Sign up for our weekly newsletter

2 डिग्री सेल्सियस की गर्मी से मिट्टी से निकलेगी 23000 करोड़ टन कार्बन

2 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग से निकलने वाली 23000 करोड़ टन कार्बन, चीन के कुल उत्सर्जन का चार गुना से अधिक है

By Dayanidhi

On: Tuesday 03 November 2020
 
Carbon release from the soil

हाल ही में किए गए एक शोध में पाया गया कि दुनिया भर में मिट्टी का सही से प्रबंधन और संरक्षण किया जाए तो मिट्टी हर साल लगभग पांच अरब टन से अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड अवशोषित कर सकती है। वहीं दूसरी ओर एक नए अध्ययन में बताया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग 2 डिग्री सेल्सियस होने से दुनिया भर में मिट्टी से लगभग 23,000 करोड़ (230 बिलियन) टन कार्बन निकलेगा।

दुनिया भर की मिट्टी में वायुमंडल की तुलना में दो से तीन गुना अधिक कार्बन होता है। उच्च तापमान अपघटन को बढ़ता है अर्थात मिट्टी से कार्बन तेजी से निकलती है। कार्बन के मिट्टी में रहने के समय में होने वाली कमी को 'मिट्टी कार्बन टर्नओवर' कहा जाता है।

इंगलैंड की एक्सेटर विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए नए अंतर्राष्ट्रीय शोध ने ग्लोबल वार्मिंग के लिए मिट्टी में कार्बन टर्नओवर की संवेदनशीलता का पता लगाया है। यदि एक बार कार्बन टर्नओवर के बारे में सही पता लग जाए तो भविष्य के जलवायु परिवर्तन अनुमानों के बारे में पता लगाया जा सकता है।

2 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग (पूर्व-औद्योगिक स्तरों से ऊपर) से निकलने वाली 23000 करोड़ टन कार्बन, चीन के कुल उत्सर्जन का चार गुना से अधिक है और पिछले 100 वर्षों में अमेरिका द्वारा उत्सर्जित कार्बन के दोगुना से अधिक है। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है।

एक्सेटर विश्वविद्यालय के सह-शोधकर्ता डॉ सारा चडबर्न ने कहा हमारे अध्ययन ने सबसे चरम अनुमानों को लिया है, लेकिन फिर भी केवल 2 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग पर जलवायु परिवर्तन के कारण पर्याप्त मिट्टी में कार्बन के नुकसान के बारे में सुझाव दिया गया है।

यह प्रभाव एक सकारात्मक प्रतिक्रिया कहलाती है। जब जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभाव पड़ता है यह आगे जलवायु परिवर्तन को और अधिक बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता है।

मिट्टी में कार्बन की प्रतिक्रिया से होने वाले जलवायु परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन अनुमानों में कार्बन चक्र को समझने में सबसे बड़ी अनिश्चितता वाल हिस्सा है।

इसे हल करने के लिए शोधकर्ताओं ने अवलोकन किए गए आंकड़ों और अर्थ सिस्टम मॉडल को साथ में जोड़ा। फिर इनका उपयोग करते हुए जलवायु और कार्बन चक्र के द्वारा भविष्य में होने वाले जलवायु परिवर्तन के बारे में अनुमान लगाया।

एक्सेटर विश्वविद्यालय के प्रमुख रेबेका वर्नी ने कहा हमने ग्लोबल वार्मिंग के प्रति संवेदनशीलता के लिए धरती के विभिन्न स्थानों पर मिट्टी के कार्बन का तापमान एक दूसरे से कैसे संबंधित है इस बारे में जांच की।

अत्याधुनिक मॉडल 2 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग पर लगभग 12000 करोड़ (120 बिलियन) टन कार्बन के अनिश्चितता का सुझाव देते हैं। यह अध्ययन इस अनिश्चितता वाले कार्बन को लगभग 5000 करोड़ (50 बिलियन) टन कम करता है।

एक्सेटर ग्लोबल सिस्टम्स इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर पीटर कॉक्स ने कहा हमने इस जलवायु परिवर्तन प्रतिक्रिया में अनिश्चितता को कम किया है, जो एक सटीक वैश्विक कार्बन बजट की गणना करने और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।