Sign up for our weekly newsletter

मिट्टी में सूक्ष्मजीवों पर बदलते मौसम से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है : अध्ययन

अध्ययन में पाया गया कि मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की आबादी को लगातार औसत स्तर पर रखने से कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है साथ ही यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद कर सकता है।

By Dayanidhi

On: Tuesday 11 May 2021
 
मिट्टी में सूक्ष्मजीवों के अधिक उतार-चढ़ाव से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है : अध्ययन
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

गर्मी के मौसम के बाद सर्दियों के दौरान मानव शरीर अधिक ऊर्जा की खपत करता है, क्योंकि शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए, शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह से, मौसम में बदलाव होने पर मिट्टी में बैक्टीरिया और कवक जैसे सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं। मिट्टी के तापमान और नमी में मौसमी उतार-चढ़ाव सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) की गतिविधियों को प्रभावित करते हैं जो बदले में मिट्टी के कार्बन उत्सर्जन और पोषक चक्रों पर असर डालते हैं।

सूक्ष्मजीव ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्बन की खपत करते हैं। जैसे-जैसे मौसम में बदलाव होता है, सूक्ष्मजीव अपनी गतिविधियों में वृद्धि करते हैं, वे जितने अधिक कार्बन का उपभोग करते हैं उतना ही वातावरण में भी कार्बन का उत्सर्जन होता है।

सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी के पारिस्थितिकीविदों ने एक नए मॉडल से किए गए अध्ययन में पाया कि, इन सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) पर मौसम के आधार पर वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव पड़ता है, यह एक बुनियादी तंत्र के रूप में कार्य करता है जो स्थानीय-जलवायु के परस्पर प्रभाव और जमीन की मिट्टी के जैव-रसायन चीजों को नियंत्रित करता है।

वैश्विक पारिस्थितिकीविद और प्रमुख अध्ययनकर्ता ज़ियाओफ़ेंग जूजब ने कहा कि मिट्टी में सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) की आबादी एक उत्पादक चरण में होती हैं, तो इनकी संख्या और आकार में वृद्धि, के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो ये अधिक कार्बन का उपभोग कर पूरा करते हैं अध्ययनकर्ता ने बताया यह हमने तब देखा जब हमने मिट्टी की मात्रा और गतिविधियों में बदलाव किया।

अध्ययनकर्ता ने बताया कि सिमुलेशन में सूक्ष्मजीवों और मिट्टी के कार्बन में पारस्परिक परिवर्तनों का अवलोकन किया गया, हमने पाया कि जब मौसमी बदलाव के प्रभाव को हटा दिया गया था, तो सूक्ष्म जीवों की श्वसन दर कम हो गई थी। सूक्ष्मजीवों की आबादी को लगातार औसत स्तर पर बनाए रखने से कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है।  

शोधकर्ताओं ने कहा कि मिट्टी के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भूमि का प्रबंधन करने वाले मिट्टी की सूक्ष्मजीवों की आबादी में उतार-चढ़ाव को कम करने और अन्य तरीकों को अपनाया जा सकता है। जो कि कृषि वैज्ञानिकों और उत्पादकों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद कर सकता है।

शोधकर्ताओं ने एक माइक्रोबियल मॉडलिंग फ्रेमवर्क का उपयोग करते हुए सीएलएम-माइक्रोब, एक भूमि आधारित मॉडल का उपयोग किया। यह  मॉडल एसडीएसयू के लैब में विकसित किया गया। जहां इस अध्ययन को अंजाम दिया गया वहां कि जलवायु में बदलाव, स्थानीय कार्बन चक्र को कैसे प्रभावित करता है यह जानने के लिए मॉडल को एक सुपरकंप्यूटर पर लगाया गया।

शोधकर्ता जू ने कहा ने कहा कि हम जानते हैं कि मिट्टी के सूक्ष्मजीव कार्बन के निकलने को बढ़ाते हैं। कार्बन निकलने से इसके अलग-अलग जगहों पर प्रभाव पड़ते हैं जिसमें भूमि, महासागर और वायुमंडल के बीच कार्बन की मात्रा पर भी असर पड़ता है। मिट्टी में कार्बन की मदद से सूक्ष्मजीव अपने चक्र को पूरा करते हैं, जिनका कार्बन के नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान होता है।

मिट्टी के विभिन्न सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) के समूह कार्बन चक्र में अलग-अलग भूमिका निभाते हैं।  एसडीएसयू के शोधकर्ता और डॉक्टरेट छात्र लियुआन ने कहा सूक्ष्म जीव और फंगल की गतिविधि के मॉडल को अपनाने से कार्बन चक्र पर मिट्टी के सूक्ष्मजीवों के प्रभाव के बारे में बहुत अधिक जानकारी मिलती है।

ग्लोबल चेंज बायोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया कि मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की खोज विज्ञान को आगे बढ़ाती है और बदलती जलवायु परिस्थितियों में मिट्टी के कार्बन भंडारण की हमारी समझ और पारिस्थितिक के महत्व को सामने लाती है।

शोधकर्ताओं ने उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय वन, समशीतोष्ण शंकुधारी वन, समशीतोष्ण जंगल, झाड़ी वाले जंगल, झाड़ी, घास के मैदान, रेगिस्तान, टुंड्रा, और आर्द्रभूमि सहित नौ प्राकृतिक बायोम में एक व्यक्तिगत भूखंड के पैमाने पर कार्बन प्रवाह को देखा।

एसडीएसयू के सह-अध्ययनकर्ता और एक पारिस्थितिकी तंत्र पारिस्थितिकी विशेषज्ञ चुन-ता लाइ ने कहा यह अध्ययन पृथ्वी प्रणाली के मॉडल में सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) के साथ मौसम को शामिल करने की आवश्यकता को दिखाता है, ताकि हम जलवायु-कार्बन के परस्पर पड़ने वाले प्रभाव का बेहतर अनुमान लगा सकें।

शोधकर्ता दुनिया भर में भूमि उपयोग में होने वाले बदलावों को देखते हुए सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) का मौसमी और वैश्विक कार्बन संतुलन पर इसके प्रभाव का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं।