चेतावनी:जलवायु में बदलाव के चलते स्वास्थ्य से लेकर खाद्य सुरक्षा पर मंडरा सकता है संकट

अध्ययन के मुताबिक उष्णकटिबंधीय इलाकों में, गर्म दिन औसत दिनों की तुलना में काफी अधिक गर्म होंगे, जिसका असर अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के बड़े हिस्सों पर पड़ेगा।

By Dayanidhi

On: Friday 22 October 2021
 
चेतावनी:जलवायु में बदलाव के चलते स्वास्थ्य से लेकर खाद्य खाद्य सुरक्षा पर मंडरा सकता है संकट
फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

एक नए शोध में पाया गया है कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गर्म दिनों के चलते जलवायु परिवर्तन में बढ़ोतरी होगी। जिससे उष्णकटिबंधीय इलाकों में गंभीर प्रभाव पड़ेंगे। यह शोध सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय की अगुवाई में किया गया है। अध्ययनकर्ता ने बताया कि 18 जलवायु मॉडलों द्वारा किए गए सिमुलेशन से उष्णकटिबंधीय इलाकों में तापमान बढ़ने का पूर्वानुमान लगाया गया है।  

पूर्वानुमान के मुताबिक उष्णकटिबंधीय इलाकों में, गर्म दिन औसत दिनों की तुलना में काफी अधिक गर्म होंगे। उदाहरण के तौर पर देखे तो, सबसे गर्म 5 फीसदी दिनों में औसत दिन की तुलना में 20 फीसदी अधिक गर्म होने की आशंका है। अत्यधिक तापमान का असर अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के बड़े हिस्सों में मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिक तंत्र और जंगल में आग लगने की घटनाओं पर पड़ेगा। भूमि के सतही तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी के चलते एशिया और अफ्रीका में खाद्य उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के अध्ययनकर्ता डॉ माइकल बायर्न ने कहा कि गर्म दिनों में तेजी से बढ़ते तापमान को समझाने के लिए वायुमंडलीय गतिशीलता की अवधारणाओं का उपयोग किया गया है। विशेष रूप से, वह दिखाता है कि उष्णकटिबंधीय जलवायु के दो पहलू हैं जिसमें बार-बार तूफानों का आना, पृथ्वी के घूमने के कमजोर प्रभाव को इसके द्वारा नियंत्रित किया जाना आदि के कारण यह देखना कि बदलते मौसम में गर्म दिन कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।

स्रोत : सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय

डॉ बायर्न ने कहा कि यह अध्ययन उष्णकटिबंधीय भूमि पर अत्यधिक तापमान निर्धारित करने वाली प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक सरल सिद्धांत पेश करता है। सिद्धांत के अनुसार, गर्म दिनों में तापमान तेजी से बढ़ जाता है क्योंकि वे दिन शुष्क होते हैं। जो कि 'सुखाने वाले तापमान का' तंत्र कह लाता है।

यह सिद्धांत उष्णकटिबंधीय जलवायु और लू या हीट वेव की हमारी समझ में एक महत्वपूर्ण अंतर को दिखाता है। अध्ययनकर्ता ने कहा मुझे आशा है कि अध्ययन का सिद्धांत के साथ-साथ जलवायु मॉडल और अवलोकनों का उपयोग करके, उष्णकटिबंधीय और वहां के चरम मौसम की हमारी समझ को बढ़ाएगा तथा आने वाले समय में और शोधों को बढ़ावा देगा।

रीडिंग विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण शुष्क मौसम में लंबे समय तक शुष्क बना रहेगा। उष्णकटिबंधीय देशों में शुष्क मौसम के दौरान उगाई जाने वाली फसलें प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि बिना बारिश वाले दिनों की संख्या बढ़ जाएगी।

दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में चरम शुष्क मौसम के तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की आशंका है। नमी वाले मौसम में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है। इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में मौसम का औसतन अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और उससे अधिक हो सकता है।