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जानिए अंटार्कटिका के ऊपर क्यों दिखाई दिया ओजोन छिद्र

1980 के मध्य में अंटार्कटिक ओजोन परत के गंभीर रूप से कमजोर होने का मामला पहली बार सामने आया था।

By Dayanidhi

On: Wednesday 31 March 2021
 
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Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

पहले भाग में हमने ओजोन के बारे में कुछ सामान्य जानकारियां बताई थी, आइए इसे आगे लेकर चलते हैं- 

क्लोरीन और ब्रोमीन प्रतिक्रियाएं (रिएक्शन) क्या हैं जो स्ट्रैटोस्फेरिक ओजोन या ओजोन परत को नष्ट करती हैं?

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, क्लोरीन और ब्रोमिन युक्त प्रतिक्रियाशील गैसें दो या उससे अधिक अलग-अलग प्रतिक्रियाओं से बने "उत्प्रेरक" चक्रों में स्ट्रैटोस्फेरिक ओजोन को नष्ट कर देती हैं। परिणामस्वरूप, एक इकलौता क्लोरीन या ब्रोमीन का परमाणु ओजोन परत को छोड़ने से पहले कई हजारों ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। इस तरह, थोड़ी मात्रा में प्रतिक्रियाशील क्लोरीन या ब्रोमीन का ओजोन परत पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।

अंटार्कटिका के ऊपर एक "ओजोन छिद्र" क्यों दिखाई दिया

ओजोन को नष्ट करने वाले पदार्थ समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फेरिक) की ओजोन परत में मौजूद होते हैं, क्योंकि वायुमंडलीय वायु के बहाव की गति के द्वारा उन्हें बड़ी दूर पहुंचाया जाता है। अंटार्कटिक ओजोन परत को "ओजोन छिद्र" के रूप में जाना जाता है, यह गंभीर कमी विशेष रूप से मौसम संबंधी और रासायनिक स्थितियों के कारण होती है।

अंटार्कटिका समताप मंडल में सर्दियों के बहुत कम तापमान के कारण ध्रुवीय समताप मंडल (पीएससीएस) बनते हैं। पीएससीएस पर होने वाली विशेष प्रतिक्रियाएं, ध्रुवीय भंवर में ध्रुवीय समतापमंडलीय वायु से अलग होकर साथ में मिलने से, अंटार्कटिका में वसंत ऋतु के दौरान क्लोरीन और ब्रोमीन में प्रतिक्रिया होती है जिससे ओजोन छिद्र बनता है।  

Photo : Wikimedia Commons

अंटार्कटिक ओजोन परत का कमजोर पड़ना कितना गंभीर है?

1980 के मध्य में अंटार्कटिक ओजोन परत के गंभीर रूप से कमजोर होने का मामला पहली बार सामने आया था। अंटार्कटिक ओजोन का कमजोर होना मौसमी है, जो मुख्य रूप से सर्दियों और शुरुआती वसंत (अगस्त-नवंबर) में होता है। अक्टूबर की शुरुआत में तब कमजोर होती है जब ओजोन अक्सर समताप मंडल की ऊंचाई पर पूरी तरह से नष्ट हो जाती है, जिससे कुछ स्थानों पर कुल ओजोन में दो तिहाई की कमी होती है। इस गंभीर कमी के कारण "ओजोन छेद" बनाता है।

क्या आर्कटिक ओजोन की परत नष्ट हो रही है?

हां, आर्कटिक ओजोन परत कमजोर पड़ रही है, यह अधिकांश वर्षों में देर से सर्दियों और शुरुआती वसंत अवधि (जनवरी-मार्च) में होती है। हालांकि, आर्कटिक में देखी गई कमजोर ओजोन अधिक गंभीर नहीं है। यहां तक कि सबसे गंभीर आर्कटिक ओजोन कमी भी अंटार्कटिका में देखे गए कुल ओजोन की मात्रा को कम नहीं करता है।

वैश्विक ओजोन कितनी कमजोर हुई है?

विश्व स्तर पर कुल ओजोन की प्रचुरता अब 1964-1980 के दौरान मौजूद मात्रा से लगभग 2-3 फीसदी कम है। 1980 के दशक में कुल वैश्विक ओजोन की प्रचुरता में मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न समताप मंडल में प्रतिक्रियाशील हैलोजन गैसों में वृद्धि के कारण लगातार गिरावट आई।

1990 के दशक की शुरुआत में, 1964-1980 के औसत के मुकाबले वैश्विक कुल ओजोन में 5 फीसदी की कमी आई थी, जो आधुनिक उपकरण युग के दौरान अधिकतम गिरावट थी। दोनों गोलार्द्धों में, कुल ओजोन की कमी भूमध्य रेखा के पास कम है और ध्रुवों की ओर बढ़ती है।

उच्च अक्षांशों पर बड़ी गिरावट, आंशिक रूप से, ओजोन के देर से सर्दियों / शुरुआती वसंत में नष्ट होने के कारण होती है, जो ध्रुवीय क्षेत्रों में होती है, विशेष रूप से अंटार्कटिका में।