्रोस्ट की गर्मी को बढ़ा दिया है जिसके कारण पर्माफ्रोस्ट में गिरावट देखी जा रही है। लगातार बढ़ती गर्मी के चलते पर्माफ्रोस्ट की बुनियाद कमजोर पड़ गई है।  

पर्माफ्रोस्ट वह भूमि है जो लगातार दो या उससे अधिक वर्षों तक 0 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे रहती है, जो भूमि पर या समुद्र के नीचे स्थित होती है। जरूरी नहीं कि पर्माफ्रोस्ट जमीन पर पहली परत हो। यह पृथ्वी की सतह के नीचे एक इंच से लेकर कई मील की गहराई तक हो सकता है।

टूटे हुए पत्थरों की दीवार (क्रश-रॉक रिवेटमेंट, सीआरआर) जिससे तटबंध को ढलानों पर पक्का किया जा सकता है। व्यापक रूप से जिसका उपयोग पर्माफ्रोस्ट को ठंडा और संरक्षित करने के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि, गर्म पर्माफ्रोस्ट पर पारंपरिक टूटे हुए पत्थरों की दीवार (सीआरआर) उन समस्याओं का सामना कर रही है जो इसके लंबे समय तक ठंडे होने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

एडवांस इन मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रकाशित एक अध्ययन में, चीनी विज्ञान अकादमी (सीएएस) के नॉर्थवेस्ट इंस्टीट्यूट ऑफ इको-एनवायरनमेंट एंड रिसोर्सेज (एनआईईईआर) की एक शोध टीम ने पर्माफ्रोस्ट को ठंडा करने की क्षमता में सुधार के लिए एक नई संरचना (एनएमएस) तैयार की है, जो टूटे हुए पत्थरों की दीवार (सीआरआर) और चट्टान की कमजोर परत के छिद्रो का मुकाबला कर सकती है।   

2004 से 2014 तक जमीन के तापमान की निगरानी के आधार पर, शोधकर्ताओं ने सबसे पहले एक गर्म पर्माफ्रोस्ट क्षेत्र में चयनित टूटे हुए पत्थरों की दीवार (सीआरआर) तटबंध के ठंडे होने वाली विशेषताओं की जांच की। फिर उन्होंने एक दूसरे से जुड़े हुए गर्मी को स्थानांतरण करने वाले मॉडल को विकसित किया। जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते तापमान को देखते हुए, इसे ठंडा करने के प्रभाव का मूल्यांकन करने और नई संरचना के प्रदर्शन को मजबूत करने के लिए संख्यात्मक सिमुलेशन की एक श्रृंखला बनाई गई।

नई संरचना ढलानों पर चट्टान की परत को रेत भरने से बचा सकती है। एनएमएस का उपयोग गर्म पर्माफ्रोस्ट के रखरखाव के लिए एक प्रभावी विधि के रूप में किया जा सकता है। यह आशा की जाती है कि यह अध्ययन ठंडे क्षेत्रों में शीत ऊर्जा के उपयोग में सुधार कर सकता है और तटबंधों के गर्म या पिघलने संबंधी संवेदनशील पर्माफ्रोस्ट क्षेत्रों के डिजाइन और रखरखाव के लिए मार्गदर्शन दे सकती है।