दुनिया भर में हर साल सड़े-गले पेड़ों से 11 गीगाटन कार्बन निकलता है

अध्ययन के अनुसार सड़े-गले या मृत पेड़ों से होने वाला उत्सर्जन जीवाश्म ईंधन से होने वाले उत्सर्जन के लगभग 115 प्रतिशत के बराबर है

By Dayanidhi

On: Friday 03 September 2021
 
दुनिया भर में हर साल सड़े-गले पेड़ों द्वारा अनुमानित 11 गीगा टन कार्बन छोड़ा जाता है
फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

दुनिया भर में जंगल वातावरण से काफी मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसलिए हमारी जलवायु की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, वैश्विक कार्बन चक्र में सड़े-गले या मृत पेड़ों की भूमिका के बारे में बहुत कम जानकारी है। लकड़ी का अपघटन या नष्ट होना और इसमें शामिल पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण (रीसायकल) जंगलों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है।

दुनिया भर में सड़ने वाली लकड़ी से कितना कार्बन निकलता है? इस प्रक्रिया में कीट क्या भूमिका निभाते हैं? इन सवालों के जवाब के लिए अब बवेरियन फॉरेस्ट नेशनल पार्क द्वारा स्थापित एक वैश्विक शोध परियोजना में अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन जूलियस मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्जबर्ग (जऐमयू) और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (टीयूएम) के सहयोग से किया गया है।

छह महाद्वीपों के 55 जंगलों पर शोधकर्ताओं ने अपघटन या नष्ट होने की दर पर जलवायु के प्रभाव का आकलन करने के लिए 140 से अधिक वृक्ष प्रजातियों की लकड़ी को चुना। आधी लकड़ी को जालीदार पिंजरों में रखा गया था। इन पिंजरों ने कीड़ों को अपघटन में शामिल होने से रोका और लकड़ी के अपघटन या नष्ट होने में उनके योगदान की मात्रा निर्धारित की।

एकत्र किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अपघटन या नष्ट होने की दर और कीड़ों का योगदान जलवायु पर अत्यधिक निर्भर है और तापमान बढ़ने के साथ बढ़ता है। गर्म क्षेत्रों में अधिक बारिश अपघटन की प्रक्रिया को तेज करती है और उन क्षेत्रों में इसे धीमा कर देता है जहां तापमान कम होता है।

असाधारण रूप से कठिन परिस्थितियों में दुनिया भर में 50 शोध समूहों ने तीन साल का प्रयोग पूरा किया। कुछ क्षेत्रों को हाथियों से बचाने के लिए विस्तृत उपायों का उपयोग करना आवश्यक था। एक इलाके के जंगल की आग से घिर गया था और वहां पुनर्निर्माण किया गया था, जबकि दूसरे क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी। यह अध्ययन नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

वैश्विक कार्बन चक्र 

म्यूनिख के तकनीकी विश्वविद्यालय (टीयूएम) में पारिस्थितिक तंत्र गतिशीलता और वन प्रबंधन के प्रोफेसर रूपर्ट सीडल बताते हैं कि प्रयोग के आधार पर हम दुनिया भर के कार्बन चक्र में मृत पेड़ों की भूमिका के बारे में पता लगा सकते थे। अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में मृत पेड़ों (डेडवुड) द्वारा हर साल लगभग 10.9 गीगा टन कार्बन से छोड़ा जाता है। इस संदर्भ में, कार्बन का एक हिस्सा मिट्टी में अवशोषित हो जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा वायुमंडल में मिल दिया जाता है। टीयूएम के वैज्ञानिक डॉ. वर्नर रामर कहते हैं, मृत पेड़ों से होने वाला उत्सर्जन जीवाश्म ईंधन से होने वाले उत्सर्जन के लगभग 115 प्रतिशत के बराबर है। 

93 प्रतिशत उष्णकटिबंधीय वन इस परिणाम में असमान रूप से योगदान करते हैं क्योंकि उनके लकड़ी के अधिक द्रव्यमान के कारण उनका तेजी से अपघटन या नष्ट होने की प्रक्रियाओं के साथ जुड़ा हुआ होता है। समशीतोष्ण और बोरियल जंगलों में अपघटन काफी धीमा है, यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में सड़े-गले या मृत पेड़ों से कार्बन को लंबे समय तक संग्रहीत किया जाता है। 

लगभग एक तिहाई लकड़ी का अपघटन कीड़े उस लकड़ी को खाकर करते हैं। मुख्य अध्ययनकर्ता पीडी डॉ सेबेस्टियन सिबॉल्ड बताते हैं हालांकि यह ज्यादातर उष्णकटिबंधीय इलाकों तक ही सीमित है। बोरियल और समशीतोष्ण जंगलों में, कीड़ों द्वारा किए गए योगदान बहुत कम या छोटे हैं।

अध्ययन वैश्विक कार्बन चक्र में सड़े-गले या मृत पेड़ों द्वारा निभाई गई भूमिका और लकड़ी के अपघटन में कीड़ों के कार्यात्मक महत्व पर प्रकाश डालता है। अध्ययनकर्ता प्रोफेसर जोर्ग मुलरइस बताते हैं कि हम कार्बन चक्रों के वैश्विक मॉडलिंग में एक और अंतर को देख सकते हैं। दुनिया भर में हो रहे बदलावों के समय, हम जैव विविधता में कुछ नाटकीय गिरावट और जलवायु में परिवर्तन देख सकते हैं।

पीडी डॉ. सिबॉल्ड बताते हैं इस अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन और कीड़ों के नुकसान दोनों में लकड़ी के अपघटन को बदलने की क्षमता है और इसलिए, दुनिया भर में कार्बन और पोषक तत्व चक्र चलता रहता है।